"मिट्टी में मिले माफियाओं जैसा था सालार मसूद", महाराजा सुहेलदेव पर सीएम योगी का बड़ा बयान!

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज लखनऊ की धरती से इतिहास और वर्तमान के माफियाओं पर एक साथ प्रहार किया है। भारतेंदु नाट्य अकादमी के स्वर्ण जयंती समारोह में सीएम योगी ने एक ऐसी हुंकार भरी, जिसने सियासत के गलियारों में हलचल मचा दी है। उन्होंने विदेशी आक्रांता सालार मसूद को 'माफिया' करार देते हुए बताया कि कैसे महाराजा सुहेलदेव ने उसे वो मौत दी, जिसे इस्लाम में सबसे खराब माना जाता है। आखिर क्यों योगी ने माफियाओं को 'मिट्टी में मिलाने' के अभियान को एक हजार साल पुराने इतिहास से जोड़ा? 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महाराजा सुहेलदेव के शौर्य को नमन करते हुए एक बेहद तीखा बयान दिया। उन्होंने कहा कि एक हजार साल पहले महाराजा सुहेलदेव ने विदेशी आक्रांता सालार मसूद को न सिर्फ धूल चटाई थी, बल्कि उसे ऐसी मौत दी जिसे 'जहन्नुम की गारंटी' माना जाता है।

सीएम योगी ने कड़े शब्दों में कहा: "सालार मसूद किसी माफिया से कम नहीं था। आज जो माफिया मिट्टी में मिले हैं, उन्हीं का एक पुराना रूप सालार मसूद था। उसने सोमनाथ मंदिर तोड़ा और अयोध्या की रामजन्मभूमि को पहली बार क्षति पहुंचाई। महाराजा सुहेलदेव ने उसे लोहे के तवे में बांधकर आग में जलाया था। जब तक अत्याचारी के साथ ऐसा व्यवहार नहीं करेंगे, वह संस्कृति से खिलवाड़ करता रहेगा।"

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने भारतेंदु नाट्य अकादमी (BNA) के संपूर्ण भवन और दो प्रेक्षागृहों के जीर्णोद्धार कार्य का लोकार्पण किया। लगभग 22 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस प्रोजेक्ट के जरिए अकादमी को आधुनिक रूप दिया गया है। योगी ने यहाँ ‘रंगभेद’ पत्रिका का विमोचन किया और स्वर्ण जयंती नाट्य समारोह का विधिवत शुभारंभ किया। योगी आदित्यनाथ ने पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि वोट बैंक की राजनीति के कारण हमारे असली नायकों को भुला दिया गया और गलत चरित्रों को समाज के सामने पेश किया गया।

उन्होंने महाराजा बिजली पासी, वीरांगना अवंतीबाई, उदा देवी और झलकारी बाई जैसे नायकों के गौरव को बहाल करने की बात कही। उन्होंने कलाकारों से आह्वान किया कि वे ऐसे महापुरुषों पर आधारित नाटक तैयार करें, ताकि नई पीढ़ी उन्हें अपना आदर्श बना सके। उन्होंने स्पष्ट कहा-"समाज को अब तय करना होगा कि नायक कौन है और खलनायक कौन। हमें खलनायकों का महिमामंडन बंद करना होगा।"

मुख्यमंत्री ने 1921 के अकाल और 'स्पेनिश फ्लू' का जिक्र करते हुए तत्कालीन अंग्रेज सरकार को संवेदनहीन बताया। इसके विपरीत, उन्होंने कोविड-19 काल का उदाहरण देते हुए कहा कि उनकी सरकार ने प्रवासी श्रमिकों के लिए भोजन और सुरक्षा की व्यवस्था कर यह साबित किया कि संवेदनशील सरकार ही संकट के समय जनता की असली रक्षक होती है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आज का भाषण सिर्फ एक उद्घाटन भाषण नहीं था, बल्कि यह उन लोगों को सीधा जवाब था जो माफियाओं के 'महिमामंडन' की राजनीति करते हैं। उन्होंने साफ कर दिया है कि यूपी में 'मिट्टी में मिलाने' की परंपरा आज की नहीं, बल्कि महाराजा सुहेलदेव के दौर से चली आ रही है। अब देखना यह है कि सांस्कृतिक संस्थानों के जरिए इतिहास की ये नई व्याख्या आने वाले समय में क्या रंग लाती है।

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