चंद्रपुर महापौर की कुर्सी पर सियासी संग्राम! ठाकरे गुट–वंचित बने किंगमेकर, कांग्रेस–भाजपा की बढ़ी बेचैनी

चंद्रपुर : चंद्रपुर महानगरपालिका की राजनीति में इस वक्त जबरदस्त उथल-पुथल देखने को मिल रही है। सत्ता गठन का गणित बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। शुक्रवार को नागपुर स्थित संभागीय आयुक्त कार्यालय में शिवसेना ठाकरे गुट और वंचित बहुजन आघाड़ी ने एक साथ आकर अपने नए गुट की आधिकारिक नोंदणी करवाई। इस नई सियासी युति ने चंद्रपुर की सत्ता के समीकरण पूरी तरह बदल दिए हैं, जिससे कांग्रेस और भाजपा—दोनों ही बड़े दलों की धड़कनें तेज हो गई हैं।

ठाकरे गुट ने साफ शब्दों में ऐलान कर दिया है कि “जो पार्टी हमें महापौर पद देगी, हम उसी को समर्थन देंगे।” इस सीधे-सपाट रुख के बाद अब चंद्रपुर में कौन किसके साथ जाएगा, इसे लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है।
गौरतलब है कि चुनाव से पहले भाजपा में सुधीर मुनगंटीवार और किशोर जोरगेवार के बीच खींचतान खुलकर सामने आई थी। वहीं, चुनाव नतीजों के बाद कांग्रेस में भी विजय वडेट्टीवार और सांसद प्रतिभा धानोरकर के बीच मतभेद उजागर हो गए। बड़े दलों की इसी अंदरूनी गुटबाजी का फायदा अब ठाकरे गुट और वंचित बहुजन आघाड़ी की युति उठाती नजर आ रही है।
“दो बिल्लियों की लड़ाई में बंदर को फायदा”—इस कहावत की तर्ज पर अब सवाल उठ रहा है कि क्या कांग्रेस और भाजपा को मात देकर ठाकरे गुट अपना महापौर बैठाने में सफल होगा?
शिवसेना ठाकरे गुट के जिलाप्रमुख संदीप गिरे ने इस नई युति की घोषणा करते हुए दावा किया है कि दो अपक्ष नगरसेवक उनके संपर्क में हैं। यदि ये अपक्ष साथ आते हैं, तो इस गुट की संख्या 10 तक पहुंच जाएगी। 66 सदस्यीय महानगरपालिका में यह संख्या सत्ता गठन में निर्णायक साबित हो सकती है। फिलहाल ठाकरे गुट के 6 और वंचित के 2—कुल 8 नगरसेवक एकजुट होकर खुद को किंगमेकर के रूप में पेश कर रहे हैं।
महानगरपालिका में कांग्रेस 30 सीटों के साथ सबसे बड़ा दल जरूर है, लेकिन बहुमत के लिए उसे अभी और संख्याबल की जरूरत है। ठाकरे गुट ने कांग्रेस के सामने महापौर पद की शर्त रखते हुए प्रस्ताव भेजा है। संदीप गिरे ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि कांग्रेस ने यह प्रस्ताव नहीं माना, तो भाजपा सहित अन्य विकल्प खुले हैं। इस बयान के बाद कांग्रेस खेमे में चिंता का माहौल है।
दूसरी ओर, कांग्रेस के अंदरूनी विवाद अब सुलझते नजर आ रहे हैं। ओबीसी महिला वर्ग के लिए आरक्षित महापौर पद के लिए कांग्रेस की ओर से संजीवनी वासेकर के नाम पर लगभग मुहर लगने की जानकारी विश्वसनीय सूत्रों ने दी है। खास बात यह है कि आरक्षण से पहले जिन नामों की चर्चा थी, उनमें संजीवनी वासेकर का नाम कहीं नहीं था। इसके बावजूद, प्रभाग क्रमांक 10 एकोरी से विजयी हुईं इस नए चेहरे को आगे लाकर कांग्रेस ने सियासी हलकों को चौंका दिया है।
माजी महापौर संगीता अमृतकर, सुनंदा धोबे, वनश्री मेश्राम और संजीवनी वासेकर—इन चार अनुभवी महिला नगरसेविकाओं में से चयन करना कांग्रेस नेतृत्व के लिए बड़ी चुनौती था। आखिरकार विजय वडेट्टीवार और सांसद प्रतिभा धानोरकर—दोनों को स्वीकार्य नाम के तौर पर संजीवनी वासेकर पर सहमति बनती दिखाई दे रही है।चंद्रपुर की राजनीति में अगले कुछ दिन बेहद अहम माने जा रहे हैं, क्योंकि महापौर की कुर्सी पर बैठने वाला चेहरा सिर्फ सत्ता नहीं, बल्कि पूरे जिले की दिशा तय करेगा।

रिपोर्टर : गौतम मंडल 

 

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