देहरादून के बड़ोवाला मोक्ष धाम की बदहाली पर आर्येंद्र शर्मा ने सरकार को घेरा
देहरादून : बड़ोवाला के पास स्थित मोक्ष धाम की बदहाल स्थिति को लेकर आर्येंद्र शर्मा ने सरकार के विकास मॉडल पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि आसपास के हजारों लोगों के लिए यह प्रमुख श्मशान घाट है, लेकिन यहां पहुंचने के लिए आज भी न तो उचित सड़क उपलब्ध है और न ही अंतिम संस्कार के लिए जरूरी मूलभूत सुविधाएं।
आर्येंद्र शर्मा ने सरकार पर व्यंग्य करते हुए कहा कि विकास का ऐसा मॉडल सामने आ रहा है, जिसमें जीवित व्यक्ति सड़क का इंतजार कर रहा है और मृत व्यक्ति को भी मोक्ष धाम तक पहुंचने के लिए रास्ते का इंतजार करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि अंतिम संस्कार के लिए लकड़ियां तक लोगों को खराब और दुर्गम रास्ते से सिर पर उठाकर ले जानी पड़ती हैं। परिवार पहले ही अपने प्रियजन को खोने के दुख में होता है और इसके बाद अंतिम संस्कार की व्यवस्था के लिए भी उसे संघर्ष करना पड़ता है। मोक्ष धाम के आसपास जगह-जगह कूड़े और गंदगी के ढेर पड़े हैं, जो व्यवस्था की संवेदनहीनता को दर्शाते हैं।
आर्येंद्र शर्मा ने कहा कि यह केवल सड़क, सफाई, बिजली या पानी का मामला नहीं है, बल्कि यह अंतिम यात्रा की गरिमा और शोकाकुल परिवार के सम्मान से जुड़ा सवाल है। सरकार को ऐसे स्थानों पर विशेष संवेदनशीलता दिखानी चाहिए, जहां लोग अपने परिजनों को अंतिम विदाई देने पहुंचते हैं।
उन्होंने प्रशासन से मोक्ष धाम तक तत्काल सुगम सड़क निर्माण, नियमित सफाई, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था, पेयजल, शेड और अंतिम संस्कार के लिए आवश्यक अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की।
आर्येंद्र शर्मा ने कहा कि सरकार विकास के बड़े-बड़े दावे और विज्ञापन करती रहे, लेकिन बड़ोवाला का मोक्ष धाम आज भी एक सीधा सवाल पूछ रहा है।
क्या अंतिम यात्रा के लिए भी सड़क मांगना बहुत बड़ी मांग है?
रिपोर्टर : प्रवचन सिंह
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