1857 के नायक को भूला प्रशासन: बस स्टैंड में उपेक्षा झेल रही शहीद वीर
दंतेवाड़ा : नारायण सिंह की वीर नारायण सिंह कौन थे आदिवासियों के लिए लड़ी लंबी लड़ाई, 1857 की क्रांति, सोनाखान विद्रोह। वर्तमान हालत मूर्ति टूटी, गंदगी, शराबियों का अड्डा, अंधेरा, माल्यार्पण तक नहीं।
जिम्मेदार कौन PWD कहता है नगरपालिका का काम, नगरपालिका कहती है PWD का। नाम सहित बयान।
जनता का दर्द आदिवासी समाज, बुजुर्ग, युवा का कोट — "ये अपमान बर्दाश्त नहीं"।
मांग चेतावनी 7 दिन में सफाई-सौंदर्यीकरण नहीं तो आंदोलन, चक्काजाम।
शहीद वीर नारायण सिंह की मूर्ति का अपमान: बड़े बचेली बस स्टैंड में दुर्दशा, PWD और नगरपालिका की खींचतान से आदिवासी समाज जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए अंग्रेजों से लोहा लेने वाले 1857 के महानायक शहीद वीर नारायण सिंह की मूर्ति बड़े बचेली बस स्टैंड में घोर उपेक्षा का शिकार हो रही है। रखरखाव के अभाव में मूर्ति का चबूतरा टूट चुका है, आसपास कचरे का अंबार और शराब की बोतलें बिखरी हैं। लोक निर्माण विभाग और नगरपालिका की आपसी खींचतान के चलते शहीद का अपमान हो रहा है, जिससे आदिवासी समाज में भारी आक्रोश है।
कौन थे वीर नारायण सिंह?
सोनाखान के जमींदार वीर नारायण सिंह ने 1856 के अकाल में भूख से तड़पते आदिवासियों के लिए अंग्रेजों का अनाज गोदाम लूटकर अनाज बांटा था। 1857 की क्रांति में अंग्रेजों के खिलाफ लंबी लड़ाई लड़ते हुए 10 दिसंबर 1857 को रायपुर में उन्हें फांसी दे दी गई। छत्तीसगढ़ के आदिवासी उन्हें भगवान की तरह पूजते हैं।
बस स्टैंड में ये हालत*
स्थानीय लोगों के अनुसार करीब 15 साल पहले सर्व आदिवासी समाज ने चंदा कर बस स्टैंड में मूर्ति स्थापित की थी। तब से न तो PWD ने और न ही नगरपालिका ने इसकी सुध ली। वर्तमान में:
मूर्ति का रंग-रोगन उखड़ चुका है।
चबूतरा जगह-जगह से टूटा है।
रात में लाइट नहीं होने से असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगता है।
शहीद दिवस पर भी माल्यार्पण की व्यवस्था नहीं होती।
"ये शहीदों के बलिदान का अपमान है"*
*सर्व आदिवासी "वीर नारायण सिंह ने हमारे हक के लिए फांसी का फंदा चूम लिया। आज उनकी मूर्ति कचरे में पड़ी है। PWD से पूछो तो कहते हैं नगरपालिका देखेगी, नगरपालिका से पूछो तो PWD पर डाल देते हैं। क्या शहीद का सम्मान ऐसे होगा?"
*युवाओं की चेतावनी अगर मूर्ति परिसर की सफाई, लाइटिंग और रंग-रोगन नहीं हुआ तो हम हजारों युवाओं के साथ बस स्टैंड पर अनिश्चितकालीन धरना देंगे। शहीद का अपमान अब बर्दाश्त नहीं।"_
विभागों का जवाब
नगरपालिका सीएमओ ने फोन पर बताया, "बस स्टैंड PWD की संपत्ति है। मूर्ति का रखरखाव उन्हीं की जिम्मेदारी है।"
जबकि PWD के कार्यपालन अभियंता का कहना है, "मूर्ति स्थापना के बाद मौखिक रूप से नगरपालिका को हैंडओवर की गई थी। लिखित में कुछ नहीं है।"
प्रमुख मांगें
1. मूर्ति परिसर का तत्काल सौंदर्यीकरण कर बाउंड्रीवॉल बनाई जाए।
2. स्थायी सफाईकर्मी और रात में सुरक्षा गार्ड तैनात हो।
3. हर साल 10 दिसंबर को शहीद दिवस राजकीय सम्मान से मनाया जाए।
4. PWD और नगरपालिका लिखित में तय करें कि रखरखाव कौन करेगा
रिपोर्टर : ए आर कर्मा

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