दिल्ली सील, संसद घिरी! छात्रों का खून, किसानों का कूच
दिल्ली की सीमाएं सील, जंतर-मंतर पर रणक्षेत्र और संसद से लेकर सड़कों तक ज़बरदस्त हाहाकार! जी हां राजधानी दिल्ली की हवा में इस वक्त सियासत का बारूद तैर रहा है और माहौल पूरी तरह से गर्माया हुआ है! एक तरफ जहां नीट पेपर लीक और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली की सड़कों पर उतरे छात्रों पर पुलिस के डंडे बरसे, आंसू गैस के गोले छूटे और खून बहा...वहीं दूसरी तरफ पंजाब-हरियाणा की सीमाओं से हजारों किसानों ने दिल्ली फतह करने के लिए धावा बोल दिया है! ऐसे में सवाल है कि क्या दिल्ली एक बार फिर बड़े आंदोलन की गवाह बनने जा रही है? आइए जानते हैं सड़कों से लेकर संसद भवन तक के इस पूरे बवाल की अंदरूनी कहानी!
दिल्ली का दिल कहा जाने वाला जंतर-मंतर बीते दिन अचानक छावनी और फिर जंग के मैदान में तब्दील हो गया. मामला था मॉनसून सत्र के पहले दिन कॉकरोच जनता पार्टी का 'संसद चलो' मार्च. प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली, नीट पेपर लीक और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तुरंत इस्तीफे की मांग को लेकर हजारों युवा और छात्र सड़कों पर उतरे थे. लेकिन जैसे ही यह भीड़ संसद मार्ग की ओर बढ़ी, दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने उन्हें रोकने के लिए बैरिकेड्स लगा दिए. देखते ही देखते शांतिपूर्ण प्रदर्शन हिंसक झड़प में बदल गया. वहीं भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने हवा में आंसू गैस के गोले दागे और फिर लाठीचार्ज कर दिया. जिसके बाद गुस्साए प्रदर्शनकारियों और उपद्रवियों ने पुलिस की गाड़ियों को निशाना बनाया. रीगल सिनेमा और कनॉट प्लेस के आउटर सर्कल के पास पुलिस की गाड़ियों के सामने के शीशे तोड़ दिए गए और जमकर पथराव हुआ. दिल्ली पुलिस के मुताबिक, इस भीषण टकराव में पुलिस के बड़े अधिकारियों समेत 118 से ज्यादा पुलिस और केंद्रीय बलों के जवान घायल हुए हैं. वहीं दूसरी तरफ करीब 60 प्रदर्शनकारी छात्र भी घायल हुए हैं, जबकि पुलिस ने करीब 70 लोगों को हिरासत में ले लिया है. आपको बता दें सोमवार देर रात पुलिस द्वारा मंच हटाए जाने के बाद CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके और समर्थक फिर से जंतर-मंतर और केरल हाउस के बाहर धरने पर बैठ गए हैं. अभिजीत दिपके ने पुलिस और मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि पूरे देश ने देखा कि कैसे दिल्ली पुलिस ने बर्बरता की हदें पार कर दीं. उन्होंने आरोप लगाया, 12-12 साल की बच्चियों का सिर फोड़ दिया गया! पुरुष पुलिस अधिकारियों ने लड़कियों के कपड़े फाड़े, उनकी छाती पर पैर रखे और गले पकड़े. महिला पुलिसकर्मी दूर थीं, हाथ उठाने वाले सारे पुरुष अधिकारी थे. यह सरकार नहीं, तानाशाही है!
उन्होंने साफ किया कि जब तक धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, प्रदर्शन खत्म नहीं होगा. हालांकि, पुलिस द्वारा छात्रों का खून बहाए जाने के विरोध में आज मंगलवार को संसद मार्च टालकर जंतर-मंतर पर ही शांतिपूर्ण धरना जारी रखा गया. वहीं इस पूरी बर्बरता से आहत होकर अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक ने सफदरजंग अस्पताल से अपनी पत्नी के जरिए एक खत भेजा है. वांगचुक ने ऐलान किया है कि छात्रों पर हुए इस अत्याचार के विरोध में वे अपना अनशन नहीं तोड़ेंगे.
आपको बता दें इस घटना ने देश की राजनीति और कानूनी गलियारों में भूचाल ला दिया है. दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल ने इस घटना को बच्चों के साथ हुई बर्बरता करार दिया. उन्होंने सोशल मीडिया पर हेल्पलाइन नंबर जारी करते हुए कहा कि वे घायल छात्रों को देश की सबसे बेहतरीन लीगल और मेडिकल टीम मुफ्त में मुहैया कराएंगे.
दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट के वकील नरेंद्र मिश्रा ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर दिल्ली पुलिस और RAF के खिलाफ खुद संज्ञान लेने और सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की अध्यक्षता में स्वतंत्र न्यायिक जांच कराने की मांग की है. इतना ही नहीं आजाद समाज पार्टी के सांसद चंद्रशेखर रावण संसद परिसर में बाबा साहब अंबेडकर की प्रतिमा के नीचे रात भर धरने पर बैठे रहे. उन्होंने कहा, "मैंने जलियांवाला बाग नहीं देखा, लेकिन जंतर-मंतर के दृश्यों ने इतिहास के उस काले पन्ने की याद दिला दी."
आपको बता दें दिल्ली अभी जंतर-मंतर के बवाल से उबर भी नहीं पाई थी कि पंजाब और हरियाणा से किसानों के जत्थे दिल्ली की तरफ बढ़ने लगे हैं. जी हां इसकी वजह है...भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का विरोध! 'देश बचाओ मोर्चा' के बैनर तले किसान अमृतसर और गुरदासपुर से शंभू बॉर्डर की तरफ कूच कर रहे हैं. किसानों का मानना है कि अगर यह ट्रेड डील लागू हुई, तो अमेरिका के सस्ते कृषि उत्पाद भारतीय बाजार में आ जाएंगे, जिससे देसी खेती, डेयरी उद्योग और गांव के छोटे किसानों की रोजी-रोटी पूरी तरह बर्बाद हो जाएगी. वहीं खनौरी और शंभू बॉर्डर पर हरियाणा पुलिस ने भारी बैरिकेडिंग कर दी है. भारतमाला एक्सप्रेसवे पर गाड़ियों की आवाजाही ठप है. BNS की धारा 163 लागू कर दी गई है. भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के प्रमुख गुरनाम सिंह चढ़ूनी को दिल्ली जाते वक्त गिरफ्तार कर लिया गया. इसके विरोध में मथुरा समेत कई इलाकों में किसान नेताओं को रात में ही घरों में हाउस अरेस्ट कर दिया गया. वहीं इन तमाम तनावों के बीच NDA संसदीय दल की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कड़ा रुख अपनाया. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि पीएम मोदी ने साफ कहा है कि पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दे पर कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए, दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और उन्हें कड़ी से कड़ी सजा मिलेगी. साथ ही भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम पर बोलते हुए पीएम ने भरोसा दिया कि इस समझौते से भारतीय किसानों का 1% भी नुकसान नहीं होगा.
देखा जाए तो इस वक्त देश की राजधानी दिल्ली चारों तरफ से मांगों, नारों और सुरक्षा बलों की नाकेबंदी से घिरी हुई है! एक तरफ भविष्य की तलाश में सड़कों पर लहूलुहान होते छात्र हैं, तो दूसरी तरफ अपनी जमीनों और फसल की हिफाजत के लिए सीमाओं पर डटे अन्नदाता! पुलिस की लाठियों और आंसुओं के बीच सियासत का पारा अपने चरम पर है. अब देखना यह दिलचस्प होगा कि क्या सरकार बातचीत का रास्ता निकालकर इस सुलगती हुई दिल्ली को शांत कर पाती है, या फिर यह आंदोलन और ज्यादा उग्र रूप अख्तियार करेगा?
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