ग्रामीण प्रतिभाओं के सपनों को विधायक प्रशांत बंब का 'बल'; MPSC की तैयारी कर रही दो छात्राओं को पुस्तक सेट भेंट

छत्रपति संभाजीनगर : 'जहाँ चाह वहाँ राह' वाली कहावत को चरितार्थ करते हुए, गंगापुर-खुलताबाद निर्वाचन क्षेत्र की दो होनहार बेटियों के सपनों को विधायक प्रशांत बंब ने नई उड़ान दी है। ग्रामीण क्षेत्रों से प्रशासनिक सेवा में जाने का सपना देखने वाली काजल विलास पगारे और गीता राजेंद्र सुकासे को आर्थिक तंगी के कारण प्रतियोगी परीक्षाओं की महंगी पुस्तकें जुटाने में कठिनाई हो रही थी। इसे देखते हुए विधायक प्रशांत बंब ने दोनों छात्राओं को एमपीएससी (MPSC) के नवीनतम पाठ्यक्रम के पुस्तक सेट भेंट किए। निर्वाचन क्षेत्र में केवल सड़कों और बुनियादी ढांचों तक सीमित न रहकर, विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य और 'गुणवत्तापूर्ण शिक्षा' के लिए व्यक्तिगत रूप से प्रयास करने वाले पहले विधायक के रूप में प्रशांत बंब की एक नई पहचान बनी है।

विधायक प्रशांत बंब का मुख्य उद्देश्य अपने निर्वाचन क्षेत्र के प्रत्येक जरूरतमंद और मेधावी छात्र को सफलता के शिखर तक पहुँचाना है। वे अक्सर ऐसे विद्यार्थियों की मदद के लिए आगे आते हैं, जो अभावों के बावजूद पढ़ाई में अव्वल हैं। उनके इस सराहनीय कार्य की पूरे जिले में चर्चा हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि बंब न केवल राजनीति, बल्कि शिक्षा के माध्यम से समाज के नवनिर्माण का कार्य कर रहे हैं। इस मदद से काजल और गीता के अधिकारी बनने के संकल्प को अब एक मजबूत आधार मिल गया है।

प्रमुख प्रतिक्रियाएँ:

काजल विलास पगारे: "प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महंगी और स्तरीय पुस्तकें खरीदना हमारे लिए बहुत मुश्किल था। विधायक प्रशांत बंब साहब ने हमारी इस समस्या को समझा और मदद की। साहब ने हम पर जो विश्वास दिखाया है, मैं अधिकारी बनकर उसे निश्चित रूप से सार्थक सिद्ध करूँगी।"

गीता राजेंद्र सुकासे: "ग्रामीण क्षेत्र में रहकर तैयारी करते समय हमेशा डर रहता था कि कहीं पैसों की कमी के कारण पढ़ाई न छूट जाए। लेकिन आज विधायक साहब द्वारा दी गई ये पुस्तकें केवल कागज नहीं, बल्कि मेरे सपनों को मिला नया हौसला हैं। हमें गर्व है कि हमारे विधायक विद्यार्थियों के बारे में इतना सोचते हैं।"

विधायक प्रशांत बंब: "मेरा यह मानना है कि मेरे निर्वाचन क्षेत्र का कोई भी प्रतिभाशाली विद्यार्थी संसाधनों या पैसों के अभाव में शिक्षा से वंचित नहीं रहना चाहिए। काजल और गीता जैसी मेहनती बेटियाँ जब प्रशासनिक सेवा में जाकर समाज की सेवा करेंगी, तो वह मेरे लिए किसी भी विकास कार्य से बढ़कर संतोष की बात होगी।"

रिपोर्टर : शिवाजी तांबे 

 

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