लावालौंग के खैवा बंदारू व मेगालिथ स्थल का निरीक्षण, पर्यटन विकास और संरक्षण के दिए निर्देश
चतरा : लावालौंग प्रखंड के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल खैवा बंदारू और पाषाणकालीन मेगालिथ (महापाषाण) स्थल की प्राकृतिक एवं ऐतिहासिक विरासत ने शनिवार को उपायुक्त रवि आनंद का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। बधार से खाईवा जाने के दौरान सड़क किनारे स्थित मेगालिथिक परिसर को देखकर उन्होंने अपना काफिला रुकवाया और स्थल का निरीक्षण किया।
हरगड़ी के नाम से प्रसिद्ध इस स्थल पर बड़ी संख्या में महापाषाण संरचनाएं (मेगालिथ) आज भी मौजूद हैं जो आदिवासी सभ्यता और प्राचीन सांस्कृतिक विरासत की महत्वपूर्ण पहचान मानी जाती हैं। परिसर में बिखरी पाषाणकालीन कलाकृतियों का अवलोकन करते हुए उपायुक्त ने स्थानीय ग्रामीणों से इस स्थल के इतिहास, सांस्कृतिक महत्व और पुरातात्विक विशेषताओं की जानकारी ली। उन्होंने इस अमूल्य धरोहर के संरक्षण और इसे पर्यटन के रूप में विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
इसके बाद उपायुक्त खैवा बंदारू पहुंचे। तथा पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि मिथलेश कुमार चौबे ने खाइवा/ बंदारू के बारे में विस्तृत जानकारी डीसी महोदय की दी। वही साहब ने विशाल चट्टानों के बीच से बहती नदी और उससे निर्मित मनमोहक जलप्रपात का प्राकृतिक दृश्य देखकर वे अभिभूत हो गए। उन्होंने कहा कि यह स्थल प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ पर्यटन की अपार संभावनाओं से भरपूर है। पर्यटकों की सुविधा, सुरक्षा, स्वच्छता, पहुंच मार्ग, संकेतक बोर्ड और अन्य आधारभूत सुविधाओं के विकास के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने आसपास स्थित अन्य प्राचीन एवं ऐतिहासिक स्थलों की भी जानकारी ली और उनके संरक्षण व पर्यटन विकास की संभावनाओं पर चर्चा की।
रिपोर्टर : मो0 साजिद
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