हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति से ऐतिहासिक बना भगोरिया मेला

नालछा : फागुन की मादक बयार और महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर ग्राम भिल बरखेड़ा स्थित बरखेड़ा धाम में पारंपरिक भगोरिया मेले के साथ नालछा ब्लॉक में भगोरिया महापर्व का विधिवत एवं भव्य शुभारंभ हुआ। ढोल-मांदल की गूंजती थाप, बांसुरी की मधुर तान और कुर्राटियों की करतल ध्वनि ने पूरे वनांचल को उत्सव की रंगत में सराबोर कर दिया। सुबह से ही श्रद्धालुओं का धाम की ओर उमड़ने लगा, जो दोपहर तक जनसैलाब में बदल गया। पारंपरिक और आधुनिक वेशभूषा में सजे युवक-युवतियां गोल घेरा बनाकर सामूहिक नृत्य करते नजर आए। रंग, उमंग और लोकसंस्कृति का अद्भुत संगम पूरे आयोजन में दिखाई दिया।

क्षेत्र के 20 से अधिक ढोल-मांदल दलों ने अपनी विशिष्ट शैली में प्रस्तुति देकर भगोरिया मेले की शोभा बढ़ाई। अलग-अलग वेशभूषा और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ पहुंचे दलों ने वातावरण को जीवंत और ऊर्जावान बना दिया। हर थाप के साथ मानो फागुन की मस्ती और भी गहराती चली गई।
परम पूज्य ब्रह्मलीन संत श्री श्री 1008 श्री सर्वेश्वर दास जी महाराज के कृपापात्र शिष्य श्री श्री 1008 श्री प्रेमदास जी महाराज (नीतू बाबा) के सानिध्य में प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी शिवरात्रि पर भगोरिया पर्व का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर गुरुदेव श्री प्रेमदास जी महाराज ने ढोल-मांदल दलों के समाजजनों का तिलक लगाकर, पुष्पमाला पहनाकर, साफा बांधकर तथा ब्रह्मलीन संत श्री सर्वेश्वर दास जी महाराज की प्रतिमा एवं श्रीफल भेंट कर, नगद राशि के साथ सम्मान किया।
भगोरिया मेले में आसपास के गांवों से हजारों ग्रामीणजन सम्मिलित हुए। मंदिर परिसर से लेकर मेले के मैदान तक श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही। जलेबी, भजिए, पानी पुरी, मटका कुल्फी, बर्फ के गोले, आइसक्रीम एवं शीतल पेय की दुकानों पर दिनभर रौनक बनी रही। रंग-बिरंगे गुब्बारों और खिलौनों की दुकानों ने बच्चों का मन मोह लिया, वहीं साप्ताहिक हाट बाजार में भी विशेष उत्साह देखा गया।
श्रद्धालुजन भगवान के दर्शन कर खिचड़ी प्रसादी का लाभ लेते रहे। इस भव्य आयोजन ने न केवल लोकसंस्कृति की समृद्ध परंपरा को जीवंत किया, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक गौरव का संदेश भी दिया। फागुन की मस्ती और आस्था के इस संगम ने नालछा क्षेत्र को उत्सवधर्मी ऊर्जा से भर दिया।

रिपोर्टर : अशोक मिरदवाल

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