आदिवासी समाज ने उठाई 15 सूत्रीय मांगें, जल-जंगल-जमीन से लेकर स्वशासन तक अधिकारों की बुलंद आवाज

दंतेवाड़ा : 22 जून को जारी इस ज्ञापन में राष्ट्रपति, राज्यपाल, मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव से आदिवासी हितों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर त्वरित कार्रवाई की मांग की गई है।

ज्ञापन में कहा गया है कि राज्य का 61 प्रतिशत भूभाग पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में आता है, लेकिन संविधान, पेसा कानून और वन अधिकार कानून के कई प्रावधान आज भी पूरी तरह लागू नहीं हो पाए हैं।
ये हैं आदिवासी समाज की 15 प्रमुख मांगें
1. जनगणना में अलग आदिवासी धर्म कोड
आदिवासी धर्म, परंपराओं और आस्था को अलग पहचान देने के लिए पृथक धर्म कोड लागू किया जाए।
2. परिसीमन में आदिवासी प्रतिनिधित्व की सुरक्षा
अनुसूचित क्षेत्रों में राजनीतिक प्रतिनिधित्व कमजोर न हो, इसके लिए आरक्षित सीटों की संख्या बरकरार रखी जाए।
3. स्थानीय भर्ती और आरक्षण
सरकारी सेवाओं में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता, जिला स्तरीय रोस्टर और विशेष भर्ती अभियान चलाए जाएं।
4. निजीकरण पर रोक
शिक्षा, स्वास्थ्य और सार्वजनिक सेवाओं के निजीकरण पर रोक लगाई जाए तथा स्थानीय रोजगार सुरक्षित किए जाएं।
5. जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा
आदिवासी भूमि, प्राकृतिक संसाधनों और सामुदायिक अधिकारों की संवैधानिक सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
6. भू-माफिया नियंत्रण कानून
आदिवासी जमीनों पर अवैध कब्जों की जांच कर भूमि मूल मालिकों को वापस दिलाई जाए।
7. ग्राम सभा की अनिवार्य सहमति
खनन, उद्योग, भूमि अधिग्रहण और विकास परियोजनाओं में ग्राम सभा की पूर्व सहमति अनिवार्य की जाए।
8. उद्योग, व्यापार एवं खनन में स्थानीय हिस्सेदारी
खनिज संपदा से होने वाले लाभ में स्थानीय ग्राम सभाओं और आदिवासी समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
9. नक्सल मामलों में बंद निर्दोष आदिवासियों की रिहाई
लंबित मामलों की समीक्षा कर निर्दोष आदिवासियों को न्याय और कानूनी सहायता प्रदान की जाए।
10. डीलिस्टिंग का विरोध
धर्म परिवर्तन के आधार पर अनुसूचित जनजाति का दर्जा समाप्त करने के किसी भी प्रयास पर रोक लगाई जाए।
11. देवगुड़ियों और सांस्कृतिक स्थलों का संरक्षण
आस्था केंद्रों, पारंपरिक धार्मिक स्थलों और सांस्कृतिक धरोहरों को विशेष संरक्षण दिया जाए।
12. पेसा कानून का प्रभावी क्रियान्वयन
अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को वास्तविक अधिकार दिए जाएं और पेसा कानून का पूर्ण पालन हो।
13. वन अधिकार कानून (FRA) का पूर्ण क्रियान्वयन
व्यक्तिगत और सामुदायिक वन अधिकार दावों का शीघ्र निराकरण कर वन संसाधनों पर अधिकार सुनिश्चित किया जाए।
14. आदिवासी शिक्षा एवं मातृभाषा संरक्षण
मातृभाषा में शिक्षा, छात्रवृत्ति विस्तार और स्थानीय इतिहास-संस्कृति को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए।
15. पांचवीं अनुसूची और आदिवासी स्वशासन
पांचवीं अनुसूची के सभी संवैधानिक प्रावधानों को सख्ती से लागू कर जनजातीय सलाहकार परिषद (TAC) को प्रभावी बनाया जाए।
समापन
आदिवासी संगठनों का कहना है कि यह केवल मांगपत्र नहीं, बल्कि संविधान प्रदत्त अधिकारों के संरक्षण का संकल्प है। समाज के प्रतिनिधियों ने सरकार से इन 15 सूत्रीय मांगों पर शीघ्र निर्णय लेकर आदिवासी समुदाय के अधिकार, अस्मिता और स्वशासन की रक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।  सर्व आदिवासी समाज, दंतेवाड़ा st sc OBC मौजूद रहा

रिपोर्टर : ए आर कर्मा 

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