मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान में लापरवाही

देवास : मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान के तहत आयोजित शिविरों और क्षेत्रीय भ्रमण में उदासीनता बरतने वाले अधिकारियों पर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। देवास कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने दायित्वों में लापरवाही और वरिष्ठ कार्यालय के निर्देशों की अवहेलना करने पर जिला शिक्षा अधिकारी सहित 10 जिला स्तरीय अधिकारियों को कारण बताओ (शोकॉज) नोटिस जारी किए हैं।

​कलेक्टर के इस कड़े कदम से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। सभी संबंधित अधिकारियों से 3 दिन के भीतर जवाब मांगा गया है।
​इन अधिकारियों पर गिरी गाज
​शोकॉज नोटिस पाने वाले प्रमुख जिला अधिकारियों में शामिल हैं:
​राजीव सूर्यवंशी (जिला शिक्षा अधिकारी)
​ विवेक कुमार गुप्ता (कार्यपालन यंत्री, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग)
​ए.के. श्रीवास्तव (अनुविभागीय अधिकारी, वन विभाग)
​श्रीमती लीला रायकवार (जिला योजना अधिकारी)
​ रतन सिंह अनारे (प्राचार्य, उच्च शिक्षा विभाग)
​शिव नंदन तिवारी (वाणिज्यिक कर अधिकारी)
​ दीपक दास (जिला अक्षय ऊर्जा अधिकारी)
​ शैलेन्द्र अत्रे (सहायक संचालक, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग)
​ रतनसिंह डावर (जिला उद्यम अधिकारी)
​श्री राजेश उईके (जिला कौशल विकास अधिकारी/प्राचार्य, तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग)
​श्रीमती स्नेहा गाडरिया (जिला खेल और युवा कल्याण अधिकारी)
​क्यों हुई कार्रवाई?
​अभियान में उदासीनता: गत 26 सितंबर 2026 को सोनकच्छ विकासखंड के भौरासा में मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान के अंतर्गत जनसंवाद एवं शिविर का आयोजन किया गया था।
​निर्देशों की अवहेलना: शासन और जिला प्रशासन के स्पष्ट निर्देश थे कि सभी जिला अधिकारी क्षेत्र का भ्रमण कर जनसंवाद करें और अपने विभागों से जुड़ी योजनाओं व संस्थानों का सघन निरीक्षण करें। साप्ताहिक बैठकों में भी इसकी हिदायत दी गई थी।
​जानकारी छिपाना: इसके बावजूद इन अधिकारियों ने न तो शिविर में अपनी प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की और न ही कलेक्टर कार्यालय को इसकी अद्यतन जानकारी भेजी।
​3 दिन में देना होगा जवाब
​कलेक्टर श्री ऋतु राज सिंह ने इस कृत्य को पदीय कर्तव्यों के प्रति घोर लापरवाही, अनुशासनहीनता और मध्य प्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम-1965 के नियम-3 का स्पष्ट उल्लंघन माना है।
​कार्रवाई की चेतावनी: सभी संबंधित अधिकारियों को नोटिस मिलने के 3 दिनों के भीतर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपनी वास्तविक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। निर्धारित समय-सीमा में संतोषजनक जवाब न मिलने पर प्रशासन द्वारा एकपक्षीय अनुशासनात्मक और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

रिपोर्टर : साजिद पठान

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