आ रहीं हैं माता रानी , घटस्थापना में ये गलती ना करें

हिंदू धर्म में नवरात्रि केवल एक पर्व नहीं, आत्मा की शक्ति से जुड़ने की वह प्रक्रिया है, जिसमें मनुष्य अपने भीतर की ऊर्जा को जागृत करता है। यह पर्व श्रद्धा, संयम और साधना का संगम है। नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना की जाती है, जो न केवल धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि देवी शक्ति के स्वागत का प्रतीक है। माना जाता है कि इस दिन विधिपूर्वक की गई पूजा पूरे नवरात्रि के पुण्य का फल देती है।

घटस्थापना का अर्थ है — देवी को आमंत्रित करना, उन्हें अपने घर और हृदय में विराजित करना। यह वह क्षण होता है जब श्रद्धालु देवी को साक्षात रूप में अनुभव करने के लिए तैयार होता है।

घटस्थापना: एक आध्यात्मिक प्रक्रिया

घटस्थापना केवल किसी पात्र में जल भरने या नारियल रखने का कार्य नहीं है, यह एक सजीव परंपरा है जो हमारे घर में शक्ति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश का द्वार खोलती है। शारदीय नवरात्रि में घटस्थापना का विशेष महत्व है। सही समय, पवित्र स्थान और शुद्ध मन से किया गया यह अनुष्ठान देवी को प्रसन्न करता है और परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है।

घटस्थापना की विधि: एक एक कदम, एक एक आस्था

1. शुभ मुहूर्त का चयन:
घटस्थापना हमेशा शुभ मुहूर्त में ही की जानी चाहिए। अमावस्या या संधि काल जैसे समय को टालना चाहिए, क्योंकि यह समय पूजा के लिए उपयुक्त नहीं माने जाते।

2. स्थान का चयन:
पूजा स्थल का चुनाव भी अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। घर की उत्तर-पूर्व दिशा, जिसे ईशान कोण कहा जाता है, घटस्थापना के लिए सबसे पवित्र और सकारात्मक ऊर्जा से युक्त मानी जाती है।

3. कलश की तैयारी:
कलश में स्वच्छ या गंगाजल भरें। इसमें पंचरत्न, सुपारी, सिक्का और आम के पत्ते डालें। ये प्रतीक होते हैं जीवन की विविध सम्पत्तियों और संतुलन के।

4. नारियल की स्थापना:
कलश के ऊपर एक साबुत नारियल रखें, जिसे लाल कपड़े या चुनरी में लपेटा गया हो। यह नारियल शक्ति और समर्पण का प्रतीक होता है।

5. जौ या गेहूं की बुआई:
मिट्टी से भरे एक पात्र में जौ बोएं और उसे घट के पास रखें। ये अंकुरण देवी की कृपा से उत्पन्न होने वाली नई ऊर्जा, उन्नति और समृद्धि का प्रतीक माने जाते हैं।

घटस्थापना में बरती जाने वाली सावधानियां

घटस्थापना करते समय कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि यही छोटी-छोटी बातें पूजा को पूर्ण बनाती हैं:

कलश और पूजन सामग्री पूर्णतः शुद्ध और पवित्र होनी चाहिए।

पूजा के समय घर में शांति, स्वच्छता और सात्विक वातावरण बनाए रखें।

एक बार घट स्थापित हो जाए, तो उसे कभी भी स्थानांतरित न करें।

नारियल को सही प्रकार से बांधें और उसके ऊपर देवी की चुनरी अवश्य रखें।

नौ दिनों तक अखंड दीपक जलाना अत्यंत शुभ माना जाता है, यह देवी की अखंड शक्ति का प्रतीक है।

नवरात्रि में सात्विक आहार लें और मन को नकारात्मक विचारों, क्रोध और लोभ से दूर रखें।

धार्मिक मान्यता: घटस्थापना का प्रभाव

ऐसा माना जाता है कि घटस्थापना से घर में देवी शक्ति का वास होता है। यह केवल धार्मिक विश्वास नहीं, बल्कि आत्मिक ऊर्जा का भी संचार है। जो व्यक्ति श्रद्धा और विधिपूर्वक घटस्थापना करता है, उसके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का स्थायी प्रवाह बना रहता है।

नवरात्रि के नौ दिनों में की गई पूजा, मंत्रजप और देवी स्तोत्रों का पाठ व्यक्ति के जीवन से बाधाएं दूर करता है, उसकी आंतरिक शक्ति को जागृत करता है और आत्मिक विकास का मार्ग प्रशस्त करता है।

समापन: श्रद्धा से ही शक्ति प्राप्त होती है

घटस्थापना केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि शक्ति की उपासना की शुरुआत है। यह एक संकल्प है कि हम अपने जीवन को अधिक पवित्र, अधिक जागरूक और अधिक सकारात्मक बनाएंगे। जब घट में जल नहीं, बल्कि श्रद्धा भर दी जाती है, तब वही घट देवी का आसन बन जाता है।

इसलिए इस नवरात्रि, घटस्थापना करें न केवल विधियों से, बल्कि पूरे मन, संकल्प और विश्वास के साथ। क्योंकि जब मन पवित्र होता है, तब देवी स्वयं आकर उसमें विराजती हैं।

नोट  - यह लेख धार्मिक आस्था, परंपरा और सामान्य जानकारी पर आधारित है। इसमें दी गई विधियाँ और मान्यताएँ शास्त्रीय ग्रंथों, लोक परंपराओं और आम मान्यताओं पर आधारित हैं। पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी धार्मिक अनुष्ठान को करने से पूर्व अपने व्यक्तिगत विश्वास, पारिवारिक परंपरा और स्थानीय पुरोहित या विद्वान की सलाह अवश्य लें।

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