क्या डायबिटीज की दवा कभी बंद हो सकती है? जानिए पूरा सच

डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है जो जीवनभर अनुशासन और सावधानी की मांग करती है. रोज़ाना ब्लड शुगर की जांच, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और समय पर दवा लेना ये सब इसके प्रबंधन का हिस्सा हैं. कई बार जब शुगर लेवल सामान्य दिखने लगता है तो लोग यह सोचकर दवा बंद कर देते हैं कि अब बीमारी ठीक हो गई है। कुछ लोग साइड इफेक्ट के डर से या हर्बल इलाज के भरोसे भी दवा छोड़ देते हैं। लेकिन क्या यह सही है? आइए समझते हैं सच.

दवा अचानक बंद करना क्यों खतरनाक है?

डायबिटीज एक क्रॉनिक यानी लंबी अवधि की बीमारी है. अगर शुगर लेवल सामान्य है, तो अक्सर इसका मतलब होता है कि दवा सही तरीके से काम कर रही है. दवा बंद करते ही ब्लड शुगर तेजी से बढ़ सकता है, जिसे हाइपरग्लाइसीमिया कहा जाता है.

इसके सामान्य लक्षण हैं:

  • अत्यधिक प्यास लगना
  • बार-बार पेशाब आना
  • धुंधला दिखाई देना
  • कमजोरी और चक्कर
  • घाव का देर से भरना
  • हाथ-पैरों में झनझनाहट

यदि समय पर ध्यान न दिया जाए तो स्थिति गंभीर हो सकती है. टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज में जोखिम

टाइप 1 डायबिटीज..

टाइप 1 डायबिटीज में इंसुलिन जीवनरक्षक दवा है. इसे अचानक बंद करने से डायबिटिक कीटोएसिडोसिस (DKA) हो सकता है. इस स्थिति में शरीर ग्लूकोज की जगह फैट जलाने लगता है और खून में कीटोन बढ़ जाते हैं.इसके लक्षण हैं:

  • तेज सांस चलना
  • उल्टी और पेट दर्द
  • सांस से मीठी गंध
  • भ्रम या अत्यधिक थकान

समय पर इलाज न मिलने पर यह कोमा या मृत्यु का कारण बन सकता है.

टाइप 2 डायबिटीज...

टाइप 2 डायबिटीज में भी दवा अनियमित रूप से लेना नुकसानदेह है.शुगर का बार-बार बढ़ना और गिरना शरीर के अंगों को प्रभावित करता है. लंबे समय तक अनियंत्रित शुगर किडनी फेल्योर, नसों की क्षति, आंखों की रोशनी कम होना, हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ा सकता है.

क्या कभी दवा कम या बंद हो सकती है?

कुछ मामलों में, खासकर टाइप 2 डायबिटीज के शुरुआती चरण में, वजन कम करने, संतुलित आहार और नियमित व्यायाम से दवा की जरूरत कम हो सकती है. यदि HbA1c लंबे समय तक नियंत्रित रहे, तो डॉक्टर दवा की मात्रा घटाने पर विचार कर सकते हैं.लेकिन यह फैसला केवल डॉक्टर की निगरानी में ही होना चाहिए। खुद से दवा बंद करना खतरनाक हो सकता है. डायबिटीज को नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन लापरवाही गंभीर परिणाम दे सकती है. यदि आप दवा में कोई बदलाव करना चाहते हैं, तो पहले अपने डॉक्टर से सलाह लें. नियमित जांच, संतुलित जीवनशैली और अनुशासित दवा सेवन ही सुरक्षित और स्वस्थ जीवन की कुंजी है.

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