72 साल में भी मेहनत और खेती से जुड़ी प्रेरक कहानी: सुभाष ताकवणे

दौंड : 1 मई महाराष्ट्र दिवस और International Workers' Day (श्रमिक दिवस) के अवसर पर तालुका दौंड के पारगांव निवासी सुभाष साहेबराव ताकवणे की मेहनत, ईमानदारी और संघर्ष से भरी जीवनगाथा सामने आई है। लगभग 35 वर्षों तक विभिन्न स्थानों पर कड़ी मेहनत कर उन्होंने एक कर्मठ मजदूर के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई है।
सुभाष ताकवणे ने केडगांव स्थित चंदूकाका कदम के आढ़त होलसेल दुकान में लगभग 12 वर्षों तक हमाल के रूप में काम किया। इसके बाद उन्होंने वॉचमैन और मजदूर के रूप में विभिन्न स्थानों पर काम करते हुए अपने परिवार का पालन-पोषण किया। शिवाजीराव जेधे इंग्लिश स्कूल में करीब 11 वर्षों तक वॉचमैन के रूप में उन्होंने अपनी जिम्मेदारी ईमानदारी से निभाई। साथ ही, उन्होंने दो वर्ष तक पोपटलाल चोपड़ा के दुकान में वजन काटा और हमाली का काम भी किया।
हमाली के दौरान वे 110 से 120 किलो वजन के गेहूं के बोरे अपने कंधों पर उठाकर गाड़ियों में लोड करते थे। इसके अलावा 100 किलो के बोरे तैयार करने जैसे कठिन कार्य भी उन्होंने निरंतर किए। उनकी अथक मेहनत के कारण उन्हें क्षेत्र में एक मेहनती और भरोसेमंद कामगार के रूप में पहचान मिली।
ईमानदारी का उदाहरण :
सुभाष ताकवणे की सबसे बड़ी पहचान उनकी ईमानदारी है। देवकरवाड़ी में यात्रा के दौरान एक व्यक्ति की खोई हुई पैसों की बैग उन्होंने ढूंढकर उसे वापस सौंप दी। इस घटना से उनकी ईमानदारी की पूरे क्षेत्र में सराहना हुई।
राजनीतिक सहभाग :
साल 1996 में उन्होंने लोकसभा चुनाव निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में लड़ा। “दो बालक” चुनाव चिन्ह के साथ उन्होंने अंत तक चुनाव मैदान में डटे रहे। उस समय उन्होंने Sharad Pawar के खिलाफ चुनाव लड़कर अपनी स्पष्ट भूमिका रखी।
सामाजिक परंपरा :
उनकी पत्नी संगीता ताकवणे ग्राम पंचायत सदस्य रह चुकी हैं, जबकि उनके पिता साहेबराव ताकवणे ने 10 वर्षों तक सरपंच पद संभाला। वर्तमान में उनका बेटा भी समाजसेवा में सक्रिय है।
72 वर्ष की उम्र में भी खेती से जुड़ाव :
आज 72 वर्ष की आयु में भी सुभाष ताकवणे को खेती से विशेष लगाव है और वे आज भी सक्रिय रूप से खेती करते हैं। उनका शांत, मिलनसार स्वभाव और ईमानदार जीवनशैली उन्हें समाज में एक आदर्श व्यक्ति बनाती है।
1 मई महाराष्ट्र श्रमिक दिवस के अवसर पर सुभाष ताकवणे की यह जीवनगाथा मेहनत, ईमानदारी, संघर्ष और समाजसेवा का प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभर रही है।

ब्यूरो रिपोर्ट

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