सोमनाथ अमृत महोत्सव 2026: 75 साल बाद इतिहास का साक्षी बना सोमनाथ, पहली बार 11 तीर्थों के जल से हुआ कुंभाभिषेक
गुजरात स्थित Somnath Temple में सोमनाथ अमृत महोत्सव 2026 के दौरान एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक पल देखने को मिला. भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम माने जाने वाले इस पवित्र धाम के 90 मीटर ऊंचे शिखर पर पहली बार 11 तीर्थों के पवित्र जल से कुंभाभिषेक किया गया. इस भव्य अनुष्ठान में प्रधानमंत्री Narendra Modi भी शामिल हुए। मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा और पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित यह समारोह सनातन परंपरा का अद्भुत संगम बना.
क्या है कुंभाभिषेक?

‘कुंभाभिषेक’ दो शब्दों से मिलकर बना है— ‘कुंभ’ यानी कलश और ‘अभिषेक’ यानी पवित्र स्नान. वैदिक अनुष्ठानों के बाद अभिमंत्रित जल को मंदिर के शिखर, कलश और देव विग्रहों पर चढ़ाने की प्रक्रिया को कुंभाभिषेक कहा जाता है. इसे मंदिर को पुनः जीवित करने और उसकी दिव्य ऊर्जा को जागृत करने का प्रतीक माना जाता है.
सनातन मान्यताओं के अनुसार यह केवल पूजा नहीं, बल्कि कई दिनों तक चलने वाला वैदिक अनुष्ठान होता है। इसमें यज्ञ, हवन, रुद्र पाठ, मंत्रोच्चार और अग्नि अनुष्ठानों के माध्यम से जल को आध्यात्मिक ऊर्जा से संपन्न किया जाता है. आगम शास्त्रों के अनुसार अधिकांश मंदिरों में हर 12 वर्षों में पुनः कुंभाभिषेक किया जाता है.
कैसे होता है कुंभाभिषेक?
इस विशेष अनुष्ठान के लिए सबसे पहले मंदिर परिसर में यज्ञशाला बनाई जाती है, जिसे धार्मिक ऊर्जा का केंद्र माना जाता है. वेदपाठी ब्राह्मण कई दिनों तक रुद्र पाठ, हवन, अग्नि अनुष्ठान और वैदिक मंत्रोच्चार करते हैं.
इस दौरान 51 वैदिक ब्राह्मणों द्वारा अति रुद्र पाठ किया गया, जबकि महा रुद्र यज्ञ में लगभग 1.25 लाख आहुतियां दी गईं. सैकड़ों कलशों में गंगाजल और विभिन्न तीर्थों एवं पवित्र नदियों का जल भरकर उन्हें विशेष मंत्रों से अभिमंत्रित किया गया.
इसके बाद मंदिर की देव प्रतिमाओं और गर्भगृह की विशेष पूजा एवं शुद्धि की गई. यदि नई प्रतिमाएं स्थापित होती हैं तो उनमें ‘प्राण प्रतिष्ठा’ की जाती है. मूर्ति निर्माण का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण चरण ‘नेत्र उन्मीलनम्’ माना जाता है, जिसमें देव प्रतिमा की आंखों को पूर्ण रूप दिया जाता है. मान्यता है कि इसी क्षण से मूर्ति में चेतना जागृत होती है.
अंत में अभिमंत्रित जल को मंदिर के शिखर, कलश और देव विग्रहों पर चढ़ाया जाता है.इसी प्रक्रिया को कुंभाभिषेक कहा जाता है. अनुष्ठान पूर्ण होने के बाद मंदिर के द्वार श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाते हैं.
कुंभाभिषेक का ऐतिहासिक महत्व

कुंभाभिषेक की परंपरा दक्षिण भारत के प्राचीन मंदिरों, विशेषकर तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में अत्यंत प्रसिद्ध रही है. हालांकि, Somnath Temple के शिखर पर इस प्रकार का कुंभाभिषेक पहली बार हुआ, जिसने इसे ऐतिहासिक बना दिया.
धार्मिक विशेषज्ञों के अनुसार मंदिर केवल पत्थरों की संरचना नहीं होते, बल्कि उनमें वैदिक मंत्रों और देव विग्रहों के माध्यम से दिव्य ऊर्जा का संचार होता है. कुंभाभिषेक उसी ऊर्जा को पुनः सक्रिय करने की प्रक्रिया मानी जाती है.
क्यों खास है सोमनाथ अमृत महोत्सव 2026?
सोमनाथ मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा और पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित ‘सोमनाथ अमृत पर्व’ पूरे देश के लिए आस्था और संस्कृति का महोत्सव बन गया. देशभर से हजारों श्रद्धालु इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनने सोमनाथ पहुंचे. 11 तीर्थों के पवित्र जल से हुआ यह कुंभाभिषेक न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि भारतीय सनातन परंपरा की आध्यात्मिक शक्ति और सांस्कृतिक विरासत का भी भव्य प्रतीक बन गया.

No Previous Comments found.