पितृपक्ष 2026: जब मर्यादा पुरुषोत्तम राम ने भी किए थे पूर्वजों को समर्पित! जानिए हरिद्वार के इन चमत्कारी घाटों का रहस्य

 
क्या आपने कभी सोचा है कि जिस मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने पूरी दुनिया को धर्म और मर्यादा का पाठ पढ़ाया, उन्होंने अपने पितरों की मुक्ति के लिए पिंडदान कहां किया था? जब बात पूर्वजों को याद करने और उनके प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित करने की आती है, तो गया, काशी और प्रयागराज का नाम सबसे पहले जुबान पर आता है। लेकिन देवभूमि हरिद्वार की पावन गोद में छिपे हैं कुछ ऐसे ऐतिहासिक और रहस्यमयी घाट, जिनका सीधा नाता त्रेतायुग और भगवान श्रीराम से जुड़ा है!
 
साल 2026 में पितृपक्ष की शुरुआत 26 सितंबर (शनिवार) से होने जा रही है और इसका समापन 10 अक्टूबर (शनिवार) को सर्वपितृ अमावस्या पर होगा। इस पवित्र पखवाड़े से पहले आइए जानते हैं हरिद्वार के उन खास घाटों की अनकही दास्तान, जहां खुद भगवान राम ने अपने पितरों का तर्पण किया था।
 
1. कुशावर्त घाट: जहां श्रीराम ने किया था राजा दशरथ का पिंडदान
हरिद्वार की हर की पौड़ी की चकाचौंध से इतर, जब आप कुशावर्त घाट की सीढ़ियों पर कदम रखते हैं, तो यहां का सन्नाटा और गंगा की कल-कल धारा सीधे इतिहास के पन्नों में खींच ले जाती है।
 
पौराणिक कनेक्शन: मान्यताओं के अनुसार, त्रेतायुग में भगवान श्रीराम ने अपने पिता महाराज दशरथ और अन्य पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए इसी पवित्र घाट पर पिंडदान और तर्पण किया था।
 
श्रद्धालुओं की आस्था: यही वजह है कि आज भी पितृपक्ष के दौरान दूर-दूर से लोग अपने पितरों के मोक्ष की कामना लेकर इस घाट पर पहुंचते हैं। यहां गंगा तट पर किया गया अनुष्ठान सीधा पूर्वजों तक तृप्ति पहुंचाता है, ऐसा संतों और शास्त्रों का मत है।
 
2. राम घाट: रावण वध के बाद भगवान राम ने जहां की थी तपस्या
कुशावर्त घाट के अलावा हरिद्वार का राम घाट भी अपनी एक खास और रोमांचक पौराणिक कहानी समेटे हुए है।
 
ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्ति: कथाओं के अनुसार, रावण वध के बाद भगवान श्रीराम पर ब्रह्म हत्या का पाप आ गया था। इस दोष से मुक्ति पाने के लिए गुरु महर्षि वशिष्ठ ने उन्हें हरिद्वार जाने की सलाह दी थी।
 
तपस्या की भूमि: भगवान राम ने इसी राम घाट पर आकर कठिन तपस्या और अनुष्ठान किया था। इस ऐतिहासिक महत्व के कारण पितृपक्ष में इस घाट पर तर्पण और पूजा-पाठ करना बेहद फलदायी माना जाता है।
 
पितृपक्ष में हरिद्वार में कहां-कहां कर सकते हैं पिंडदान?
 
यदि आप इस बार पितृपक्ष (26 सितंबर से 10 अक्टूबर 2026) में हरिद्वार जाने का मन बना रहे हैं, तो इन प्रमुख स्थानों को अपनी सूची में जरूर शामिल करें:
 
कुशावर्त घाट: भगवान राम द्वारा पिंडदान किए जाने के कारण पितृ कर्म के लिए सर्वोपरि।
 
नारायणी शिला मंदिर: पितृ दोष मुक्ति और श्राद्ध कर्म के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध।
 
हर की पौड़ी: मां गंगा के सान्निध्य में तर्पण और महाआरती का अद्भुत संगम।
 
पितृपक्ष सिर्फ कर्मकांड का नाम नहीं है, यह अपनी जड़ों और पूर्वजों के प्रति आभार जताने का पर्व है। जब खुद भगवान राम ने अपने पुरखों के लिए मोक्ष की कामना से इन घाटों पर अनुष्ठान किया था, तो इन पावन स्थलों की ऊर्जा आज भी श्रद्धालुओं को एक अलग ही आध्यात्मिक शांति का अहसास कराती है। इस बार पितृपक्ष में अपने पितरों के आशीर्वाद के लिए हरिद्वार के इन पौराणिक घाटों की यात्रा जरूर प्लान करें!

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