प्रशासनिक उदासीनता: अल्टीमेटम के बाद भी नहीं हटा बैराखेड़ी में शासकीय भूमि से अवैध अतिक्रमण, दफ्तरों के चक्कर काट रहा हृदय रोगी
देवास : मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री जहां एक ओर प्रदेश को माफिया और अतिक्रमण मुक्त बनाने के सख्त निर्देश दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जिला देवास की सोनकच्छ तहसील के जिम्मेदार अधिकारी जनसुनवाई और सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों को ठंडे बस्ते में डालने में लगे हैं। ताजा मामला ग्राम बैराखेड़ी का है, जहां शासकीय रास्ते और भूमि पर किए गए अवैध अतिक्रमण को लेकर एक बुजुर्ग हृदय रोगी पिछले एक साल से न्याय के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर है।
प्याज ट्रक हादसे के ठीक 100 मीटर आगे है अतिक्रमण
ग्राम गंधर्वपुरी निवासी प्रार्थी मदनलाल पिता मांगीलाल शर्मा ने मंगलवार को देवास कलेक्टर एवं जनसुनवाई अधिकारी को एक बार फिर लिखित गुहार लगाई है। शिकायती पत्र के अनुसार, ग्राम बैराखेड़ी में शासकीय रास्ते और भूमि पर गांव के ही रघुवीर सिंह पिता विक्रमसिंह द्वारा टापरी और घुड़ा बनाकर अवैध कब्जा कर लिया गया है।
चौंकाने वाली बात यह है कि यह अतिक्रमण स्थल हाल ही में हुए चर्चित 'बैराखेड़ी प्याज ट्रक हादसे' से महज 100 मीटर की दूरी पर मुख्य मार्ग पर स्थित है। इस अवैध निर्माण के कारण आम रास्ता पूरी तरह प्रभावित हो रहा है और ग्रामीणों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
तहसीलदार का 7 दिन का अल्टीमेटम भी बेअसर
मामले में प्रशासनिक लापरवाही का आलम यह है कि तहसीलदार महोदय स्वयं मौके का निरीक्षण कर चुके हैं। उन्होंने मामले की गंभीरता को देखते हुए 21 अप्रैल 2026 को अतिक्रमणकर्ता को 7 दिनों के भीतर अवैध निर्माण हटाने का अल्टीमेटम (निर्देश) दिया था। लेकिन प्रशासनिक रसूख या इच्छाशक्ति की कमी के कारण आज लगभग एक महीना बीत जाने के बाद भी अतिक्रमण जस का तस बना हुआ है।
केस वापस लेने के लिए बनाया जा रहा है मौखिक दबाव!
पीड़ित मदनलाल शर्मा ने अपनी शिकायत में प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने इस मामले को लेकर हर स्तर पर गुहार लगाई है:
तहसीलदार कार्यालय: 16 मई 2025 और दोबारा 5 मई 2026 को आवेदन दिया।
जनसुनवाई (देवास): 7 अप्रैल 2026 को शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस चौकी: 3 अप्रैल 2026 को आवेदन सौंपा।
CM हेल्पलाइन: 17 अप्रैल 2026 को शिकायत (क्रमांक: 37817608) दर्ज कराई।
आरोप है कि सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज होने के बाद जब प्रार्थी को तहसील कार्यालय बुलाया गया, तो वहां मामले का निराकरण करने के बजाय पीड़ित पर ही शिकायत वापस लेने के लिए मौखिक रूप से समझाइश (दबाव) दी गई।
तबीयत बिगड़ी तो कौन होगा जिम्मेदार ?
प्रार्थी मदनलाल शर्मा ने बताया कि वे गंभीर हृदय रोग (Heart Patient) से पीड़ित हैं। पिछले एक साल से लगातार अधिकारियों के चक्कर काटने और न्याय न मिलने के कारण वे भारी मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं। उन्होंने कलेक्टर से गुहार लगाई है कि उनके गिरते स्वास्थ्य को देखते हुए मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और शासकीय रास्ते को जल्द से जल्द अतिक्रमण मुक्त कराया जाए।
अब देखना यह है कि देवास का जिला प्रशासन इस मामले को संज्ञान में लेकर दोषियों पर कब तक कार्रवाई करता है, या फिर एक बुजुर्ग हृदय रोगी को व्यवस्था के आगे ऐसे ही लाचार बने रहना होगा।
इनका कहना है।
तहसीलदार को कार्यवाही के लिए बता दिया है।
एसडीएम आनंद मालवीया
रिपोर्टर : साजिद पठान

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