सिगरेट नहीं पीते, फिर भी खतरे में! पैसिव स्मोकिंग से हर साल 17 लाख मौतें

धूम्रपान से होने वाले नुकसान की बात आते ही आमतौर पर सिगरेट पीने वाले लोगों का ख्याल आता है। लेकिन खतरा सिर्फ धूम्रपान करने वालों तक सीमित नहीं है। अगर आपके आसपास कोई लगातार बीड़ी-सिगरेट पीता है, तो उसके धुएं का असर आपकी सेहत पर भी पड़ सकता है। इसे सेकेंड-हैंड स्मोक या पैसिव स्मोकिंग कहा जाता है।

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The Lancet में प्रकाशित एक अध्ययन ने इस छिपे हुए खतरे की गंभीर तस्वीर सामने रखी है। रिसर्च के मुताबिक, वर्ष 2023 में दुनिया भर में करीब 16.6 लाख लोगों की मौत ऐसे धुएं के संपर्क से जुड़ी थी, जिसे उन्होंने खुद नहीं बल्कि आसपास मौजूद धूम्रपान करने वालों के जरिए सांस में लिया।

घर से लेकर सार्वजनिक जगहों तक जोखिम

पैसिव स्मोकिंग का खतरा कई ऐसी जगहों पर मौजूद हो सकता है, जहां लोग खुद धूम्रपान नहीं करते। घर, कार्यस्थल, सार्वजनिक परिवहन, चाय की दुकान या किसी खुले स्थान पर धूम्रपान करने वाला व्यक्ति आसपास मौजूद लोगों को भी तंबाकू के धुएं के संपर्क में ला सकता है।

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यही वजह है कि गैर-धूम्रपान करने वाले लोग भी लंबे समय तक इसके संपर्क में रहने पर गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम से पूरी तरह सुरक्षित नहीं माने जा सकते। खासतौर पर बच्चों, महिलाओं और पहले से हृदय संबंधी बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए यह चिंता का विषय है।

33 साल के आंकड़ों से सामने आई तस्वीर

इस अध्ययन में वर्ष 1990 से 2023 के बीच दुनिया के 204 देशों और क्षेत्रों से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। रिसर्च का उद्देश्य यह समझना था कि दशकों के दौरान सेकेंड-हैंड स्मोक का लोगों की सेहत पर कितना असर पड़ा है।

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अध्ययन से सामने आया कि आज भी दुनिया में लगभग 2.7 अरब लोग ऐसे हैं, जो किसी न किसी रूप में दूसरे लोगों के तंबाकू के धुएं के संपर्क में आते हैं। यानी खुद धूम्रपान न करने के बावजूद करोड़ों लोग इसके स्वास्थ्य प्रभावों से बच नहीं पा रहे हैं।

पैसिव स्मोकिंग की सबसे बड़ी समस्या यही है कि इसमें व्यक्ति अपनी इच्छा के बिना धुएं का हिस्सा बन जाता है। धूम्रपान करने वाला भले ही अपनी आदत का फैसला खुद करे, लेकिन उसके आसपास मौजूद लोगों के पास उस धुएं से बचने का विकल्प हमेशा नहीं होता।

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