कांग्रेस में होगा बड़ा जनरेशन चेंज! राहुल गांधी की नई टीम में युवाओं की एंट्री?

पुराने चेहरे पीछे होंगे...तो क्या कांग्रेस में अब नए चेहरे आगे आएंगे? और दो दशक से जिस ‘जनरेशन चेंज’ की बात राहुल गांधी करते रहे हैं, क्या अब वो जमीन पर उतरने वाला है? जी हां कांग्रेस में इन दिनों संगठन को लेकर बड़े बदलाव की तैयारी चल रही है। दावा है कि पार्टी अब अपने संगठन को बुजुर्ग नेताओं और कथित ‘ड्राइंग रूम पॉलिटिक्स’ से निकालकर युवा, आक्रामक और जमीन पर लड़ने वाली टीम में बदलने की कवायद कर रही है। और इस पूरी कवायद की कमान सीधे राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और केसी वेणुगोपाल के हाथों में दिखाई दे रही है। वहीं सबसे बड़ा बदलाव राष्ट्रीय सचिवों की नियुक्ति को लेकर है। करीब 120 नेताओं के इंटरव्यू की प्रक्रिया शुरू की गई है। खास बात ये है कि यहां सिर्फ सीनियरिटी या सिफारिश नहीं चलेगी...बल्कि देखा जाएगा कि नेता ने जमीन पर कितना काम किया, संगठन के लिए कितना समय दिया और जनता के बीच उसकी पकड़ कितनी है। आइए पूरी कहानी समझते हैं...

दरअसल, राजधानी दिल्ली में देशभर से छांटे गए चुनिंदा युवा और जमीनी नेताओं का जमावड़ा लगा हुआ है। राष्ट्रीय सचिव बनने का सपना लेकर आए इन नेताओं को किसी गॉडफादर की सिफारिश नहीं, बल्कि अपनी जमीनी मेहनत का हिसाब देना पड़ रहा है। आपको बता दें राष्ट्रीय सचिव जैसे अहम पदों के लिए करीब 120 नेताओं को शॉर्टलिस्ट किया जा रहा है। इन नेताओं का इंटरव्यू लिया जा रहा है और इस पूरी प्रक्रिया में राहुल गांधी खुद शामिल हैं। यानी कांग्रेस में नई टीम बनाने की जिम्मेदारी अब सीधे टॉप लीडरशिप के स्तर पर दिखाई दे रही है। वहीं इस पूरी प्रक्रिया की सबसे खास बात है...चयन का तरीका। जी हां राहुल गांधी नेताओं से उनके पुराने कामकाज के बारे में सवाल कर रहे हैं। 
सिर्फ ये नहीं पूछा जा रहा कि आप कितने साल से कांग्रेस में हैं...बल्कि ये देखा जा रहा है कि आपने संगठन के लिए किया क्या? आपकी जमीनी सक्रियता कितनी है? लोगों के बीच आपकी पकड़ कैसी है? और आने वाले समय में आप संगठन को किस दिशा में ले जा सकते हैं? दरअसल, खबरें हैं कि कांग्रेस अपने मौजूदा 60% से अधिक राष्ट्रीय सचिवों को हटाने जा रही है। उनकी जगह उन युवाओं को तवज्जो दी जा रही है जिन्होंने 'संगठन सृजन' अभियान के तहत बतौर ऑब्जर्वर जमीन पर पसीना बहाया है। शुरुआती दौर में 30 से अधिक नेताओं के इंटरव्यू पूरे हो चुके हैं। राहुल गांधी के दो दिवसीय रायबरेली दौरे से लौटते ही बाकी बचे नेताओं के इंटरव्यू का दूसरा दौर तेजी से शुरू हो जाएगा।

आपको बता दें साल 2004 में राजनीति में कदम रखने के साथ ही राहुल गांधी ने यूथ कांग्रेस और NSUI में आंतरिक चुनाव व इंटरव्यू के जरिए बिना किसी राजनीतिक बैकग्राउंड वाले आम प्रतिभावान युवाओं को आगे लाने का प्रयोग किया था। हालांकि, उस वक्त पार्टी के पुराने दिग्गजों के कड़े विरोध और अंदरूनी खींचतान के कारण यह प्रयोग पूरी तरह सफल नहीं हो सका। लेकिन 22 साल के लंबे इंतजार के बाद अब परिस्थिति बदल चुकी है। अब ब्लॉक, जिला और प्रदेश स्तर से लेकर शीर्ष राष्ट्रीय संगठन तक युवाओं को सीधी जिम्मेदारी दी जा रही है। राहुल गांधी का यह प्रयोग महज एक संगठनात्मक फेरबदल नहीं, बल्कि 2029 के आम चुनावों के लिए एक पेशेवर और जुझारू टीम तैयार करने की रणनीति है। कांग्रेस एक ऐसी लीडरशिप खड़ी कर रही है जो:  

सोशल मीडिया पर विपक्षी हमलों का तीखा और तार्किक जवाब दे सके।

केवल प्रवक्ताओं की तरह बयानबाजी न करे, बल्कि सड़क पर उतरकर जन-आंदोलन खड़ा करे।

बूथ स्तर तक जाकर आम कार्यकर्ता से सीधा संवाद बना सके।

जाहिर है सिफारिशी संस्कृति को पूरी तरह नकार कर मेरिट और रिपोर्ट कार्ड के दम पर फैसले लेने का राहुल गांधी का यह कदम यकीनन भारतीय राजनीति के लिए एक बड़ा नजीर है। इससे उन लाखों आम कार्यकर्ताओं में उम्मीद की नई किरण जगी है जो बिना किसी सियासी रसूख के सालों से जमीनी स्तर पर झंडा उठाए घूम रहे हैं। हालांकि, सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि क्या राहुल गांधी का यह 'जनरेशन चेंज' कांग्रेस में नई जान फूंक पाएगा, या फिर पुराने क्षत्रपों का असंतोष और गुटबाजी एक बार फिर इस क्रांतिकारी प्रयोग के आड़े आ जाएगी। फिलहाल वक्त ही बताएगा कि दिल्ली के इंटरव्यू रूम से निकल रही यह नई टीम सड़क से लेकर संसद तक कितना बड़ा सियासी करिश्मा दिखा पाती है!

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