हाथी का दांत बना सोने से महंगा, एक बिक्री में अमीर हो जाता है शिकारी
हाथी के दांत, जिन्हें सही मायनों में टस्क कहा जाता है, प्राचीन समय से ही इंसानों के लिए बेहद कीमती माने जाते रहे हैं। ये सामान्य दांत नहीं होते, बल्कि लगातार बढ़ने वाले लंबे और मजबूत दांत होते हैं, जिनका इस्तेमाल हाथी खुद को बचाने, जमीन खोदने और भोजन तलाशने में करता है। साथ ही, बड़े टस्क हाथियों के झुंड में उनकी ताकत और सामाजिक हैसियत को भी दर्शाते हैं।

लेकिन समय के साथ यही टस्क हाथियों के लिए वरदान नहीं, बल्कि अभिशाप बन गए हैं। आज ब्लैक मार्केट में इनकी कीमत इतनी ज्यादा है कि शिकारी सिर्फ एक टस्क बेचकर मालामाल हो जाते हैं, जबकि हाथी तेजी से विलुप्ति की ओर बढ़ रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है आखिर हाथी का Ivory होता क्या है?
दांत और Ivory में फर्क समझिए
Ivory असल में हाथी के टस्क से मिलने वाली एक खास सामग्री होती है, जो डेंटिन से बनी होती है। इसमें कोलेजन, पानी और हाइड्रॉक्सीऐपेटाइट जैसे मिनरल्स पाए जाते हैं। अफ्रीकी हाथियों में नर और मादा दोनों के टस्क बड़े होते हैं, जबकि एशियाई हाथियों में आमतौर पर सिर्फ नर के पास ही टस्क होते हैं। इनका इस्तेमाल हाथी लड़ाई, खुदाई और भोजन जुटाने में करते हैं। जिन हाथियों के टस्क लंबे होते हैं, उन्हें झुंड में ज्यादा सम्मान मिलता है।

इंसानों ने हालांकि Ivory का इस्तेमाल गहनों, मूर्तियों, दवाइयों और लग्जरी वस्तुएं बनाने में किया। इसी लालच के चलते 1989 में CITES ने हाथी के Ivory के अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया, लेकिन इसके बावजूद ब्लैक मार्केट में इसका कारोबार आज भी जारी है।
ब्लैक मार्केट में Ivory की कीमत
2025–2026 के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, ब्लैक मार्केट में कच्चे Ivory की कीमत इलाके के अनुसार अलग-अलग है। अफ्रीका में यह औसतन 75 से 400 डॉलर प्रति किलो (करीब 6,000 से 33,000 रुपये) तक बिकता है, जबकि एशिया जैसे वियतनाम, थाईलैंड और चीन में इसकी कीमत 1,000 से 3,000 डॉलर प्रति किलो (लगभग 83,000 से 2.5 लाख रुपये) तक पहुंच जाती है।

भारत में हाल के जब्ती मामलों के आधार पर Ivory की कीमत 15 से 25 लाख रुपये प्रति किलो आंकी गई है। एक स्वस्थ अफ्रीकी नर हाथी का एक टस्क लगभग 23 से 45 किलो तक वजनी होता है, जबकि मादा का टस्क करीब 18 से 20 किलो होता है। यानी सिर्फ एक टस्क से शिकारी को 20 लाख से लेकर 1 करोड़ रुपये तक मिल सकते हैं, और कुछ मामलों में यह रकम 1.5 करोड़ रुपये तक भी पहुंच चुकी है।Ivory की यह खतरनाक कीमत उसकी कमी, बढ़ती मांग और अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क पर निर्भर करती है और यही वजह है कि हाथी आज सबसे ज्यादा शिकार किए जाने वाले वन्यजीवों में शामिल हैं।


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