इस्तीफे के बाद संसद पहुंचे धर्मेंद्र प्रधान! मकर द्वार पर BJP ने किया जोरदार स्वागत

NEET पेपर लीक मामले में दो दिन पहले ही इस्तीफा देने वाले पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान जब आज सोमवार को संसद परिसर पहुँचे, तो संसद का मकर द्वार किसी रणक्षेत्र से कम नजर नहीं आया! एनडीए के सांसदों की पूरी फौज मकर द्वार पर पलके बिछाकर खड़ी थी। जैसे ही धर्मेंद्र प्रधान पहुँचे, ढोल-नगाड़ों की गूँज के बीच 'धर्मेंद्र प्रधान जिंदाबाद' के नारे लगे, उन्हें सम्मान की 'पाग' पहनाई गई और पूरे मान-सम्मान के साथ सदन के अंदर ले जाया गया! 

दरअसल, एनडीए यह साबित करने पर तुला है कि प्रधान ने किसी दबाव में नहीं, बल्कि छात्रों के हित में अपनी अंतरात्मा की आवाज पर स्वेच्छा से इस्तीफा दिया है और पूरी पार्टी उनके पीछे चट्टान की तरह खड़ी है! लेकिन दूसरी तरफ! मकर द्वार पर ही जमा विपक्ष ने इस स्वागत को देखते ही अपने तरकश से तीखे तीर चला दिए! प्रियंका गांधी वाड्रा के नेतृत्व में विपक्षी सांसदों ने प्लेकार्ड लहराते हुए 'शिक्षा चोरी' और 'पुलिस बर्बरता' के गगनभेदी नारे लगा दिए! 

वहीं संसद के दोनों सदन लोकसभा और राज्यसभा राजनीतिक युद्ध का मैदान बन गए, जिसके चलते कार्यवाही को 12 बजे तक स्थगित करना पड़ा!  लोगों का कहना है कि संसद के दरवाजे पर किया गया यह भव्य स्वागत दरअसल बीजेपी का एक सोची-समझा डैमेज कंट्रोल था। सरकार यह कड़ा संदेश देना चाहती है कि धर्मेंद्र प्रधान को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बर्खास्त नहीं किया है और न ही उनसे जबरन इस्तीफा मांगा गया है। बल्कि, उन्होंने खुद युवाओं के नाम पत्र लिखकर स्वेच्छा से यह फैसला लिया ताकि देशद्रोही और अराजक ताकतें छात्रों के आंदोलन का गलत फायदा न उठा सकें। 

यही वजह है कि इस्तीफा देते ही देश के गृह मंत्री अमित शाह, पीयूष गोयल, जेपी नड्डा, जितेंद्र सिंह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता और बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन समेत कई दिग्गज नेता सीधे धर्मेंद्र प्रधान के घर पहुँचे थे। सभी नेताओं ने इस फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए साफ किया था कि प्रधान ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए खुद पद छोड़ा है और संगठन पूरी तरह उनके साथ खड़ा है। 

तो देखा आपने! एक तरफ सरकार धर्मेंद्र प्रधान को त्याग की मूरत और नैतिकता का प्रतीक बनाकर पेश कर रही है, ताकि पार्टी की साख और मंत्री की छवि पर कोई आंच न आए...तो दूसरी तरफ विपक्ष इसे गुनहगारों का बचाव बताकर सरकार को हर मोर्चे पर घेर रहा है! अब देखना यह होगा कि क्या बिल पास कराकर सरकार देश के करोड़ों छात्रों का भरोसा वापस जीत पाएगी, या फिर संसद में भड़का यह सियासी तूफान मानसून सत्र के पूरे एजेंडे को बहा ले जाएगा?

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