AK 47 से लेकर VNR, मिर्च की खेती के लिए बेस्ट हैं ये 4 किस्में...
खेती-किसानी में अब किसान पारंपरिक फसलों के साथ-साथ सब्जियों की खेती की ओर भी तेजी से बढ़ रहे हैं। सब्जियों की खेती में कम समय में बेहतर आमदनी की संभावना रहती है, लेकिन अच्छी पैदावार के लिए सही किस्म के बीज का चयन और फसल प्रबंधन बेहद जरूरी होता है। खासकर मिर्च की खेती में मौसम बदलने के साथ कई तरह के रोग और कीटों का प्रकोप देखने को मिलता है। ऐसे में किसान यदि शुरुआत से ही फसल की निगरानी करें और समय पर बचाव के उपाय अपनाएं तो नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
जानें मिर्च की कौन सी किस्में हैं बेहतर
मिर्च की खेती में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका अच्छी गुणवत्ता वाले बीज की होती है। सही किस्म का चयन करने से उत्पादन बेहतर होने के साथ फसल से अच्छी आमदनी भी प्राप्त की जा सकती है। मिर्च की खेती के लिए एडवांटा की एके 47, वीएनआर 6013, शून्य 6013 और सानिया एफ-1 जैसी किस्मों को बेहतर विकल्प माना जाता है। हालांकि, इन किस्मों में भी मौसम और कीटों के प्रकोप के कारण रोग लगने की आशंका बनी रहती है। इसलिए किसानों को फसल की नियमित निगरानी करते रहना चाहिए।
मिर्च में भंगुरी रोग लगे तो क्या करें
मिर्च की फसल में बारिश के मौसम के दौरान भंगुरी रोग का प्रकोप बढ़ सकता है। इस रोग की वजह से पौधे की पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं और उनमें मुरझाने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। धीरे-धीरे पत्तियां झड़ने लगती हैं और पौधे में फल आने की क्षमता भी प्रभावित होती है। वैज्ञानिक रूप से यह येलो वेन मोजेक वायरस से जुड़ी समस्या हो सकती है। यह वायरल रोग होने के कारण इसका सीधा उपचार आसान नहीं होता, इसलिए शुरुआती स्तर पर रोकथाम करना अधिक प्रभावी माना जाता है।
जैविक तरीके से ऐसे करें बचाव
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, जैविक खेती करने वाले किसान रोग के नियंत्रण के लिए नीम तेल का छिड़काव कर सकते हैं। इसके अलावा सफेद मक्खी जैसे कीटों की निगरानी और नियंत्रण के लिए पीले एवं नीले चिपचिपे ट्रैप लगाए जा सकते हैं। इन ट्रैप पर कीट चिपक जाते हैं, जिससे उनकी संख्या को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। आवश्यकता पड़ने पर कृषि विशेषज्ञ की सलाह से उचित कीटनाशी और सकिंग पेस्ट को नियंत्रित मात्रा में मिलाकर छिड़काव किया जा सकता है।
बारिश के मौसम में बढ़ जाता है खतरा
मिर्च की फसल में यह समस्या विशेष रूप से बारिश और उमस वाले मौसम में बढ़ सकती है। रोग और कीटों के कारण पौधों की बढ़वार प्रभावित होने के साथ पत्तियां झड़ने लगती हैं और फलन कम हो सकता है। इसलिए किसानों को खेत में लगातार निगरानी रखनी चाहिए। किसी पौधे में शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर उसे तुरंत अलग कर उचित प्रबंधन उपाय अपनाना जरूरी है।
कीटनाशी के छिड़काव के बाद तुरंत न तोड़ें मिर्च
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि फसल में कीटनाशी का प्रयोग किया गया है तो उसके बाद मिर्च की तुड़ाई में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। कीटनाशी के इस्तेमाल के बाद कम से कम निर्धारित प्रतीक्षा अवधि पूरी होने के बाद ही सब्जी की तुड़ाई करें। सामान्य तौर पर उत्पाद के लेबल और कृषि विशेषज्ञ की सलाह में दी गई अवधि का पालन करना जरूरी है। इससे फसल सुरक्षित रहने के साथ उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव का खतरा कम होता है।
समय पर निगरानी से बच सकता है बड़ा नुकसान
मिर्च की फसल में रोग और कीटों का प्रकोप बढ़ने से पहले ही किसान यदि नियमित निरीक्षण करें तो नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। पत्तियों का पीला पड़ना, मुरझाना, झड़ना या फलन में अचानक कमी जैसे संकेत दिखाई देने पर तुरंत कृषि विशेषज्ञ से सलाह लेकर उचित कदम उठाना चाहिए। सही बीज, संतुलित प्रबंधन और समय पर रोग नियंत्रण से किसान मिर्च की खेती से बेहतर उत्पादन और अच्छी आमदनी प्राप्त कर सकते हैं।
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