स्कूल संचालकों और पुस्तक विक्रेताओं की मनमानी पर रोक,कलेक्टर ने जारी किए सख्त निर्देश
देवास : स्कूल संचालकों, पुस्तक प्रकाशकों और विक्रेताओं के एकाधिकार को समाप्त करने के लिए प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी ऋतुराज सिंह ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 (1) (2) के तहत जिले की संपूर्ण राजस्व सीमा के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन आदेशों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत दंडात्मक कार्यवाही की जाएगी।
प्रमुख निर्देश: पारदर्शिता और अभिभावकों को राहत
प्रशासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार,अब स्कूल संचालक अपनी मर्जी से न तो किताबें थोप पाएंगे और न ही यूनिफॉर्म के नाम पर अभिभावकों की जेब काट सकेंगे। किताबों की सूची सार्वजनिक करना अनिवार्य: स्कूलों को प्रत्येक कक्षा की अनिवार्य पुस्तकों की सूची परीक्षा परिणाम से पहले ही स्कूल की वेबसाइट और सूचना पटल पर चस्पा करनी होगी। साथ ही, नए सत्र से एक माह पूर्व अभिभावकों को यह सूची उपलब्ध कराना सुनिश्चित करना होगा। खरीदने की समय सीमा: अभिभावक अपनी सुविधा और उपलब्धता के अनुसार 30 अप्रैल 2026 तक पुस्तकें खरीद सकेंगे। अप्रैल माह के शुरुआती सत्र में छात्रों को ओरिएंटेशन, व्यवहारिक ज्ञान और रिवीजन कराया जाएगा। NCERT और सरकारी किताबों पर जोर: सीबीएसई स्कूलों में केवल एनसीईआरटी की किताबें ही अनिवार्य होंगी। कक्षा 9वीं से 12वीं तक मध्य प्रदेश पाठ्यपुस्तक निगम द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम ही पढ़ाया जाएगा। निजी प्रकाशकों की पुस्तकों का बोझ कम से कम रखने के निर्देश दिए गए हैं। बस्ते का वजन और सामग्री पर नियंत्रण
छात्रों के शारीरिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए स्कूल बैग का वजन भी निर्धारित किया गया है:
कक्षा 1-2: 1.5 किग्रा
कक्षा 3-5: 2-3 किग्रा
कक्षा 6-7: 4 किग्रा
कक्षा 8-9: 4.5 किग्रा
कक्षा 10: 5 किग्रा
एकाधिकार और कमीशन खोरी पर प्रहार कलेक्टर ने स्पष्ट किया है कि कोई भी स्कूल किसी विशेष दुकान या विक्रेता से सामग्री खरीदने के लिए बाध्य नहीं करेगा। पूरा सेट खरीदने की बाध्यता नहीं: विक्रेता अभिभावकों को पूरा सेट खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकते। यदि विद्यार्थी के पास पुरानी पुस्तकें हैं, तो वह केवल जरूरत की किताबें ही खरीद सकेगा।
प्रचार-प्रसार पर रोक: निजी प्रकाशक या विक्रेता स्कूल परिसर के भीतर प्रचार नहीं कर सकेंगे। यूनिफॉर्म के नियम: स्कूल 3 साल से पहले यूनिफॉर्म नहीं बदल सकेंगे। अधिकतम दो प्रकार की यूनिफॉर्म (ब्लेजर/स्वेटर अतिरिक्त) ही निर्धारित की जा सकती है। वार्षिक उत्सवों के लिए अलग से ड्रेस खरीदने का दबाव बनाना प्रतिबंधित है। उल्लंघन पर होगी जेल और जुर्माना
यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। आदेश का उल्लंघन होने पर न केवल प्राचार्य या संचालक, बल्कि स्कूल प्रबंधन और बोर्ड डायरेक्टर्स के सभी सदस्य भी दोषी माने जाएंगे। कलेक्टर ने जिले के सभी स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे इस सूचना को अपने नोटिस बोर्ड पर अनिवार्य रूप से चस्पा करें।
रिपोर्टर : साजिद पठान

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