सामूहिक विवाह केवल आर्थिक सहायता का माध्यम नहीं,बल्कि सामाजिक समानता और सहयोग की मिसाल है- कैलाश आचार्य
शहाबगंज : स्थानीय विकास खंड कार्यालय परिसर में शुक्रवार का दिन एक असाधारण दृश्य का गवाह बना।परिसर में सजे पंडाल,फूलों की हल्की महक और मंत्रोच्चारण के बीच एक ही मंडप तले 50 जोड़ों के सात फेरे पूरे हुए।ये शादी केवल एक सामूहिक विवाह समारोह भर नहीं थीं बल्कि उन परिवारों की भावनाओं, संघर्षों और उम्मीदों का संगम थीं जिन्होंने आर्थिक तंगी के बावजूद अपने बच्चों के जीवन में खुशियों का उजाला फैलाने का सपना संजोया था।जहां समाज का एक वर्ग लाखों रुपये खर्च कर भव्य शादियां कर रहा है,वहीं दूसरी ओर इन 50 जोड़ों की सादगीपूर्ण मगर गरिमामयी शादी ने यह साबित कर दिया कि रिश्तों की पवित्रता तामझाम से नहीं,बल्कि समझ,सहयोग और मानवीय संवेदनाओं से बनती है।
सुबह से ही विकास खंड कार्यालय परिसर में चहल-पहल शुरू हो गई थी।चारों ओर रंग-बिरंगी साड़ियां,साफा पहने दूल्हे और मेहमानों की मुस्कानें माहौल को खुशनुमा बना रही थीं।विकास खंड कार्यालय की ओर से लगाए गए पंडालों में हर सुविधा मुहैया कराई गई थी चेंजिंग रूम,मेहमानों के लिए बैठक व्यवस्था,भोजन, चिकित्सा सहायता और पंडितों की अलग टीम।
शादी संपन्न कराने के लिए वैदिक मंडप बनाए गए थे जहां मंत्रोच्चारण के बीच जोड़े क्रमवार सात फेरे ले रहे थे।
घर से दूल्हा बनकर आए एक युवक से जब पूछा गया कि सामूहिक विवाह में शादी करके कैसा लग रहा है,तो वह कुछ देर रुका,फिर धीरे से बोला भैया,मन तो करता था कि शादी धूमधाम से करूं, घोड़ी,बैंड-बाजा सब हो, लेकिन घर की आर्थिक स्थिति ने मन रोक दिया।पर क्या करें,शादी तो करनी ही थी।सरकार की इस योजना ने बोझ कम कर दिया।अब लग रहा है कि बिना कर्ज लिए भी जीवन की नई शुरुआत हो सकती है।
युवक ने नाम न छापने की शर्त पर यह भी कहा कि सामूहिक विवाह को लेकर समाज में अब जो सकारात्मक सोच बनी है,वह गरीब परिवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं।इस समारोह में शामिल एक वृद्ध महिला अपनी बेटी की शादी होते देख भावुक हो उठीं।आंखों में आंसू पोंछते हुए बोलीं हम अकेली कमाने वाली हैं।सोचते थे कैसे शादी करेंगे।लेकिन जब कागज जमा किए और मंजूरी मिल गई तो लगा कि मानो भगवान ने ही रास्ता खोल दिया।आज मेरी बेटी दुल्हन बनी है,इससे बड़ा सुख क्या होगा।दुल्हनें भी अपने-अपने तरीके से भावनाएं जाहिर कर रही थीं किसी के चेहरे पर हौले-हौले शरम का भाव,तो किसी के चेहरे पर भविष्य की उम्मीदें चमक रही थीं।समारोह के दौरान देखने वाली बात यह थी कि सादगी होते हुए भी किसी भी जोड़े की शादी में कमी नहीं छोड़ी गई।सभी दूल्हा-दुल्हनों को सरकारी सहायता के तहत उपहार सामग्री दी गई,जिसमें बिस्तर,बर्तन,कपड़े, साड़ी-सूट और आवश्यक गृहस्थ सामग्री शामिल थी।इन वस्तुओं को लेते समय कई नवविवाहित जोड़े इस बात को दोहरा रहे थे कि यदि ये सब स्वयं खरीदना पड़ता तो उनके लिए शादी करना और भी कठिन हो जाता।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित क्षेत्रीय विधायक कैलाश आचार्य,पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सरिता सिंह,खंड विकास अधिकारी दिनेश सिंह,प्रमुख प्रतिनिधि राकेश सिंह ने जोड़ों को आशीर्वाद दिया और संदेश दिया कि सामूहिक विवाह केवल आर्थिक सहायता का माध्यम नहीं,बल्कि सामाजिक समानता और सहयोग की मिसाल है।विधायक कैलाश आचार्य ने कहा कि हमारे समाज में विवाह को अत्यधिक दिखावे का माध्यम बना दिया गया है,जिसके कारण गरीब परिवारों को भारी आर्थिक दबाव झेलना पड़ता है।सामूहिक विवाह ऐसी सोच को बदलने का प्रयास है।दोपहर बाद भोजन की व्यवस्था की गई जिसमें साधारण लेकिन स्वादिष्ट दाल,सब्जी,पूरी,मिठाई और सलाद परोसा गया। दूल्हा-दुल्हन और उनके परिवार भोजन करते हुए एक-दूसरे से अनुभव साझा करते दिखे।वर-वधू अपने हाथों में उपहार और दिलों में नई उम्मीदें लिए पंडाल से बाहर निकल रहे थे।किसी के चेहरे पर संतोष था,किसी पर भविष्य की योजना पर सबके मन में एक भरोसा जरूर था कि जीवन की शुरुआत बिना आर्थिक बोझ के भी हो सकती है।इस कार्यक्रम ने एक बड़ा संदेश दिया कि भव्यता ही विवाह की पहचान नहीं।एक-दूसरे के प्रति सम्मान,सामाजिक सहयोग और संवेदनाएं एक शादी को खूबसूरत बनाती हैं।
रिपोर्टर : अंकित सैनी
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