बड़ा मंगल 2026: भंडारे की परंपरा, मुस्लिम नवाब की हनुमान भक्ति से जुड़ी रोचक कथा

ज्येष्ठ महीने के मंगलवार को “बड़ा मंगल” या “बुढ़वा मंगल” कहा जाता है, जिसे भगवान हनुमान की पूजा के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है. 12 मई 2026 को ज्येष्ठ का दूसरा बड़ा मंगलवार पड़ रहा है. इस दिन देशभर के हनुमान मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है, व्रत, पूजा-अर्चना और भंडारों का विशेष आयोजन किया जाता है.

भंडारे की परंपरा और धार्मिक महत्व

बड़ा मंगल पर भंडारा कराने की परंपरा का विशेष महत्व है. भक्त बूंदी, ठंडी शरबत, पूड़ी-सब्जी, चना और हलवे का प्रसाद वितरित करते हैं. मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से भंडारा कराने पर जीवन के संकट दूर होते हैं, शनि और मंगल दोष शांत होते हैं और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है.

 ऐतिहासिक कथा: मुस्लिम नवाब और हनुमान भक्ति

इस परंपरा की शुरुआत करीब 400 साल पहले मानी जाती है, जब अवध के नवाब मोहम्मद अली शाह और उनकी बेगम आलिया की कहानी सामने आई. कहा जाता है कि दोनों को संतान सुख नहीं मिल रहा था. लंबे प्रयासों के बाद उन्हें पुत्र प्राप्त हुआ, लेकिन एक समय बच्चा गंभीर रूप से बीमार पड़ गया.

कई इलाजों के बाद भी सुधार न होने पर सलाह दी गई कि बेगम अपने पुत्र को अलीगढ़ स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर ले जाएं। वहां जाकर उन्होंने भगवान हनुमान से प्रार्थना की और धीरे-धीरे बच्चे की तबीयत में सुधार होने लगा. इसके बाद नवाब और बेगम ने हनुमान जी को अपना रक्षक माना और मंदिर का जीर्णोद्धार भी कराया.

बड़ा मंगल की शुरुआत कैसे हुई

संतान प्राप्ति और संकट से मुक्ति की खुशी में बेगम आलिया ने लखनऊ में ज्येष्ठ मंगलवार के दिन भंडारा कराया.नवाब के परिवार द्वारा मंगलवार को भंडारे की शुरुआत होने के कारण यह दिन “बड़ा मंगल” के नाम से प्रसिद्ध हो गया.


 धार्मिक मान्यताएं और लाभ

मान्यता है कि बड़ा मंगल पर भंडारा करने से—

  •  शनि और मंगल दोष शांत होते हैं
  •  जीवन की बाधाएं दूर होती हैं
  •  धन, सुख और समृद्धि बढ़ती है
  •  नकारात्मक ऊर्जा और रोगों से मुक्ति मिलती है
  • हनुमान जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है

बड़ा मंगल सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि सेवा, दान और भक्ति का प्रतीक है. Lord Hanuman की कृपा पाने के लिए इस दिन भंडारा और दान-पुण्य का विशेष महत्व माना जाता है. मुस्लिम नवाब की ऐतिहासिक कथा इस पर्व को और भी रोचक और सांप्रदायिक सौहार्द से जोड़ती है, जो आज भी लोगों को सेवा और भक्ति की प्रेरणा देती है.

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