माजी सभापति अप्पासाहेब पवार ने 21 जनवरी को भाजपा से भरा नामांकन

दौंड - तालुका की राजनीति में एक बड़ी और सनसनीखेज राजनीतिक घटना सामने आई है। पंचायत समिति के माजी सभापति और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के तालुकाध्यक्ष रहे अप्पासाहेब पवार ने खड़की देऊळगाव राजे गुट से 21 जनवरी को भारतीय जनता पार्टी की ओर से अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया है। इस घटनाक्रम से पूरे तालुका ही नहीं,बल्कि जिले की राजनीति में भी जबरदस्त हलचल मच गई है। इस अचानक हुए राजनीतिक फेरबदल को दौंड तालुका की राजनीति में एक बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है। जैसे ही अप्पासाहेब पवार के भाजपा से नामांकन की खबर सामने आई,राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया और विभिन्न दलों के कार्यकर्ताओं में भी हलचल देखने को मिली।
सोशल मीडिया पर पहले ही मिल गए थे संकेत नामांकन से पहले ही अप्पासाहेब पवार के करीबी समर्थकों और स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा सोशल मीडिया पर उनके भाजपा उम्मीदवार बनने को लेकर स्टेटस लगाए गए थे। इससे यह स्पष्ट संकेत मिलने लगे थे कि जल्द ही कोई बड़ा राजनीतिक फैसला सामने आने वाला है। 21 जनवरी को नामांकन दाखिल होते ही इन चर्चाओं पर औपचारिक मुहर लग गई।

भाजपा से ऑफर, पवार ने लिया बड़ा फैसला

इस पूरे घटनाक्रम पर पहले अप्पासाहेब पवार ने यह संकेत दिया था कि भाजपा की ओर से उन्हें नामांकन भरने के लिए कहा गया है। अब उनके द्वारा नामांकन दाखिल किए जाने से यह साफ हो गया है कि उन्होंने भाजपा के साथ अपने राजनीतिक सफर की नई शुरुआत कर दी है। लोकसभा में दिलाई थी बढ़त,विधानसभा में उपेक्षा दौंड तालुका में अप्पासाहेब पवार का एक मजबूत और स्वतंत्र समर्थक वर्ग है। हालिया लोकसभा चुनाव में उनके नेतृत्व में सुप्रिया सुळे को दौंड तालुका में अच्छा मताधिक्य मिला था। इससे उनकी संगठन क्षमता और जनाधार की ताकत साफ तौर पर नजर आई थी। हालांकि,विधानसभा चुनाव के समय राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) द्वारा उन्हें नजरअंदाज करते हुए पूर्व विधायक रमेश थोरात को उम्मीदवार बनाए जाने से वे नाराज बताए जा रहे थे। इसके बावजूद उन्होंने पार्टी के लिए काम जारी रखा, लेकिन लगातार उपेक्षा और राजनीतिक अवसर न मिलने के चलते उन्होंने आखिरकार भाजपा के साथ जाने का फैसला किया, ऐसा राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है।

दौंड की राजनीति में बदले समीकरण

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, अप्पासाहेब पवार की भाजपा में एंट्री से दौंड तालुका की राजनीति में नए समीकरण बनना तय है। इससे आगामी चुनावों में मुकाबला और भी दिलचस्प होने की संभावना है। भाजपा को इससे स्थानीय स्तर पर संगठनात्मक मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है, जबकि राष्ट्रवादी (शरद पवार गुट) के लिए यह एक बड़ा झटका माना जा रहा है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के बाद अन्य नेता कौन सा रुख अपनाते हैं और दौंड तालुका की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है।

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