दिल्ली में CJP का महाबवाल! जंतर-मंतर पर लाठीचार्ज, संसद में भी हंगामा
आज देश की राजधानी दिल्ली में जो कुछ भी हुआ, उसने सियासत से लेकर सड़क तक का पारा सातवें आसमान पर पहुँचा दिया! एक तरफ आज से संसद के मानसून सत्र का बिगुल बजा, देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतरिक्ष से लेकर सेमीकंडक्टर तक की कामयाबियों को गिनाया...तो वहीं दूसरी तरफ, दिल्ली की सड़कों पर संग्राम छिड़ गया! जी हां नीट पेपर लीक और बढ़ती बेरोजगारी के खिलाफ 'कॉकरोच जनता पार्टी' यानी CJP के 'चलो संसद' मार्च ने पूरी दिल्ली को हिलाकर रख दिया है। जंतर-मंतर पर सुबह से जो बारूद सुलग रहा था, दोपहर होते-होते उसमें ऐसा विस्फोट हुआ कि पुलिस को लाठियां भांजनी पड़ीं। बैरिकेड्स तोड़े गए, पुलिस से झड़प हुई, और देखते ही देखते जंतर-मंतर का नजारा किसी युद्ध मैदान जैसा हो गया। देश की राजधानी छावनी में तब्दील हो चुकी है और सियासत पूरी तरह से सुलग उठी है! आइए आपको बताते हैं आज दिनभर की एक-एक सनसनीखेज रिपोर्ट!
आज सुबह 9 बजे जैसे ही CJP का 'चलो संसद' मार्च शुरू होने की बारी आई, जंतर-मंतर पर पैर रखने की जगह नहीं बची थी। CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने कल ही दावा कर दिया था कि 20 हजार लोग जुट रहे हैं, और आज वाकई वैसा ही नजारा दिखा। छात्र, नौजवान, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थी और उनके माता-पिता देश के कोने-कोने से यहाँ उमड़ पड़े थे। लेकिन ट्विस्ट तब आया जब दिल्ली पुलिस ने साफ कह दिया कि यहां मार्च की कोई परमिशन नहीं है! पुलिस ने सुरक्षा के लिए जंतर-मंतर के चारों तरफ लोहे की मजबूत बैरिकेडिंग कर दी थी। फिर क्या था? गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स पार करने की कोशिश की, दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स के जवानों के साथ जबरदस्त धक्का-मुक्की और झड़प हुई। माहौल इतना उग्र हो गया कि सुरक्षा बलों को भीड़ को काबू करने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा। लाठियां भांजी गईं, भगदड़ मची और जंतर-मंतर पर पूरी तरह हंगामा बरप गया। वहीं इस पूरे हंगामे में घी डालने का काम किया सियासी नेताओं की एंट्री ने। जी हां आम आदमी पार्टी के बड़े नेता आतिशी, मनीष सिसोदिया और संजय सिंह पुलिस के कड़े पहरे और बैरिकेडिंग को कूदकर सीधे प्रदर्शनकारियों के बीच जा पहुँचे। पुलिस ने कई नेताओं को रोकने की पूरी कोशिश की, जिससे वहाँ हाई-वोल्टेज ड्रामा और बढ़ गया। किसान संगठनों ने भी इस आंदोलन को अपना खुला समर्थन दे दिया है और आज किसानों ने दिल्ली कूच का जो ऐलान किया था, उसके बाद दिल्ली की सीमाओं पर भी तनाव बढ़ गया है।
वहीं दूसरी तरफ इस बड़े बवाल को देखते हुए सेंट्रल दिल्ली के कुछ हिस्सों में मोबाइल इंटरनेट को पूरी तरह बंद करना पड़ा, जिसकी पुष्टि खुद दिल्ली पुलिस ने की है। सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने के लिए जंतर-मंतर, पार्लियामेंट स्ट्रीट, सेंट्रल विस्टा, कनॉट प्लेस और शंकर चौक पर त्रि-स्तरीय सुरक्षा ग्रिड तैनात किया गया। इसमें दिल्ली पुलिस की दो परतें और पैरामिलिट्री फोर्स की एक परत शामिल रही। आलम यह है कि सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स की 25 से ज्यादा बटालियनें, जिनमें भारी संख्या में महिला जवान भी हैं, सड़कों पर मुस्तैद रही। कुल 5 हजार से ज्यादा जवान सुबह 4 बजे से ही चप्पे-चप्पे पर तैनात हैं। नई दिल्ली को 15 जोन में बांटकर स्पेशल सीपी और डीसीपी रैंक के बड़े अधिकारी खुद मोर्चा संभाले हुए हैं। आपको बता दें मेट्रो से आने वाली भीड़ को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस की सलाह पर राजीव चौक, जनपथ, पटेल चौक, केंद्रीय सचिवालय और सेवा तीर्थ मेट्रो स्टेशनों के एंट्री-एग्जिट गेट बंद कर दिए गए थे। हालांकि, बाद में राहत देते हुए केंद्रीय सचिवालय और राजीव चौक के गेट तो खोल दिए गए, लेकिन जनपथ, पटेल चौक और सेवा तीर्थ मेट्रो स्टेशन अगले आदेश तक बंद रखे गए हैं। विजय चौक, पीएम आवास और गृहमंत्री आवास जैसी VVIP जगहों पर परिंदा भी पर न मार सके, ऐसे कड़े इंतजाम हैं। सिंघु बॉर्डर पर हरियाणा पुलिस का परमानेंट चेकिंग पॉइंट बना दिया गया है और यह सख्त पहरा 15 अगस्त तक जारी रहेगा। अब आपको ये भी बता देते हैं कि इन प्रदर्शनकारियों की वो कौन सी 3 मांगे हैं जिससे पूरी दिल्ली में बवाल मचा हुआ है। आखिर ये युवा और छात्र इतने गुस्से में क्यों हैं? दरअसल, CJP ने सरकार के सामने तीन बड़ी माँगें रखी हैं।
नीट परीक्षा में हुई धांधली, पेपर लीक और बाकी सरकारी परीक्षाओं की गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो।
इस महा-घोटाले और धांधली की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें।
देश में बढ़ती बेरोजगारी और सरकारी नौकरियों के रिजल्ट में होने वाली बेतहाशा देरी पर सरकार तुरंत ठोस कदम उठाए।
आपको बता दें इस आंदोलन को अरुंधति रॉय, नसीरुद्दीन शाह, रत्ना पाठक शाह और अर्थशास्त्री जयती घोष जैसी जानी-मानी हस्तियों का भी समर्थन मिला है। वहीं, पिछले 23 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे आईसा के तीन छात्र नेताओं नेहा, मनीष और आमीन ने शबाना आजमी, प्रकाश राज, प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव जैसी हस्तियों की अपील पर आज अपना अनशन खत्म कर दिया। दूसरी तरफ पिछले 22 दिनों से अनशन पर चल रहे लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को पुलिस ने जंतर-मंतर से हटाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करा दिया है। डॉक्टरों की टीम उनके गिरते स्वास्थ्य पर नजर रखे हुए है। लेकिन वांगचुक ने अस्पताल के बिस्तर से ही हुंकार भरते हुए अनशन तोड़ने के लिए सरकार के सामने 3 बड़ी शर्तें रख दी हैं।
पहली शर्त: सरकार एजुकेशन सिस्टम की नाकामियों और पेपर लीक की जिम्मेदारी ले।
दूसरी शर्त: विपक्षी और सत्ता पक्ष के सांसद पार्लियामेंट के दरवाजे पर उन्हें और CJP लीडरशिप को भरोसा दें कि यह मुद्दा संसद में उठेगा।
तीसरी शर्त: अगर सरकार इसकी इजाजत नहीं देती, तो तमाम पार्टियों के सांसद अस्पताल आकर उन्हें यह लिखित या पक्का भरोसा दें।
आपको बता दें सड़क के इस गदर के बीच आज से संसद का मानसून सत्र शुरू हो गया है। सत्र की शुरुआत होते ही विपक्षी सांसदों ने पेपर लीक और बेरोजगारी के मुद्दे पर सदन के भीतर ऐसा भारी हंगामा काटा कि लोकसभा की कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा। वहीं सत्र शुरू होने से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मीडिया को संबोधित किया। पीएम ने देश की उपलब्धियों को गिनाते हुए युवाओं की तारीफ की और कहा कि हमारे युवाओं की क्षमता अंतरिक्ष जितनी असीम है। पीएम ने राजस्थान की ऑयल रिफाइनरी, देश के तीसरे सेमीकंडक्टर प्लांट और देश की सबसे लंबी ग्रीन हाइड्रोजन ट्रेन का जिक्र करते हुए विपक्ष को नसीहत दी कि "जहाँ तर्क और तथ्य मजबूत होते हैं, वहाँ शोर-शराबे की कोई जरूरत नहीं होती।"
वहीं किरेन रिजिजू के मुताबिक यह सत्र 13 अगस्त 2026 तक चलेगा, जिसमें 25 दिनों के भीतर 19 बैठकें होंगी। इस सत्र में सरकार कई बड़े और धमाकेदार बिल पास कराने की तैयारी में है। जिसमें...
आयकर संशोधन विधेयक, 2026: टैक्स नियमों में नए बदलावों को लागू करने के लिए।
सर्वोच्च न्यायालय संशोधन विधेयक, 2026: सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने का प्रस्ताव।
राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम संशोधन विधेयक, 2026: इसके जरिए राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को अब मजबूत कानूनी संरक्षण मिलेगा।
जन्म और मृत्यु का पंजीकरण संशोधन विधेयक, 2026: रजिस्ट्रेशन में देरी करने वालों पर भारी जुर्माना और सख्त नियम।
विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025: UGC, AICTE और NCTE को खत्म करके देश में सिर्फ एक बड़ी रेगुलेटर अथॉरिटी बनाई जाएगी।
तो कुल मिलाकर कहानी ये है कि दिल्ली में आज सिर्फ मानसून का सत्र शुरू नहीं हुआ है, बल्कि सियासी बारूद में भी आग लग चुकी है! एक तरफ जहां देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद के द्वार से देश को अंतरिक्ष जितनी असीम क्षमताओं का सपना दिखाया...वहीं दूसरी तरफ, दिल्ली की सड़कों पर उसी युवा देश के भविष्य को लाठियों से हांका जा रहा था। कानून का डंडा ऐसा है कि पूरी नई दिल्ली में धारा 163 लागू कर दी गई है। मेट्रो के दरवाजे बंद हैं, सड़कें सील हैं, और जंतर-मंतर पर छावनी बनी हुई है। लेकिन सबसे बड़ा और सुलगता हुआ सवाल यही है कि क्या भारी-भरकम बैरिकेडिंग, बंद होते मेट्रो स्टेशन और पुलिस की ये लाठियां...देश के युवाओं के इस सैलाब को रोक पाएंगी? नीट के पेपर लीक से जिन छात्रों का भविष्य अधर में लटका है, क्या उनके गुस्से को सिर्फ एक एडवाइजरी जारी करके शांत किया जा सकता है? अस्पताल के बिस्तर पर लेटे सोनम वांगचुक ने जो तीन शर्तें सरकार के सामने रखी हैं, क्या सत्ता पक्ष में इतनी हिम्मत है कि वो संसद के दरवाजे पर जाकर उन्हें भरोसा दे? या फिर विपक्ष इस हंगामे को सिर्फ अपनी सियासी रोटियां सेकने का जरिया बनाएगा? दिल्ली की सियासत बेहद भारी और सस्पेंस से भरी रहने वाली है।
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