सीजेपी का जंतर-मंतर पर प्रदर्शन समाप्त: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सरकार और छात्रों में बनी सहमति
राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर कई दिनों से चल रहा कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का आंदोलन अब आधिकारिक रूप से खत्म हो गया है। केंद्र सरकार और आंदोलनकारी नेताओं के बीच हुई तीसरे दौर की बातचीत के बाद सीजेपी ने अपने प्रदर्शन को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की घोषणा कर दी है।
सरकार ने मानी मुख्य मांगें, शिक्षा मंत्री ने दिया इस्तीफा
आंदोलन के बीच सबसे बड़ा घटनाक्रम केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा रहा। उन्होंने अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंप दिया है।धर्मेंद्र प्रधान के पद छोड़ते ही सीजेपी अध्यक्ष अभिजीत दीपके ने खुशी जाहिर करते हुए कहा, "छात्रों की एकजुटता की जीत हुई है। लोकतंत्र ने अपना असर दिखाया है।"
तीन दौर की वार्ता में इन शर्तों पर लगी मुहर
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ सीजेपी के मुख्य प्रतिनिधिमंडल जिसमें सौरव दास और आशुतोष रांका शामिल थे की बैठक हुई। वार्ता के बाद पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने आंदोलन की प्रमुख मांगों की जानकारी दी:
1. शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ पहली मांग पूरी हो चुकी है।
2. केस और एफआईआर की वापसी: सरकार ने प्रदर्शनकारियों और आयोजकों पर दर्ज सभी कानूनी मामलों तथा एफआईआर को रद्द करने का आश्वासन दिया है। साथ ही, भविष्य में किसी भी छात्र या आयोजक पर इस सिलसिले में कार्रवाई न करने का भरोसा दिया गया है।
3. मुआवजे की मांग: नीट परीक्षा से जुड़ी दुखद घटनाओं के कारण अपनों को खोने वाले परिवारों के लिए ₹1 करोड़ के मुआवजे का प्रस्ताव भी बातचीत की मेज पर रखा गया है।
सरकार और सीजेपी की साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस
बैठक के बाद दोनों पक्षों ने संयुक्त प्रेस वार्ता की। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने स्पष्ट किया कि सीजेपी द्वारा दिए गए 5 प्रमुख सुझावों पर सरकार गंभीरता से विचार करेगी।इसके तुरंत बाद सीजेपी नेतृत्व ने कार्यकर्ताओं और छात्रों से शांतिपूर्ण तरीके से अपने-अपने घर लौटने की अपील करते हुए आंदोलन समाप्ति का ऐलान कर दिया।
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