झोलाछाप इलाज ने छीनी दो जिंदगियां: 8 माह की गर्भवती बैजंती और उसके अजन्मे बच्चे की मौत से गांव में मातम

चतरा : चतरा जिले के लावालौंग थाना क्षेत्र में कथित तौर पर अवैध और लापरवाहीपूर्ण इलाज का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने मानवता को झकझोर कर रख दिया है। लावालौंग थाना क्षेत्र के चुकु गांव निवासी लाटो गंझू की 20 वर्षीय गर्भवती पत्नी बैजंती देवी की इलाज के दौरान मौत हो गई। बताया जा रहा है कि बैजंती आठ माह की गर्भवती थी और उसके गर्भ में पल रहे बच्चे की भी मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे गांव में शोक और आक्रोश का माहौल है। परिजनों के अनुसार, चतरा बस स्टैंड के समीप संचालित मेदांता नर्सिंग होम में बुधवार से महिला का इलाज चल रहा था। इलाज के दौरान परिजनों को बताया गया कि गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत हो चुकी है। इसके बाद महिला की हालत लगातार बिगड़ती चली गई और आखिरकार उसने भी दम तोड़ दिया।

इलाज के नाम पर हजारों की वसूली का आरोप

मृतका के परिजनों ने आरोप लगाया है कि अस्पताल प्रबंधन ने इलाज के नाम पर अब तक करीब 25 हजार रुपये वसूल लिए थे। वहीं ऑपरेशन करने के लिए 40 हजार रुपये की अतिरिक्त मांग की जा रही थी। परिजनों का कहना है कि आर्थिक तंगी के बावजूद महिला और बच्चे की जान बचाने की उम्मीद में वे अस्पताल की हर मांग पूरी कर रहे थे।

ब्लड चढ़ाने के बाद बिगड़ी हालत

परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में महिला को एक यूनिट रक्त चढ़ाया गया, जिसके लिए उनसे 9 हजार रुपये लिए गए। आरोप यह भी है कि रक्त चढ़ाने से पहले आवश्यक प्रक्रिया और क्रॉस मैचिंग नहीं की गई। रक्त चढ़ाने के बाद ही महिला की स्थिति और गंभीर हो गई। स्वास्थ्य नियमों के अनुसार रक्तदान, रक्त की जांच और क्रॉस मैचिंग की प्रक्रिया अधिकृत ब्लड बैंक के माध्यम से ही की जानी चाहिए। ऐसे में पूरे मामले को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

दो मौतों से टूटा परिवार

बैजंती देवी की मौत ने परिवार को पूरी तरह तोड़ दिया है। जिस घर में कुछ दिनों बाद बच्चे की किलकारी गूंजने वाली थी, वहां आज मातम पसरा हुआ है। एक ही घटना में मां और अजन्मे बच्चे की मौत ने परिजनों को गहरे सदमे में डाल दिया है। गांव में हर आंख नम है और लोग इस घटना को लेकर दुख और गुस्सा दोनों जाहिर कर रहे हैं।

मामले को दबाने की कोशिश का आरोप

परिजनों और ग्रामीणों का आरोप है कि घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन मामले को मैनेज करने में जुटा हुआ है। मृतक के घर पर लगातार वह जमा हुआ है। उसका एकमात्र उद्देश्य ह किसी भी प्रकार से इस मामले को थाना तक नहीं जाने देने का।

शव गांव में, कार्रवाई की मांग

मृतका का शव अभी तक चुकु गांव में रखा हुआ है। परिजन और ग्रामीण दोषियों पर कड़ी कार्रवाई तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते सही इलाज मिलता तो शायद मां और उसके अजन्मे बच्चे की जान बचाई जा सकती थी।
यह घटना एक बार फिर स्वास्थ्य व्यवस्था, निजी नर्सिंग होमों की कार्यशैली और कथित झोलाछाप चिकित्सा पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। अब सभी की निगाहें प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर टिकी हैं कि आखिर बैजंती और उसके अजन्मे बच्चे की मौत के जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई होती है।

रिपोर्टर : मो0 साजिद

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