जगदलपुर में भीम आर्मी की संकल्प रैली, आदिवासियों को न्याय दिलाने के लिए बुलंद हुई आवाज

 दंतेवाड़ा : बहुजन समाज के महानायक, सामाजिक परिवर्तन के प्रखर विचारक एवं बहुजन आंदोलन के संस्थापक मान्यवर साहब कांशीराम जी के महापरिनिर्वाण दिवस के अवसर पर जगदलपुर में भीम आर्मी भारत एकता मिशन, जिला बस्तर के तत्वावधान में संकल्प रैली का आयोजन किया गया। रैली के माध्यम से सामाजिक न्याय, समानता, मानवाधिकार, संवैधानिक अधिकारों तथा आदिवासी समुदाय से जुड़े संवेदनशील मामलों में निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित करने की माँग प्रमुखता से उठाई गई।

इस संकल्प रैली का मुख्य उद्देश्य बस्तर क्षेत्र के आदिवासी समाज से जुड़े मुद्दों को लोकतांत्रिक तरीके से सामने लाना और संबंधित मामलों में न्यायपूर्ण कार्रवाई की माँग को शासन-प्रशासन तक पहुँचाना रहा। आयोजकों ने झीरम घाटी घटना से जुड़े मामले में संबंधित 10 आदिवासी व्यक्तियों के लिए न्याय, निष्पक्ष जाँच और विधिसम्मत न्यायिक प्रक्रिया सुनिश्चित करने की माँग उठाई। इस दौरान महामहिम राष्ट्रपति महोदया के नाम सात सूत्रीय माँगों का ज्ञापन सौंपकर संबंधित मामलों की समीक्षा, कानूनी अधिकारों के संरक्षण और बस्तर में शांति स्थापित करने के लिए ठोस पहल करने का आग्रह किया गया।

रैली में भीम आर्मी के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश आजाद, प्रदेश उपाध्यक्ष सुयाल नाग सहित बस्तर संभाग के विभिन्न जिलों से पहुँचे जिला अध्यक्षों, पदाधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने सामाजिक समानता, वंचित समुदायों के अधिकारों, न्यायपूर्ण व्यवस्था और संविधान में निहित मूल्यों की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।

मान्यवर कांशीराम साहब के विचारों को याद कर लिया सामाजिक परिवर्तन का संकल्प

मान्यवर साहब कांशीराम जी का जीवन सामाजिक असमानता के विरुद्ध संघर्ष, बहुजन समाज में जागरूकता और वंचित वर्गों को उनके अधिकारों के प्रति संगठित करने के प्रयासों के लिए याद किया जाता है। उन्होंने समाज में समान अवसर, प्रतिनिधित्व और सामाजिक सम्मान के महत्व को रेखांकित किया था। उनके विचारों से प्रेरणा लेते हुए संकल्प रैली में सामाजिक न्याय की आवाज को मजबूत करने का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को समानता, सम्मान और न्याय के साथ जीवन जीने का अधिकार है। किसी भी समुदाय के लोगों के अधिकारों की रक्षा करना और उन्हें न्याय दिलाने के लिए संवैधानिक तरीकों से प्रयास करना लोकतांत्रिक व्यवस्था की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि सामाजिक परिवर्तन केवल नारों से नहीं, बल्कि जागरूकता, संगठन, शिक्षा, संवैधानिक समझ और निरंतर लोकतांत्रिक प्रयासों से संभव है। कांशीराम साहब के विचारों को याद करते हुए समाज में व्याप्त असमानताओं को दूर करने और वंचित वर्गों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाने का संकल्प व्यक्त किया गया।

आयोजकों के अनुसार, संकल्प रैली का उद्देश्य किसी के प्रति वैमनस्य फैलाना नहीं, बल्कि न्याय, समानता, मानवाधिकार और संवैधानिक मूल्यों के आधार पर अपनी माँगों को संबंधित प्राधिकारियों तक पहुँचाना था।

झीरम घाटी मामले में निष्पक्ष जाँच और न्याय की माँग

बस्तर संभाग का झीरम घाटी क्षेत्र लंबे समय से एक अत्यंत संवेदनशील घटना से जुड़ा रहा है। इस घटना और उससे संबंधित विभिन्न पहलुओं को लेकर समय-समय पर जाँच, न्याय और जवाबदेही के सवाल उठते रहे हैं। इसी संदर्भ में संकल्प रैली के दौरान आयोजकों ने संबंधित 10 आदिवासी व्यक्तियों के मामले में निष्पक्ष जाँच और न्यायसंगत कानूनी प्रक्रिया सुनिश्चित करने की माँग रखी।

आयोजकों ने ज्ञापन के माध्यम से आग्रह किया कि संबंधित मामले में उपलब्ध तथ्यों, साक्ष्यों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर निष्पक्ष तरीके से कार्रवाई की जाए। उनका कहना था कि किसी भी गंभीर मामले में न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता, पारदर्शिता और विधिसम्मत समीक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

रैली में यह भी माँग उठाई गई कि मामले से जुड़े सभी प्रासंगिक पहलुओं की स्वतंत्र रूप से जाँच की जाए और यदि किसी व्यक्ति के अधिकारों के संरक्षण या न्यायिक प्रक्रिया की समीक्षा की आवश्यकता हो, तो सक्षम कानूनी प्राधिकारियों के माध्यम से उचित कार्रवाई की जाए।

आयोजकों ने कहा कि आदिवासी समुदाय के लोगों से जुड़े संवेदनशील मामलों में कानून के अनुसार न्याय सुनिश्चित करना, उनके अधिकारों का संरक्षण करना और न्यायिक प्रक्रिया में विश्वास बनाए रखना आवश्यक है।

राष्ट्रपति के नाम सात सूत्रीय ज्ञापन सौंपकर उठाईं प्रमुख माँगें

भीम आर्मी भारत एकता मिशन, जिला बस्तर की ओर से महामहिम राष्ट्रपति महोदया के नाम सौंपे गए ज्ञापन में सात प्रमुख माँगों को शामिल किया गया। इन माँगों के माध्यम से आयोजकों ने संबंधित मामलों में कानूनी समीक्षा, निष्पक्ष जाँच, विचाराधीन आदिवासी बंदियों के मामलों के त्वरित निपटारे और बस्तर में शांति स्थापित करने की दिशा में पहल करने का आग्रह किया।

पहली माँग: संबंधित 10 आदिवासी व्यक्तियों को न्याय और फाँसी पर रोक लगाने की माँग

ज्ञापन में संबंधित 10 आदिवासी व्यक्तियों के मामले में फाँसी की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने तथा न्यायसंगत कानूनी प्रक्रिया सुनिश्चित करने की माँग की गई। आयोजकों ने आग्रह किया कि मामले से जुड़े सभी प्रासंगिक तथ्यों और कानूनी पहलुओं पर सक्षम प्राधिकारियों द्वारा विधिसम्मत विचार किया जाए। साथ ही, संबंधित व्यक्तियों को कानून के अंतर्गत उपलब्ध सभी वैधानिक उपायों का लाभ मिलना चाहिए।

दूसरी माँग: आत्मसमर्पण कर चुके प्रमुख आरोपियों की भूमिका की निष्पक्ष जाँच

ज्ञापन में आत्मसमर्पण कर चुके प्रमुख आरोपियों की कथित भूमिका की स्वतंत्र और निष्पक्ष जाँच कराने की माँग रखी गई। आयोजकों का कहना था कि मामले से संबंधित प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका का आकलन उपलब्ध साक्ष्यों और कानून के आधार पर किया जाना चाहिए, ताकि जाँच प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे और किसी भी महत्वपूर्ण पहलू की अनदेखी न हो।

तीसरी माँग: झीरम घाटी घटना से जुड़े कथित षड्यंत्र की स्वतंत्र जाँच

झीरम घाटी घटना से जुड़े कथित षड्यंत्र और अन्य संबंधित पहलुओं की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जाँच कराने की माँग भी ज्ञापन में शामिल की गई। आयोजकों ने आग्रह किया कि यदि मामले में ऐसे पहलू हैं जिनकी आगे जाँच आवश्यक है, तो सक्षम जाँच एजेंसी द्वारा उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप उनका परीक्षण किया जाए। उनका कहना था कि गंभीर घटनाओं से जुड़े सवालों का समाधान निष्पक्ष जाँच और कानूनसम्मत कार्रवाई के माध्यम से होना चाहिए।

चौथी माँग: सजा और न्यायिक प्रक्रिया की विधिसम्मत उच्चस्तरीय समीक्षा

ज्ञापन में संबंधित मामले में दी गई सजा और न्यायिक प्रक्रिया की विधिसम्मत समीक्षा कराने की माँग उठाई गई। आयोजकों ने कहा कि संबंधित व्यक्तियों को कानून के अंतर्गत उपलब्ध अपील, पुनर्विचार या अन्य उपयुक्त वैधानिक उपायों का लाभ मिलना चाहिए। समीक्षा की प्रक्रिया सक्षम न्यायिक या कानूनी प्राधिकारियों के माध्यम से निर्धारित नियमों के अनुसार किए जाने का आग्रह किया गया।

पाँचवीं माँग: बस्तर की जेलों में बंद विचाराधीन आदिवासी बंदियों के मामलों की समीक्षा

बस्तर संभाग की जेलों में बंद विचाराधीन आदिवासी बंदियों के मामलों की समयबद्ध समीक्षा करने की माँग की गई। आयोजकों ने कहा कि जिन मामलों में सुनवाई में देरी हो रही है, उनमें कानून के अनुसार आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए। पात्र बंदियों को जमानत या अन्य वैधानिक राहत उपलब्ध कराने के लिए उनके मामलों पर संबंधित न्यायालयों और सक्षम अधिकारियों द्वारा नियमानुसार विचार किया जाना चाहिए।

छठवीं माँग: एमबीएम से जुड़े बंदियों के मामलों की शीघ्र समीक्षा

ज्ञापन में एमबीएम से जुड़े बंदियों के मामलों की भी शीघ्र और निष्पक्ष समीक्षा कराने की माँग रखी गई। आयोजकों ने आग्रह किया कि संबंधित मामलों में …

रिपोर्टर : ए आर कर्मा

 

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