स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही पर कलेक्टर सख्त; एक निलंबित, पांच की वेतनवृद्धि रोकी और सात का वेतन काटा
देवास : जिला स्वास्थ्य समिति की समीक्षा बैठक में कलेक्टर ऋतुराज सिंह का सख्त रुख देखने को मिला। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं सहित राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर कलेक्टर ने गाज गिराई है। बैठक में कार्य के प्रति उदासीनता पाए जाने पर एक कर्मचारी को निलंबित, पांच की वेतनवृद्धि रोकने, तीन के विरुद्ध विभागीय जांच और सात कर्मचारियों का वेतन काटने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। लापरवाही पर हुई प्रमुख कार्रवाईयां: निलंबन: नेशनल ट्यूबरकुलोसिस प्रोग्राम (TB) के तहत सोनकच्छ में निराशाजनक प्रदर्शन पर एसटीएलएस शर्मिला राठोर को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के निर्देश दिए गए। वेतनवृद्धि पर रोक (Increment Stop): * सोनकच्छ बीएमओ डॉ. राकेश कुमार, बीईई सुखदेव रावत और एनआरसी डॉक्टर कपिल गांगिल की दो-दो वेतनवृद्धि रोकने के निर्देश। मातृ मृत्यु प्रकरण में लापरवाही पर डॉ. मेघा कदम और ड्यूटी नर्स की एक-एक वेतनवृद्धि रोकी गई।
वेतन कटौती: सोनकच्छ बीसीएम पवन सवनेर का एक माह का वेतन, जबकि बीपीएम दीपक चौहान, रतनसिंह जामले, प्रदीप पवार, एपीएम स्वीटी यादव और एएनएम रीना साकते व दीपिका वर्मा का 7 से 10 दिन का वेतन काटने के निर्देश दिए गए।
विभागीय जांच और नोटिस: एनीमिक महिला के उपचार में कोताही बरतने पर कन्नौद बीएमओ लोकेश मीणा, डॉ. लक्ष्मी जायसवाल और ड्यूटी अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए। वहीं, मुख्यालय से नदारद रहने पर डॉ. आदर्श ननेरिया और डॉ. वर्षा राय को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।
प्रमुख निर्देश: "बिना अनुमति छुट्टी ली तो होगी कार्रवाई"
कलेक्टर श्री सिंह ने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य विभाग का कार्य सीधे जनता के जीवन से जुड़ा है, इसमें लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सख्त लहजे में कहा:
मुख्यालय पर उपस्थिति: कोई भी बीएमओ कलेक्टर की अनुमति के बिना अवकाश पर नहीं जाएगा।
रेफरल प्रोटोकॉल: मरीजों को केवल 'हाई रिस्क' होने पर ही रेफर किया जाए। रेफर करते समय बच्चों को संक्रमण से बचाने के लिए साफ टॉवल का उपयोग अनिवार्य रूप से करें।
शत-प्रतिशत पंजीयन: पैथोलॉजी में आने वाले हर केस और गर्भवती महिलाओं का एएनसी (ANC) रजिस्ट्रेशन 100% सुनिश्चित करें।
नई पहल: गर्भवती महिलाओं को मिलेगी ₹500 की राशि
बैठक में एक महत्वपूर्ण निर्णय की जानकारी दी गई। जिले में स्वस्थ मां और शिशु के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एनीमिक गर्भवती महिलाओं को सरकारी अस्पतालों में 'ब्लड ट्रांसफ्यूशन' कराने पर 500 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। यह योजना दिसंबर 2026 तक लागू रहेगी, ताकि महिलाएं अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हों।
शिविरों का आयोजन
कलेक्टर ने स्वास्थ्य विभाग को हर 20 दिन में जिले में शिविर लगाने के निर्देश दिए। इन शिविरों के माध्यम से आयुष्मान योजना, बाल हृदय उपचार, कैंसर (विशेषकर स्तन कैंसर) और आंखों की जांच जैसी सेवाओं का लाभ पात्र नागरिकों तक पहुंचाया जाएगा
रिपोर्टर : साजिद पठान


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