तकनीक की ओर बढ़ता मध्यान्ह भोजन: रसोइयों का ऑनलाइन सत्यापन और ई-केवाईसी प्रक्रिया तेज
दतिया - प्रधानमंत्री पोषण शक्ति अभियान के अंतर्गत जिले के प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में संचालित मध्यान्ह भोजन (MDM) व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित एवं तकनीक आधारित बनाने की दिशा में रसोइयों के ऑनलाइन चिन्हांकन एवं सत्यापन की प्रक्रिया तेजी से जारी है। शासन के निर्देशानुसार विद्यालयों में पूर्व से कार्यरत एवं पंजीकृत रसोइयों का व्यक्तिवार चिन्हांकन कर उनके बैंक खातों को ऑनलाइन किया जा रहा है। इसके साथ ही बैंक खातों का ऑनलाइन सत्यापन, ई-केवाईसी तथा IFMIS जैसी प्रक्रिया के अनुरूप आवश्यक कार्यवाही की जा रही है। रसोइयों के सत्यापन की प्रक्रिया में शासन द्वारा निर्धारित विभिन्न मानकों को अपनाया गया है। इसका उद्देश्य मध्यान्ह भोजन व्यवस्था से जुड़े प्रत्येक रसोइए की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करना तथा भुगतान प्रक्रिया को अधिक सुगम और पारदर्शी बनाना है।
अध्यक्ष एवं सचिव पद पर दो वर्ष पूर्ण करने वालों में होगा बदलाव
सत्यापन के दौरान ऐसे रसोइयों को भी चिन्हित किया जा रहा है, जिनके नाम संबंधित समूह में अध्यक्ष अथवा सचिव के पद पर दर्ज हैं। शासन के निर्धारित नियमों के अनुसार अध्यक्ष एवं सचिव के पद पर दो वर्ष की कार्य अवधि पूर्ण होने के बाद नियमानुसार बदलाव किया जाना आवश्यक है। इसी क्रम में ऐसे समूहों को चिन्हित कर आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए गए हैं। आगामी चरण में परिवर्तित खाता धारकों अथवा परिवर्तित अध्यक्ष एवं सचिव वाले मध्यान्ह भोजन समूहों में समूह के माध्यम से नए निर्वाचन की प्रक्रिया कराई जाएगी। इसके माध्यम से रसोइयों के रिक्त हुए पदों को भरने तथा बैंक खाते के संचालन की व्यवस्था को भी नियमानुसार व्यवस्थित किया जाएगा।
लोकोस पोर्टल पर रसोइयों का पंजीयन
सत्यापन के दौरान यह भी सामने आया कि कई रसोइयों का नाम संबंधित समूह के साथ लोकोस पोर्टल पर पंजीकृत नहीं है। ऐसे रसोइयों को उसी समूह का सदस्य मानते हुए लोकोस पोर्टल पर उनका पंजीयन कराने की कार्यवाही की जा रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार भाण्डेर विकासखंड में मध्यान्ह भोजन से जुड़े 59 रसोइये, दतिया में 75 रसोइये तथा सेवढ़ा में 129 रसोइये लोकोस पोर्टल पर दर्ज नहीं पाए गए। इसे अनियमितता की श्रेणी में लेते हुए तत्काल प्रभाव से संबंधित रसोइयों को सूची के अनुसार लोकोस पोर्टल पर जोड़ने के निर्देश NRLM टीम को दिए गए हैं।
बड़ी संख्या में अध्यक्ष-सचिव पद पर मिले रसोइये
सत्यापन के दौरान अध्यक्ष एवं सचिव के पद पर कार्यरत रसोइयों को भी चिन्हित किया गया। जानकारी के अनुसार भाण्डेर में 83, दतिया में 150 तथा सेवढ़ा में 89 रसोइये अध्यक्ष अथवा सचिव के पद पर काबिज पाए गए हैं। इनमें से जिनकी अध्यक्ष या सचिव के रूप में दो वर्ष की कार्य अवधि पूर्ण हो चुकी है, उनमें NRLM के शासन नियमों के अनुसार आवश्यक बदलाव किया जाना है। इस संबंध में संबंधित NRLM टीम को आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
ई-केवाईसी एवं बैंक खाता सत्यापन पर विशेष जोर
नई ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत प्रत्येक रसोइये का व्यक्तिवार सत्यापन किया जा रहा है। इसमें रसोइये की पहचान, संबंधित समूह में उसकी स्थिति तथा बैंक खाते की जानकारी का मिलान किया जा रहा है। साथ ही ई-केवाईसी और बैंक खाता सत्यापन की कार्यवाही भी कराई जा रही है, ताकि भुगतान प्रक्रिया में किसी प्रकार की त्रुटि या व्यवधान की स्थिति उत्पन्न न हो। मध्यान्ह भोजन में संलग्न रसोइयों के जुलाई माह के भुगतान के लिए SNA स्पर्श लागू होने के बाद पोर्टल पर नई प्रक्रिया शुरू हुई है। इसी प्रक्रिया के क्रम में रसोइयों की जानकारी को ऑनलाइन माध्यम से सत्यापित एवं अद्यतन किया जा रहा है।
बीआरसी स्तर पर सत्यापन की लगातार निगरानी
रसोइयों के सत्यापन की प्रक्रिया में संबंधित विकासखंडों के बीआरसीसी तथा विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों (HM) की भूमिका भी महत्वपूर्ण रखी गई है। प्राप्त जानकारी का सत्यापन विद्यालय स्तर से लेकर बीआरसी स्तर तक कराया जा रहा है, ताकि पोर्टल पर दर्ज जानकारी वास्तविक स्थिति के अनुरूप हो। इस संबंध में सीमा सिंह की अध्यक्षता में आयोजित कार्यवाही के दौरान दतिया, सेवढ़ा एवं भाण्डेर के बीआरसीसी द्वारा प्राप्त सत्यापन संबंधी जानकारी की समीक्षा की गई। समीक्षा के दौरान पोर्टल पर दर्ज नहीं रसोइयों तथा अध्यक्ष-सचिव पद पर कार्यरत रसोइयों की स्थिति सामने आई।
अब तक 1006 रसोइयों का सत्यापन पूर्ण
जिले में चल रही इस विशेष प्रक्रिया के अंतर्गत अब तक 1006 रसोइयों का सत्यापन पूर्ण किया जा चुका है। शेष रसोइयों के सत्यापन की कार्यवाही वर्तमान में प्रचलन में है। जिले में शत-प्रतिशत रसोइयों का सत्यापन पूर्ण कराने के लिए संबंधित बीआरसीसी को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य मध्यान्ह भोजन व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाना, वास्तविक रूप से कार्यरत रसोइयों की पहचान सुनिश्चित करना, बैंक खातों को व्यवस्थित करना तथा शासन की योजनाओं का लाभ संबंधित हितग्राहियों तक ऑनलाइन एवं सुचारू रूप से पहुंचाना है। तकनीक आधारित इस व्यवस्था से भविष्य में भुगतान एवं रसोइयों से संबंधित अन्य प्रशासनिक कार्यों में भी सुविधा और पारदर्शिता आने की उम्मीद है।
रिपोर्टर - नितिन कुमार दांतरे

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