पीपलरावां नगर परिषद में फिर 'रार': 9 पार्षदों ने खोला मोर्चा,धरना देने की दी चेतावनी

देवास : ​पीपलरावां नगर परिषद पीपलरावां में एक बार फिर बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। परिषद की प्रेसीडेंट इन काउंसिल (PIC) के गठन और संचालन को नियमविरुद्ध बताते हुए नौ पार्षदों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। नाराज पार्षदों ने पीआईसी में लिए गए सभी निर्णयों को वापस लेने के लिए एक आवेदन सौंपा है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि नियमानुसार कार्रवाई नहीं की गई, तो वे वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत करेंगे और परिषद कार्यालय परिसर में ही धरने पर बैठ जाएंगे।

​अधिनियमों की धज्जियां उड़ाने का आरोप

​पार्षदों ने पीआईसी के संचालन पर नगरीय निकाय अधिनियम के उल्लंघन के कई गंभीर आरोप लगाए हैं: ​धारा 73 का उल्लंघन: पार्षद शानू राठौर ने बताया कि पीआईसी से इस्तीफा दे चुकीं पार्षद ज्योति गुप्ता को अभी भी नियमों के खिलाफ जाकर पीआईसी का सदस्य बताया जा रहा है। ​धारा 70 का उल्लंघन: पीआईसी में अनिवार्य रूप से पांच पार्षदों की संख्या होनी चाहिए, लेकिन कोरम (निर्धारित संख्या) से कम सदस्य होने के बावजूद पीआईसी को गलत तरीके से संचालित किया जा रहा है। ​धारा 71 का उल्लंघन: पार्षद मोनिका भावसार के अनुसार, नियम यह है कि पीआईसी की सलाहकार समितियों में अलग-अलग पार्षद होने चाहिए। इसके विपरीत, अध्यक्ष ने पीआईसी के ही पांच पार्षदों को बारी-बारी से इन समितियों का सदस्य बना दिया।

अचानक कैसे 'जिंदा' हो गई निष्क्रिय पीआईसी?

पार्षद राधे बरेठा ने परिषद की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल उठाते हुए कहा कि उन्होंने 2 सितंबर 2024 को पीआईसी के संबंध में जानकारी मांगी थी। तब तत्कालीन सीएमओ ने अपने पत्र क्रमांक 192/2024 के माध्यम से लिखित में दिया था कि पीआईसी क्रियाशील (एक्टिव) नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है कि जो पीआईसी निष्क्रिय थी, वह अचानक फिर से कैसे काम करने लगी?

​2 साल से बजट में 'खेल' का आरोप:

पार्षदों का साफ कहना है कि पिछले दो वर्षों से पीआईसी के भीतर ही गुपचुप तरीके से बजट पारित किया जा रहा है। आय-व्यय की कोई भी जानकारी पार्षदों के सामने नहीं रखी जा रही है, जो परिषद की एक बड़ी वित्तीय अनियमितता को दर्शाता है। नियमविरुद्ध तरीके से हो रहे इस संचालन ने अध्यक्ष और सीएमओ की कार्यशैली को संदेह के घेरे में ला दिया है।
​जिम्मेदार अधिकारियों ने साधी चुप्पी इस गंभीर मामले को लेकर जब उच्च अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उनकी तरफ से कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला, ​राजीव निगम (संभागायुक्त, डूडा): फोन पर चर्चा करने और जानकारी मांगने पर उन्होंने "बाद में बात करता हूँ" कहकर फोन काट दिया। ​स्मिता रावल (परियोजना अधिकारी): इन्होंने पार्षदों के इस विरोध और आरोपों के मामले में फोन अटेंड करना ही मुनासिब नहीं समझा। ​"पीआईसी में सदस्यों को जोड़ने और हटाने का सर्वाधिकार अध्यक्ष के पास ही होता है। पार्षदों द्वारा जो आपत्ति ली गई है,उसके निराकरण और मार्गदर्शन के लिए मैं वरिष्ठ अधिकारियों से परामर्श करूँगा।

रिपोर्टर - साजिद पठान 

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