गुरु धानोरा में अखंड हरिनाम सप्ताह का समापन; महंत श्रीकांतगिरीजी महाराज के 'काल्या' कीर्तन से श्रद्धालु हुए मंत्रमुग्ध
छत्रपतिसंभाजीनगर : तहसील के गुरु धानोरा में रामनवमी से हनुमान जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित भव्य अखंड हरिनाम सप्ताह का समापन हनुमान जयंती के पावन अवसर पर अत्यंत उत्साह के साथ हुआ। इस सप्ताह का समापन अंबऋषि संस्थान आमसरी के महंत श्रीकांतगिरी गुरु कृष्णगिरीजी महाराज के 'काल्या' (विदाई भोज एवं कीर्तन) के कीर्तन के साथ हुआ। इस दौरान महाराज ने अपनी मधुर वाणी से उपस्थित श्रद्धालुओं को भक्ति और संस्कारों का महत्व समझाया, जिससे पूरा गुरु धानोरा गांव भक्ति रस में सराबोर हो गया।
संस्कारों की पूंजी और वाणी की मधुरता आवश्यक
कीर्तन के दौरान निरूपण करते हुए श्रीकांतगिरी महाराज ने कहा, "आज के भागदौड़ भरे युग में हम भौतिक प्रगति तो कर रहे हैं, लेकिन अपने बच्चों को उचित संस्कार देना भूल गए हैं। माता-पिता को चाहिए कि वे अपने बच्चों को स्कूली शिक्षा के साथ-साथ अध्यात्म के प्रति भी जागरूक करें। बच्चों पर होने वाले अच्छे संस्कार ही कल के सुसंस्कृत समाज की नींव हैं।"
आगे बोलते हुए उन्होंने वाणी के महत्व पर विशेष जोर दिया। महाराज ने कहा:
"हमारी वाणी और व्यवहार ऐसा होना चाहिए कि हमारे शब्दों से लोग हमसे जुड़ें। यहाँ तक कि किसी से विवाद या बहस करते समय भी मुख में 'हरि' का नाम होना चाहिए। निरंतर भगवद नाम स्मरण करने से अंतःकरण शुद्ध होता है और मानव जीवन सार्थक होता है।"
युवाओं और ग्रामीणों के नियोजन की सराहना
गुरु धानोरा के युवा मंडल और समस्त ग्रामीणों द्वारा एकजुट होकर इस सप्ताह को सफल बनाने के लिए महाराज ने उनकी जमकर सराहना की। इन सात दिनों के दौरान गांव में आध्यात्मिक चैतन्य का माहौल बना रहा। सप्ताह में प्रतिदिन तड़के काकड़ा भजन, सुबह ज्ञानेश्वरी पारायण, गाथा भजन, दोपहर में संत चरित्र कथा, शाम को हरिपाठ और रात में प्रसिद्ध कीर्तनकारों के कीर्तन जैसे विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया था। इन धार्मिक कार्यक्रमों से पूरे क्षेत्र का वातावरण भक्तिमय हो गया।
महाप्रसाद के साथ हुआ समापन
सप्ताह के अंतिम दिन हनुमान जयंती के अवसर पर भव्य महाप्रसाद का आयोजन किया गया। गुरु धानोरा सहित आसपास के हजारों श्रद्धालुओं ने इस महाप्रसाद का लाभ उठाया। युवा मंडल के स्वयंसेवकों ने अनुशासित तरीके से व्यवस्था संभालते हुए श्रद्धालुओं की सुविधा का ध्यान रखा। गांव के बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक सभी ने इस समारोह के लिए दिन-रात मेहनत की, जिससे यह आयोजन पूरी तहसील में चर्चा का विषय बना हुआ है। श्रीकांतगिरी महाराज के उपदेश और ग्रामीणों की एकजुटता ने इस सप्ताह के माध्यम से सामाजिक सद्भाव का एक अनूठा आदर्श पेश किया है।
रिपोर्टर : शिवाजी तांबे


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