राजुरा में रेती माफिया बेनकाब! रात 11 बजे प्रशासन की रेड

चंद्रपुर - जिले का राजुरा तालुका इन दिनों अवैध रेती उत्खनन और तस्करी के काले कारोबार को लेकर सुर्खियों में है। रात के अंधेरे में शासन की तिजोरी को करोड़ों का चूना लगाने वाला रेती माफियाओं का यह नेटवर्क वर्षों से सक्रिय था। 15 जनवरी 2026, रात ठीक 11 बजे, राजुरा तालुका के मूर्ति गांव परिसर में प्रशासन ने अचानक छापा मारकर अवैध रेती उत्खनन और भंडारण का खुलासा किया। तहसीलदार ओमप्रकाश गौड और मंडल अधिकारी सुभाष सालवे के नेतृत्व में की गई इस कार्रवाई में रेती माफियाओं को करारा झटका लगा। इस कार्रवाई के पीछे जय भवानी कामगार संघटना के संस्थापक अध्यक्ष व कांग्रेस के नवनियुक्त उपजिलाध्यक्ष सुरज ठाकरे की अहम भूमिका रही। रेवर्धा नदी पात्र में बड़े पैमाने पर चल रहे अवैध रेती उत्खनन की जानकारी मिलते ही उन्होंने प्रशासन से सीधा संपर्क कर जवाब तलब किया, जिसके बाद राजस्व विभाग एक्शन मोड में आया।

जेसीबी (MH-CD-6990),बिना नंबर प्लेट का कुबोटा ट्रैक्टर,और लगभग 8 ब्रास अवैध रेती का भंडार जब्त किया गया।
हालांकि अंधेरे का फायदा उठाकर कुछ हाइवा चालक मौके से फरार हो गए, लेकिन MH-34-BZ-2784 और MH-34-BZ-2782 इन वाहन नंबरों को नोट कर लिया गया है और संबंधित वाहन मालिकों को नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू है।
इस मामले में अब तुषार, धनराज और धनिया के नाम खुलकर सामने आ रहे हैं, जिन पर रात के अंधेरे में चल रहे अवैध रेती तस्करी के काले कारोबार के संचालन का आरोप है। कार्रवाई के बाद स्थानीय नागरिकों में रोष है। लोग सवाल कर रहे हैं कि जब रात 11 बजे खुलेआम रेती उत्खनन चल रहा था,तो अब तक प्रशासन की आंखें क्यों बंद थीं? साथ ही मांग उठ रही है कि केवल वाहनों की जब्ती नहीं, बल्कि रेती माफिया के सूत्रधारों,आर्थिक लाभार्थियों और संरक्षण देने वालों पर भी सख्त कार्रवाई की जाए। अब देखना होगा कि यह कार्रवाई सिर्फ औपचारिकता बनकर रह जाती है या फिर राजुरा तालुका में सक्रिय रेती माफियाओं के पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म किया जाएगा।

संवाददाता - अजय एस

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