मोबाइल शॉप के नाम से स्ट्रीट लाइट का टेंडर

चंदौली : चंदौली जनपद के चकिया ब्लॉक अंतर्गत दाउदपुर गांव में विकास के नाम पर बड़ा खेल सामने आता दिख रहा है। प्रदेश सरकार जहां जीरो टॉलरेंस नीति का दावा करती है, वहीं जमीनी हकीकत इस दावे को चुनौती देती नजर आ रही है। गांव में स्ट्रीट लाइट लगाने के नाम पर हुए कार्यों ने अब कई सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में भारी गड़बड़ी हुई है, और सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि मोबाइल शॉप के नाम पर टेंडर जारी कर दिया गया

*क्या कहते हैं ग्रामीण?
गांव के लोगों का कहना है 
स्ट्रीट लाइट लगाने का काम बिना पारदर्शिता के कराया गया
कई जगह लाइट या तो लगी ही नहीं, या कुछ दिनों में खराब हो गई
कार्य कराने वाली फर्म की योग्यता संदिग्ध है
ग्रामीणों ने इसे सीधे-सीधे सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला बताया है।
टेंडर प्रक्रिया पर बड़ा सवाल
सरकारी नियमों के अनुसार किसी भी विकास कार्य के लिए:
संबंधित विभाग द्वारा तकनीकी योग्यता की जांच
उचित निविदा (टेंडर) प्रक्रिया
अनुभवी फर्म को कार्य आवंटन
लेकिन दाउदपुर में मोबाइल शॉप जैसी फर्म को स्ट्रीट लाइट का टेंडर मिलना, पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
कागजों में विकास, जमीन पर अंधेरा
गांव में कई स्थानों पर लाइटें या तो बंद हैं या ठीक से काम नहीं कर रहीं। इससे साफ जाहिर होता है कि: ???? काम की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया गया
???? केवल कागजी खानापूर्ति कर बजट निकाल लिया गया
प्रशासन की चुप्पी क्यों?
इतना बड़ा मामला सामने आने के बावजूद अभी तक जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
यह सवाल उठ रहा है कि: ???? क्या इस पूरे खेल में मिलीभगत है?
???? या फिर जांच को जानबूझकर टाला जा रहा है?
ग्रामीणों की मांग
पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच हो
टेंडर प्रक्रिया की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई हो
गांव में सही तरीके से दोबारा कार्य कराया जाए
अंतिम सवाल
जब सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त होने का दावा कर रही है, तो आखिर दाउदपुर जैसे गांवों में इस तरह के मामले क्यों सामने आ रहे हैं?
क्या “रोशनी” के नाम पर अंधेरा फैलाने वालों पर कार्रवाई होगी… या मामला यूं ही दब जाएगा?

रिपोर्टर : मधुप श्रीवास्तव

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