काकड़ाखो मेहंदीखेड़ी सुलिबयडी में माँ शबरी जन्मोत्सव पर उमड़ा जनसैलाब

धार-  आदिवासी आस्था, संस्कृति और परंपरा के प्रतीक माँ शबरी का जन्मोत्सव इस वर्ष काकड़ाखो स्थित शबरी धाम मेहंदीखेड़ी में अभूतपूर्व उत्साह और भक्ति भाव के साथ मनाया गया। हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया। पूरे क्षेत्र में श्रद्धा, उत्साह और भक्ति का वातावरण देखने को मिला।
 शिव घाट बड़ी पुलिया से निकला भव्य चल समारोह
जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में विशाल चल समारोह शिव घाट बड़ी पुलिया से प्रारंभ हुआ। शोभायात्रा सदर बाजार और टावर चौराहा होते हुए शबरी धाम पहुँची। मार्ग में जगह-जगह मंच बनाकर श्रद्धालुओं द्वारा पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया। ढोल-ताशों, भगवा ध्वजों और “जय माँ शबरी” के जयकारों से पूरा वातावरण गूंज उठा। नालछा एवं आसपास के क्षेत्रीय ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर चल समारोह को सफल बनाया।
शबरी धाम में विधि-विधान से पूजा-अर्चना
शोभायात्रा के शबरी धाम पहुँचने पर माँ शबरी की विधिवत पूजा-अर्चना की गई। श्रद्धालुओं ने क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति और सामाजिक एकता की कामना की। पूरा परिसर भक्तिमय माहौल से सराबोर रहा।
इस अवसर पर आकाशवाणी के सुप्रसिद्ध भजन गायक तारा सिंह डोडवे ने भजनों की भावपूर्ण प्रस्तुति दी। उनके भजनों पर श्रद्धालु देर तक झूमते रहे और भक्ति रस में डूबे नजर आए।
 आदिवासी नृत्य दल की प्रस्तुतियां
कार्यक्रम में आदिवासी नृत्य दल के युवकों द्वारा पारंपरिक वेशभूषा में आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं। पारंपरिक ढोल और मांदल की थाप पर प्रस्तुत नृत्य ने दर्शकों का मन मोह लिया और आदिवासी संस्कृति की समृद्ध विरासत को जीवंत कर दिया।
बाल झांकियां बनी आकर्षण का केंद्र
नन्हे  नन्हे बच्चों को राम, लक्ष्मण, सीता एवं माँ शबरी के स्वरूप में सजाकर झांकियों में शामिल किया गया, जो पूरे आयोजन का मुख्य आकर्षण रहा। श्रद्धालुओं ने बच्चों का उत्साहवर्धन करते हुए तालियों और जयकारों से स्वागत किया।
विशाल भंडारा, हजारों ने ग्रहण किया प्रसाद
कार्यक्रम के समापन पर विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण की। पूरे आयोजन की व्यवस्था माँ शबरी समिति द्वारा सुव्यवस्थित ढंग से की गई। समिति ने प्रशासन, सहयोगकर्ताओं, दानदाताओं और क्षेत्रीय नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त किया।
यह आयोजन केवल धार्मिक कार्यक्रम ही नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की आस्था, एकता और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बनकर सामने


संवाददाता - अशोकमिरदवाल

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