मगरमच्छ पालन: बेहद खतरनाक व्यवसाय, पल भर में हो सकता है जान का जोखिम

कभी आपने सोचा है कि खेती सिर्फ अनाज, सब्ज़ियों या फलों तक सीमित नहीं रहती? सोशल मीडिया पर एक वीडियो ने लोगों को चौंका दिया, जिसमें एक शख्स अपने मगरमच्छों के फार्म की झलक दिखा रहा था। वीडियो में बड़े-बड़े मगरमच्छ पानी में तैरते दिखाई दे रहे थे।

मगरमच्छों की दुनिया में आपका स्वागत है: ऑस्ट्रेलिया के 'जॉज़ ऑफ़ द नॉर्थ'  मगरमच्छों की उल्लेखनीय वापसी | मगरमच्छ | द गार्जियन

भारत में पारंपरिक खेती आम है, लेकिन अब दुनिया में क्रोकोडाइल फार्मिंग का चलन तेजी से बढ़ रहा है। यह व्यवसाय न केवल अनोखा है बल्कि बेहद जोखिम भरा भी है। एक पल की लापरवाही में जान को खतरा हो सकता है, फिर भी कई लोग इसमें भारी मुनाफा कमा रहे हैं।

खर्चीली किंतु मुनाफे की है मगरमच्छ की खेती

खाल से होती है कमाई

क्रोकोडाइल फार्मिंग का मुख्य उद्देश्य मगरमच्छ की खाल का व्यावसायिक उपयोग है। विश्वभर के लग्जरी ब्रांड जैसे Hermes और Louis Vuitton मगरमच्छ की खाल से महंगे हैंडबैग, बेल्ट, जूते और वॉलेट बनाते हैं। उच्च गुणवत्ता वाली सॉल्टवाटर या मीठे पानी की मगरमच्छ की खाल विदेशों में सैकड़ों से हजारों डॉलर में बिकती है।

मगरमच्छों की दुनिया में आपका स्वागत है: ऑस्ट्रेलिया के 'जॉज़ ऑफ़ द नॉर्थ'  मगरमच्छों की उल्लेखनीय वापसी | मगरमच्छ | द गार्जियन

भारत में बड़े पैमाने पर कमर्शियल क्रोकोडाइल फार्मिंग अभी सीमित है, लेकिन कुछ किसान और उद्यमी इस क्षेत्र में कदम रख रहे हैं। मांस भी बिकता है, जो कम कोलेस्ट्रॉल और प्रोटीन में उच्च माना जाता है।

किसानों को मिलता है भारी मुनाफा

एक अच्छी मगरमच्छ की खाल $400 से $1500 या उससे अधिक में बिक सकती है। बड़े फार्म में सैकड़ों मगरमच्छ पाले जाते हैं और 3-4 साल में वे मार्केटेबल साइज तक पहुँच जाते हैं। शुरुआती निवेश काफी होता है पूँजी पूल बनाने, सुरक्षा, फीड और लाइसेंसिंग पर खर्च होती है। लेकिन एक बार फार्म चलने लगे तो रिटर्न बहुत आकर्षक होता है।

ऑस्ट्रेलिया में महंगाई और अपराध के अलावा मगरमच्छ भी चुनावी मुद्दा क्यों बना  - BBC News हिंदी

दुनिया के कई देशों में जैसे ऑस्ट्रेलिया, थाईलैंड, अफ्रीका और चीन क्रोकोडाइल इंडस्ट्री अरबों डॉलर की है। किसान सालाना सैकड़ों मगरमच्छों की खाल निर्यात कर करोड़ों कमा रहे हैं।

जोखिम और सुरक्षा

इसमें खतरा कम नहीं है। मगरमच्छ बेहद आक्रामक और तेज़ होते हैं। फीडिंग, अंडे इकट्ठा करने या पूल की सफाई के समय हमला हो सकता है। कई फार्म वर्कर्स गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं। इसलिए सुरक्षा के लिए ऊँचे फेंस, ट्रेनिंग और विशेष उपकरण आवश्यक हैं।

भारत में मुख्य रूप से मीठे पानी का मुग्गर क्रोकोडाइल (Crocodylus palustris) पाला जाता है। कुछ जगहों पर सॉल्टवाटर क्रोकोडाइल का ट्रायल भी हो रहा है। प्रमुख केंद्रों में अमरावती क्रोकोडाइल फार्म (तमिलनाडु), मद्रास क्रोकोडाइल बैंक और अन्य सरकारी केंद्र शामिल हैं, जो संरक्षण और प्रजनन पर काम करते हैं। यहाँ जंगली अंडे इकट्ठा किए जाते हैं .

Leave a Reply



comments

Loading.....
  • No Previous Comments found.