गर्म मौसम में सिंचाई और कीट प्रबंधन: किसानों के लिए जरूरी सलाह
जैसे-जैसे तापमान बढ़ रहा है और हवा में बदलाव आ रहा है, कृषि विशेषज्ञ किसानों को फसल प्रबंधन, नई बुवाई और कीट नियंत्रण में सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं। समय पर सिंचाई करना, प्रमाणित बीजों का चयन और कीटों की नियमित निगरानी इस मौसम में अच्छी पैदावार के लिए जरूरी है।
सिंचाई प्रबंधन
विशेषज्ञों ने कहा है कि खड़ी फसलों और सब्जियों में हल्की सिंचाई आवश्यकतानुसार करें। ठंडी या कम हवा वाले समय में सिंचाई करना बेहतर रहेगा क्योंकि इससे पानी की बर्बादी कम होगी और मिट्टी में नमी बनी रहेगी।
मूंग और उड़द की बुवाई
मार्च के पहले सप्ताह में हरी मूंग (पूसा विशाल, पूसा वैशाखी, पीडीएम-11, एसएमएल-32) और काली मूंग (पंत उड़द-19, 30, 35 और पीडीयू-1) बोने की सलाह दी गई है। बीज बोने से पहले राइजोबियम कल्चर और फास्फोरस-घुलनशील जीवाणुओं से उपचार करना फसल की पैदावार बढ़ाने में मदद करेगा।
भिंडी और अन्य सब्जियों की बुवाई
भिंडी की ए-4, परभनी क्रांति और अर्का अनामिका किस्मों की बुवाई के लिए यह मौसम अनुकूल है। प्रति एकड़ 10–15 किलो बीज डालें और मिट्टी में पर्याप्त नमी रखें। इसके अलावा फ्रेंच बीन, क्लस्टर बीन और समर रेडिश भी बोई जा सकती हैं। टमाटर, मिर्च और पत्तागोभी के छोटे पौधों की रोपाई का समय भी सही है।
गेहूं में जंग रोग पर ध्यान
गेहूं की फसल में काला, भूरा और पीला जंग रोग पर नजर रखें। लक्षण दिखाई देने पर प्रोपिकोनाज़ोल 25 EC की 1 मिलीलीटर मात्रा प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। समय पर नियंत्रण न करने पर उपज कम हो सकती है।
सरसों और सब्जियों में एफिड नियंत्रण
सरसों और अन्य सब्जियों में एफिड कीट पर नजर रखें। यदि प्रकोप बढ़े तो इमिडाक्लोप्रिड 0.25–0.5 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। छिड़काव और कटाई के बीच कम से कम एक सप्ताह का अंतर रखें।
प्याज, टमाटर और बैंगन में कीट प्रबंधन
प्याज में थ्रिप्स और बैंगनी धब्बा रोग पर नजर रखें।
टमाटर में फल छेदक कीट के लिए प्रति एकड़ 4–5 फेरोमोन ट्रैप लगाएँ और खराब फलों को नष्ट करें।
बैंगन में तना और फल छेदक कीट दिखे तो संक्रमित हिस्से हटा दें। प्रकोप ज्यादा होने पर स्पाइनोसाद का छिड़काव करें।
गेंदे में पुष्पवृंत सड़न रोग
गेंदे की फसल में सड़न रोग दिखने पर कार्बेन्डाज़िम 1 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करें।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित निगरानी और समय पर फसल प्रबंधन अपनाने से बदलते मौसम में भी पैदावार सुरक्षित रखी जा सकती है।

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