किसानों की किस्मत बदल देगा डीज़ल का पौधा, जानिए कैसे की जाती है खेती
डीज़ल का पौधा यानी Jatropha Plant अब किसानों के लिए नई उम्मीद बन गया है। यह पौधा न सिर्फ कम पानी में उगता है बल्कि इसके बीजों से बायो-डीज़ल भी तैयार किया जा सकता है। बायो-डीज़ल न केवल पर्यावरण के लिए अच्छा है, बल्कि किसानों के लिए आय का नया जरिया भी बन सकता है।
डीज़ल का पौधा क्या है?
डीज़ल का पौधा एक सुख सहनशील और तेलयुक्त बीज वाला पौधा है। इसके बीजों में तेल की मात्रा बहुत अधिक होती है। इसे भारत के लगभग सभी सूखा-सहिष्णु क्षेत्रों में उगाया जा सकता है।
इसकी खेती कैसे की जाती है?
भूमि का चयन:
यह पौधा हल्की और अच्छी जल निकासी वाली भूमि में अच्छी तरह उगता है।
ज्यादा उपज के लिए खेत की मिट्टी को हल्का अम्लीय (pH 6-7) रखना बेहतर होता है।
बीज या पौधे लगाना:
बीज को सीधे खेत में या नर्सरी में बोकर फिर रोपण किया जा सकता है।
बीज बोने से पहले 24 घंटे पानी में भिगोना फायदेमंद रहता है।
सिंचाई और देखभाल:
शुरुआती दिनों में नियमित पानी देना जरूरी है।
पौधा 1-2 साल में पूरी तरह विकसित होता है और फिर कम पानी में भी फल देता है।
कटाई और तेल निकालना:
पौधे के बीज 3-4 साल में पूरी तरह से तैयार होते हैं।
बीजों को सुखाकर प्रेस मशीन के माध्यम से तेल निकाला जाता है। यह तेल बायो-डीज़ल के रूप में उपयोग होता है।
फायदे
यह पौधा कम खर्च और कम पानी में अधिक उत्पादन देता है।
किसानों के लिए नियमित आय का स्रोत बन सकता है।
पर्यावरण के लिए यह सस्टेनेबल ईंधन का विकल्प है।
सुझाव
किसानों को सरकारी योजनाओं और सब्सिडी का लाभ उठाना चाहिए।
नर्सरी और बीज के लिए विश्वसनीय स्रोत का चुनाव करें।
बीज उत्पादन बढ़ाने के लिए नियमित रूप से कटाई और देखभाल करें।
डीज़ल का पौधा न केवल किसानों की आमदनी बढ़ा सकता है, बल्कि देश में हरित ऊर्जा के विकल्प को भी बढ़ावा देगा। अगर सही तरीके से खेती की जाए तो यह पौधा किसानों की किस्मत बदल सकता है।


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