सफलता की कहानी* असामाजिक जिंदगी से मिली मुक्ति पुनर्वास से मिली नई रोशनी
दंतेवाड़ा - छत्तीसगढ़ शासन की नक्सली पुनर्वास नीति की अभिनव पहल आत्मसमर्पित युवाओं का भविष्य संवारने में अग्रणी भूमिका निभा रहा हैं। इस महती पहल का मुख्य उद्देश्य केवल मुख्यधारा से भटके युवाओं को आत्मसमर्पण कराना नही रहा। बल्कि उनके नये जीवन के शुरुआत हेतु नये अवसरो के द्वार भी खुलवाना है ताकि वे आत्मनिर्भर बन सशक्त भविष्य की ओर अग्रसर हो सकें। इस संबंध में जिला मुख्यालय दन्तेवाड़ा के लाईवलीहुड कॉलेज में आत्मसमर्पित युवक युवतियों हेतु जिला प्रशासन द्वारा स्वरोजगार के नये ट्रेंड एवं प्रशिक्षण सत्र प्रारंभ किए गए है इस क्रम में पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पित 27 वर्षीय युवा विनोद कुरसम, भी इलेक्ट्रीशियन का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे है। उन्होंने इस संबंध में बताया कि वे पांचवी तक ही पढ़ाई कर सके है क्योंकि गावं के स्कूल को नक्सलियों द्वारा वर्षो पूर्व बम से उड़ा दिया गया था। विनोद कुरसम ने बताया कि वह मूल रूप से जिला बीजापुर ब्लॉक भोपालपटनम के दूरस्थ बीहड़ गांव कोकेरा का रहने वाला है। भोपालपटनम से लगभग 60 किलोमीटर दूर ग्राम कोकेरा विकास से पूर्णतः अछूता ग्राम था। जहां न तो बिजली थी न ही सड़क, न स्कूल, ना ही अन्य बुनियादी सुविधा थी। यहा की जनसंख्या बमुश्किल 100 के लगभग और परिवार 30-40 के आस पास थे। लोगों को अपनी जरूरी सामग्री हेतु 50 किलोमीटर दूर बरदेली ग्राम जाना पड़ता था। जो राष्ट्रीय राज मार्ग पर स्थित है। जाहिर था वर्तमान से 15-16 साल पहले नक्सली गतिविधियों ने यहां डेरा जमा लिया था। निरक्षर ग्रामीणों को जबरदस्ती अपनी विचारधारा मानने के लिए विवश किया जाता रहा। कम उम्र के बच्चों के लिए माओवादियों द्वारा बाल संगठन बनाया गया था। इस बाल संगठन से विनोद कुरसम 2008-9 से जुड़ गया था। बड़े होने पर उसे नक्सली संगठन ’’चैरपल्ली आरपीसी जनताना सरकार’’ का कमान्डर बनाया गया था। इस प्रकार उसका मानना है कि 15-16 वर्ष तक असामाजिक गतिविधियों से जुड़कर अपने जीवन के 15-16 वर्ष एक प्रकार से व्यर्थ कर दिया। लेकिन कहते है ना जब जागों तब सवेरा राज्य शासन की विकास योजनाओं एवं पुनर्वास नीतियों की बदौलत उनका यायावरी जिंदगी से मोह भंग हो गया और 15 जनवरी 2026 का वह दिन भी आया जब उसने सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर अपने 30 साथियों के साथ जिला बीजापुर में आत्मसमर्पण कर दिया अब वह अपने जीवन को नया मोड़ देने के लिए दृढ़ संकल्पित है।
विनोद कुरसम मुस्कुराते हुए बताता है कि उसके परिवार में मां पिताजी के अलावा पत्नी और उसके क्रमशः 8, 10, 11 साल के तीन लड़के ( बबलू, श्रीकांत, निलेष ) भी है। और उसका बड़ा पुत्र ग्राम बरदेली के बालक आश्रम में कक्षा 7वीं में अध्ययनरत है। अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा और एक अच्छा नागरिक बनाने के अपने संकल्प दोहराते हुए वह कहता है कि यहां प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद वह अपने गांव के समीप इलेक्ट्रिशियन का व्यवसाय करना चाहेगा। उसने यह भी बताया कि अब उसके गांव में रोड कनेक्टिविटी सहित अन्य विकास कार्य तेजी से किए जा रहे है। कुल मिलाकर भय और आतंक से जुड़े इन युवाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना शासन की नीतियों की असाधारण सफलता है। यह प्रयास उन्हें घर परिवार और समाज से जोड़कर आदर्श नागरिक बनायेगा।
रिपोर्टर - ए आर कर्मा


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