​प्रशासनिक लापरवाही आई सामने; 200 साल पुराना बरगद का पेड़ भी झुलसा

देवास : ​गंधर्वपुरी  देव बन स्थान देहरी रोड स्थित खेतों में सोमवार दोपहर उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब अचानक लगी भीषण आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। इस अग्निकांड ने न केवल किसानों की मेहनत को राख कर दिया, बल्कि आपातकालीन सेवाओं की पोल भी खोलकर रख दी है।

​घटना का विवरण: देखते ही देखते सब राख
​दोपहर करीब 2:00 बजे लगी इस आग ने चंद मिनटों में ही भयावह रूप ले लिया। सूखी पराली और भीषण गर्मी के कारण लपटें इतनी तेज थीं कि लगभग 40-45 बीघा क्षेत्र में फैली पराली जलकर राख हो गई।
​किसानों का नुकसान: खेतों में रखा सूखा भूसा जलने से किसानों को भारी आर्थिक क्षति हुई है।
​प्राकृतिक क्षति: आग की चपेट में आने से कई वनस्पतियां नष्ट हो गईं। सबसे दुखद पहलू यह रहा कि क्षेत्र की पहचान माना जाने वाला 200 साल पुराना विशाल बरगद का पेड़ भी पूरी तरह झुलस गया।
​फायर ब्रिगेड की लापरवाही: आक्रोश में ग्रामीण
​घटना के तुरंत बाद ग्रामीणों ने दमकल विभाग को सूचना दी थी, लेकिन आरोप है कि घंटों बीत जाने के बाद भी फायर ब्रिगेड का वाहन मौके पर नहीं पहुँचा। प्रशासन की इस लचर व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी है।
​"अगर हम समय पर ट्रैक्टर और निजी टैंकरों का इंतजाम नहीं करते, तो आग आसपास के घरों और अन्य खेतों को भी अपनी चपेट में ले लेती। प्रशासन के भरोसे रहते तो सब कुछ तबाह हो जाता।"
स्थानीय ग्रामीण
​ग्रामीणों की सूझबूझ से टला बड़ा हादसा

​जब सरकारी तंत्र विफल साबित हुआ, तब ग्रामीणों ने खुद ही कमान संभाली। दर्जनों ट्रैक्टरों और पानी के टैंकरों की मदद से कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। यदि ग्रामीण अपनी सूझबूझ और एकजुटता नहीं दिखाते, तो नुकसान का आंकड़ा कहीं अधिक हो सकता था।
​जांच और कार्रवाई की मांग
​फिलहाल आग लगने के सटीक कारणों का खुलासा नहीं हो पाया है, लेकिन माना जा रहा है कि अत्यधिक गर्मी और खेतों में जमा सूखी पराली ने ईंधन का काम किया।
​ग्रामीणों की मुख्य मांगें:
​लापरवाह अधिकारियों और समय पर न पहुँचने वाली दमकल सेवा पर सख्त कार्रवाई हो।
​क्षेत्र में भविष्य की आपदाओं से निपटने के लिए ठोस और त्वरित व्यवस्था की जाए।
​प्रभावित किसानों को हुए नुकसान का उचित मुआवजा दिया जाए।
​इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या हमारा प्रशासन ऐसी आकस्मिक आपदाओं से निपटने के लिए वाकई तैयार है ?

रिपोर्टर : साजिद पठान

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