‎दफ्तर है सरकारी, पर समय से नही पहोच रहे है अधिकार

‎चंद्रपुर - जिले के तहैसिल कार्यालय मे स्थित अन्नधान्य खरेदी कार्यालय मे कोई भी अधिकारी चाहे वो अन्न धान्य खरेदी अधिकारी हो या उस कार्यालय के अन्य अधिकारी हो जिनको कार्यालय में आने का समय शासन प्रशासन के तरफ से 9:30 से 10:00 बजे तक का दिया गया है। ‎परंतु हमारे संवाद दाता के लिए हुए वीडियो मे आप साफ साफ देख सकते है की 11:04 मिनट हो गए है परंतु ना बड़े अधिकारी और ना स्टाफ अधिकारी कोई भी वहा कार्यालय मे आये नही है। जैसे की आप इस वीडियो के माध्यम से देख सकते है की कार्यालय के उच्च अधिकारी सुमेर चवरे जो अन्न धान्य खरेदी अधिकारी है वो खुद प्रशासन द्वारा निर्धारित समय पर कार्यालय मे नही आते तो उनके कार्यालय के बाबू या कर्मचारी या अन्य अधिकारी क्या आयेंगे। 
‎यत्र राजा तत्र प्रजा, जैसे राजा वैसी प्रजा!

‎सरकार द्वारा भले ही पारदर्शी एवं जवाबदेही प्रशासन की बात की जाती हो लेकिन सरकारी विभागों में कार्यरत अधिकारी कर्मचारियों की लेट लतीफी और डेली अपडाउन की प्रवृति के कारण सरकारी दफ्तरों की दशा खराब है। सरकार द्वारा भले ही सुबह साढे नौ बजे से शाम छह बजे तक का कार्यालय समय निर्धारित किया हुआ है लेकिन कई बार प्रशासनिक अधिकारियों के निरीक्षण के दौरान सामने आया है कि कई अधिकारी-कर्मचारी सीट से नदारद मिलते हैं,जिससे लोगों को परेशानी होती है ‎अधिकारी-कर्मचारियों की लेटलतीफी और नदारद रहने से समय पर नहीं हो रहे काम,जनता परेशान ‎कई अधिकारी जब कार्यालय में नहीं होते हैं और उनसे मोबाइल पर बात की जाती है तो वे फील्ड में होने की बात कहते हैं। जबकि नियमानुसार फील्ड में जाने से पहले उनको कार्यालय में अपनी उपस्थिति दर्ज कर मूवमेंट बुक में फील्ड में जाने संबंधी जानकारी का अंकन करना होता है। कई कार्मिक डैली अपडाउन की प्रवृति के कारण विभिन्न कारणों से कार्यालय निर्धारित समय पर नहीं पहुंच पाते अथवा जल्दी ही कार्यालय छोड देते हैं, जिसके कारण लोग परेशान होते है। विभागीय उच्चाधिकारी या तो निरीक्षण नहीं करते हैं और यदि करते हैं तो दोषी कार्मिकों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाती है, जिससे इस प्रवृति पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।

‎यह सिर्फ एक दफ्तर की कहानी नहीं है,यह पूरे सिस्टम की तस्वीर है। समय पर न आने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के दावे तो किए जाते हैं,लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम भी कई जगह सिर्फ शोपीस बनकर रह गया है। ‎‎क्या चंद्रपुर की न्याय व्यवस्था इन जैसे अधिकारियों पर किसी तरह की ठोस कार्यवाही करेगी या ये मन मोजी अधिकारी ऐसे ही प्रशासन द्वारा निर्धारित समय का उल्लंघन् करते रहेंगे और आम जनता को अपने कामो के लिए इन अधिकारियो का युही इंतज़ार करना पड़ेगा। प्रशासन को समझना होगा कि उनके एक घंटे की देरी,आम जनता के लिए पूरा दिन बर्बाद कर देती है।

 ‎संवाददाता - अजय एस दुबे 

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