क्या भारत में कभी ख़तम होगा भ्रष्टाचार ?

भ्रष्टाचार केवल भारत की ही समस्या नहीं है, बल्कि यह एक वैश्विक चुनौती है। लेकिन भारत जैसे विशाल लोकतांत्रिक और विकासशील देश में इसका असर कहीं अधिक गहरा और व्यापक है। आज़ादी के 75 से अधिक वर्षों बाद भी देश के हर क्षेत्र—राजनीति, नौकरशाही, शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार—में भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हो चुकी हैं। सवाल यह है कि क्या भारत से कभी भ्रष्टाचार पूरी तरह खत्म हो पाएगा? इस प्रश्न का उत्तर आसान नहीं है, परंतु संभावनाओं, प्रयासों और चुनौतियों पर विचार करना आवश्यक है।
भ्रष्टाचार का सीधा अर्थ है—"निजी लाभ के लिए पद या शक्ति का दुरुपयोग"। यह रिश्वतखोरी, भाई-भतीजावाद, सत्ता का दुरुपयोग, काला धन, कर चोरी, नीतिगत हेरफेर, और प्रशासनिक लापरवाही जैसे रूपों में प्रकट होता है। भारत में यह केवल आर्थिक समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक व नैतिक समस्या भी है।
भारत में भ्रष्टाचार के कारण
1- राजनीतिक कारण: चुनाव में अपार धनबल का प्रयोग, वोट खरीदना और सत्ता में बने रहने की लालसा।
2- प्रशासनिक कारण: जवाबदेही का अभाव, पदों का दुरुपयोग, जटिल प्रक्रियाएँ।
3- सामाजिक कारण: लोग भ्रष्टाचार को “सिस्टम का हिस्सा” मानने लगते हैं।
4- आर्थिक कारण: गरीबी, बेरोजगारी और असमानता भ्रष्टाचार को बढ़ावा देती है।
5- नैतिक कारण: मूल्यों में गिरावट और व्यक्तिगत लाभ को सर्वोपरि मानना।
भ्रष्टाचार भारत की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है, जो राजनीति, प्रशासन और समाज सभी को प्रभावित करता है। इसके मुख्य कारण हैं—धन और सत्ता की लालसा, प्रशासनिक जटिलताएँ, नैतिक मूल्यों की कमी और सामाजिक उदासीनता। सरकार ने कानूनी व संस्थागत स्तर पर कई प्रयास किए हैं, साथ ही तकनीकी उपाय भी अपनाए गए हैं। पूरी तरह समाप्त करना कठिन है, लेकिन राजनीतिक सुधार, शिक्षा, पारदर्शिता और जनभागीदारी से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। भविष्य में यदि जनता और सरकार मिलकर ठोस कदम उठाएँ तो भ्रष्टाचार पर काबू पाया जा सकता है।
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