दिल्ली में 3 साल में 1700 करोड़ की 'डिजिटल डकैती', सिर्फ 10% वापसी

सावधान हो जाइए! अगर आप देश की राजधानी दिल्ली में रहते हैं और डिजिटल पेमेंट करते हैं, तो आपकी गाढ़ी कमाई पर लुटेरों की नहीं, बल्कि साइबर ठगों की नज़र है। जी हां ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि पिछले तीन साल में दिल्ली में ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले दोगुने से ज़्यादा बढ़ गए हैं। ठगों ने दिल्लीवालों की जेब से 1,716 करोड़ रुपये साफ़ कर दिए, लेकिन हमारी हाई-टेक पुलिस केवल 10 प्रतिशत रकम ही वापस दिला पाई है। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद डॉ. संदीप पाठक द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने दिल्ली में साइबर अपराध की जो तस्वीर पेश की है, वह डरावनी है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक...

2023 में 1475 केस दर्ज हुए।
2024 में यह संख्या बढ़कर 1707 हुई।
2025 में आंकड़ा 3800 केस तक जा पहुँचा।

यानी सिर्फ तीन साल में ऑनलाइन चीटिंग और डिजिटल पेमेंट फ्रॉड के मामले दोगुने से भी ज़्यादा हो गए हैं। सबसे हैरान करने वाली बात रिकवरी रेट को लेकर है। इन तीन सालों में ठगों ने कुल 1716 करोड़ रुपये लूटे। लेकिन दिल्ली पुलिस की तमाम कोशिशों के बाद भी सिर्फ 174 करोड़ रुपये ही रिकवर किए जा सके। यानी जनता के लगभग 90 प्रतिशत पैसे आज भी साइबर अपराधियों के पास हैं और रिकवरी की उम्मीद धुंधली पड़ती जा रही है। 

हाल ही में दिल्ली में एक 78 वर्षीय रिटायर्ड बैंकर के साथ हुई ठगी ने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। ठगों ने खुद को सरकारी अफसर बताकर बुजुर्ग को करीब डेढ़ महीने तक 'डिजिटल अरेस्ट' रखा और उनके खाते से 23 करोड़ रुपये उड़ा लिए। वहीं मामले की गंभीरता को देखते हुए अब इसकी जांच CBI को सौंप दी गई है। 

हैरानी वाली बात तो ये है कि दिल्ली पुलिस के पास साइबर क्राइम से लड़ने के लिए एक बड़ी टीम तैनात है। जिसमें 15 साइबर पुलिस थाने और 2 स्पेशल साइबर सेल हैं, जिसमें 813 पुलिसकर्मी हैं। हेल्पलाइन 1930 और डिजिटल साइबर सेंटर भी बनाया गया है, जहाँ 14 बैंकों के अधिकारी रियल-टाइम काम करते हैं। इसके बावजूद ठगी का ग्राफ नीचे आने का नाम नहीं ले रहा।

वहीं सरकार का कहना है कि 40 बैंकों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। ई-FIR की सुविधा और जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि अपराधी पुलिस की तकनीक से दो कदम आगे चल रहे हैं। 

ऐसे में आंकड़े गवाह हैं कि दिल्ली पुलिस के 800 जांबाज और 15 थाने मिलकर भी साइबर ठगों के हौसले पस्त नहीं कर पा रहे हैं। 1700 करोड़ की ठगी में से सिर्फ 10 परसेंट की रिकवरी यह बताती है कि हमारे सिस्टम में कितनी बड़ी दरार है। जब तक अपराधियों को पकड़कर जनता का पैसा वापस नहीं मिलता, तब तक ये 'डिजिटल इंडिया' की सुरक्षा पर एक बड़ा सवालिया निशान बना रहेगा। हमारी आपसे अपील है कि किसी भी अनजान कॉल या लिंक पर भरोसा न करें, क्योंकि आपकी एक छोटी सी चूक आपको 'डिजिटल अरेस्ट' के जाल में फँसा सकती है। सतर्क रहें, सुरक्षित रहें।

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