'2017 से पहले चेहरा देखकर मिलती थी बिजली, उद्योगपति लखनऊ आने से करते थे इंकार' -CM योगी
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य की पूर्ववर्ती सरकारों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि 2017 से पहले प्रदेश में बिजली का वितरण चेहरा देखकर किया जाता था। इसके अलावा, उन्होंने दावा किया कि उस दौर में कानून-व्यवस्था और खराब छवि के कारण देश के बड़े उद्योगपति लखनऊ में आयोजित होने वाले इन्वेस्टर्स समिट में आने तक को तैयार नहीं थे, जिसके चलते राज्य सरकार को अपना कार्यक्रम दिल्ली में आयोजित करने के लिए मजबूर होना पड़ा था। मुख्यमंत्री शनिवार को राजधानी लखनऊ में आयोजित 'टेक संगम अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन' (Tech Sangam International Conference) के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे।
बिजली व्यवस्था, सुरक्षा और रोजगार में 2017 के बाद आया बड़ा बदलाव
सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 2017 के बाद से उत्तर प्रदेश में बिजली आपूर्ति, सुरक्षा के माहौल और रोजगार के अवसरों में ऐतिहासिक बदलाव आया है। उन्होंने कहा, "2017 से पहले तो बिजली भी चेहरा देखकर दी जाती थी। सभी को समान रूप से बिजली नहीं मिलती थी। आज वह स्थिति समाप्त हो चुकी है। अब प्रदेश में हर किसी को बिना किसी भेदभाव के समान रूप से बिजली मिल रही है। राज्य में सुरक्षा की पक्की गारंटी है और हम उसी प्रतिबद्धता के साथ नौजवानों को रोजगार भी उपलब्ध करा रहे हैं।"
"जब उद्योगपतियों ने लखनऊ आने से किया इंकार, तो दिल्ली में करना पड़ा समिट"
उत्तर प्रदेश में निवेश के माहौल पर बात करते हुए सीएम योगी ने 2015-16 के दौरान आयोजित इन्वेस्टर्स समिट का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले अगर कोई लखनऊ में अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन की बात करता, तो अमेरिका, ब्रिटेन या यूरोप के विशेषज्ञ तो दूर, भारत के विभिन्न हिस्सों से भी कोई विशेषज्ञ यहाँ आने को तैयार नहीं होता। उन्होंने खुलासा किया कि 2015-16 में तत्कालीन यूपी सरकार ने राज्य में इन्वेस्टर्स समिट आयोजित करने का प्रयास किया था, लेकिन जब देश भर के उद्योगपतियों ने लखनऊ आने से साफ इंकार कर दिया, तो उस कार्यक्रम को विवश होकर दिल्ली में आयोजित करना पड़ा था।
अयोध्या के कायाकल्प और दीपोत्सव की सफलता का किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने 2017 के बाद अयोध्या में हुए व्यापक बदलावों को भी विस्तार से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले अयोध्या को दिन में केवल तीन घंटे बिजली मिलती थी और बुनियादी सुविधाओं का भारी अभाव था। उन्होंने कहा, "2017 में हमने दिवाली के अवसर पर अयोध्या में 'दीपोत्सव' की शुरुआत की। जब मैंने पहली बार दीपोत्सव की योजना बनाई, तो लोगों ने पूछा कि क्या यह संभव हो पाएगा? आज स्थिति यह है कि लाखों लोग व्यक्तिगत रूप से दीपोत्सव में शामिल होते हैं और पूरी दुनिया इसे देखती है। इसने अयोध्या को एक नई वैश्विक पहचान दी है।"
संकरी गलियों से 6-लेन सड़कों और अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट तक का सफर
अयोध्या के बुनियादी ढांचे में हुए सुधारों पर बात करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जो अयोध्या कभी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसती थी और जहाँ बेहद संकरी गलियाँ थीं, आज वहाँ की सड़कें 4-लेन और 6-लेन की बन चुकी हैं। प्रदेश सरकार ने वहाँ महर्षि वाल्मीकि अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे का निर्माण कराया है, जिसने अयोध्या को देश और दुनिया के कोने-कोने से जोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि विकास का जो अंतर हजारों सालों से चला आ रहा था, उसने न केवल अयोध्या को पीछे धकेला था, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश को भी विकास की दौड़ में पीछे बनाए रखा था, जिसे अब बदला जा चुका है।

No Previous Comments found.