मुश्किल में ओझा सर की राजनीति , वोट का पत्ता कटा

वो यूपीएससी के चमत्कारी टीचर, जिन्होंने सैकड़ों युवाओं को आईएएस और आईपीएस बनाने का सपना दिखाया। अब उनका अपना राजनीतिक सफर कुछ खास ही मोड़ पर आ खड़ा हुआ है। अवध ओझा, जिनके हाथ में कभी किताबें होती थीं, अब उन्होंने झाडू थाम ली है .. जी हां , वो आम आदमी पार्टी में शामिल हुए थे, एक नई शुरुआत के लिए, और पटपड़गंज सीट से चुनावी ताल ठोंकी थी। लेकिन उनकी सियासत अभी से ही अधर में लटक गई है . दरअसल, ओझा सर का वोट ट्रांसफर दिल्ली में नहीं हो पाया। उन्होंने ग्रेटर नोएडा से दिल्ली में वोट ट्रांसफर करने के लिए आवेदन किया था, लेकिन चुनाव आयोग ने तारीखें बदल दीं, जिससे उनकी उम्मीदवारी पर सवाल उठने लगे हैं।अब जो पेंच फंसा है, वह यही है कि विधानसभा चुनावों में किसी उम्मीदवार का वोटर उस ही विधानसभा से होना जरूरी है। अगर ओझा सर का वोट ट्रांसफर नहीं हो पाया, तो उनकी उम्मीदवारी लगभग खत्म हो सकती है। और अगर ऐसा हुआ, तो आम आदमी पार्टी को पटपड़गंज सीट से नया उम्मीदवार उतारने की जरूरत पड़ेगी।
आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया है कि ओझा सर को जानबूझकर चुनाव लड़ने से रोका जा रहा है। अब अगर ओझा सर का चुनाव लड़ना मुश्किल हो गया, तो आम आदमी पार्टी को पटपड़गंज से नया उम्मीदवार उतारना पड़ सकता है।
अब सवाल ये है कि क्या ओझा सर का राजनीतिक सफर दिल्ली के इस सियासी तूफान में थम जाएगा? या फिर आम आदमी पार्टी किसी नए उम्मीदवार के साथ पटपड़गंज में झाड़ू की ताबड़तोड़ धुलाई करेगी?जैसा कि राजनीति में हर दिन एक नया मोड़ होता है, और झाड़ू के साथ ही अब ओझा सर के अरमानों को भी पंख लग सकते हैं या फिर ये सियासी बर्फबारी ओझा सर के रास्ते को जाम कर देगी। राजनीति का मैदान हमेशा अनिश्चित होता है—लेकिन एक बात तो तय है, ओझा सर का चुनावी सफर अब पहले जैसा आसान नहीं दिखता!
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