डॉ. दिनेश शर्मा की नई पारी शुरू, अंडमान-निकोबार के उपराज्यपाल बने

 लखनऊ की गलियों से लेकर दिल्ली के पावर कॉरिडोर तक, और अब सीधा समंदर पार अंडमान-निकोबार के राजभवन तक! भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता, राज्यसभा सांसद और उत्तर प्रदेश के पूर्व डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा का सियासी सफरनामा अब एक बिल्कुल नए और सबसे रोमांचक मोड़ पर पहुंच गया है. राष्ट्रपति भवन से देर रात जारी हुक्मनामे ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है, जी हां डॉ. दिनेश शर्मा को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का नया उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है. खास बात ये है कि डॉ. दिनेश शर्मा अभी राज्यसभा सांसद हैं और उनका कार्यकाल नवंबर 2026 में पूरा होना था। लेकिन कार्यकाल पूरा होने से पहले ही उन्हें उपराज्यपाल की जिम्मेदारी मिल गई है। यानी अब यूपी की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहे डॉ. शर्मा की भूमिका बदलने जा रही है। आज हम आपको बताएंगे कि आखिर कौन हैं डॉ. दिनेश शर्मा...कैसा रहा उनका राजनीतिक सफर...बीजेपी संगठन में उनका कद कैसे बढ़ा...योगी सरकार में उन्हें कौन-कौन से बड़े विभाग मिले...और अब अंडमान-निकोबार जैसे केंद्र शासित प्रदेश की जिम्मेदारी मिलने के क्या मायने हैं। आइए...शुरू से समझते हैं डॉ. दिनेश शर्मा की पूरी कहानी।

12 जनवरी 1964 को लखनऊ में जन्मे दिनेश शर्मा का अंदाज हमेशा से थोड़ा अलग रहा है. उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से पढ़ाई की और फिर वहीं वाणिज्य विभाग में प्रोफेसर बनकर छात्रों को पढ़ाया. लेकिन उनके अंदर का राजनेता कभी शांत नहीं बैठा. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और एबीवीपी से राजनीतिक ककहरा सीखने वाले डॉ. शर्मा जल्द ही भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष बने. असली चुनावी करिश्मा तब दिखा जब साल 2006 में वे लखनऊ के मेयर चुने गए. इसके बाद 2012 में उन्होंने दोबारा ऐतिहासिक जीत दर्ज की. लगभग एक दशक तक लखनऊ की कप्तानी करने वाले दिनेश शर्मा ने विरोधियों के दिल में भी जगह बनाई. उनकी इस सादगी और बेदाग छवि का ही नतीजा था कि 2012 के चुनाव में उनके खिलाफ लड़े विरोधी प्रत्याशी भी उनकी सज्जनता की कसम खाते हैं. आपको बता दें संगठन में डॉ. शर्मा की पकड़ इतनी मजबूत थी कि 2014 में पार्टी ने उन्हें बीजेपी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बना दिया. यही नहीं, उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृह राज्य गुजरात का प्रभारी भी बनाया गया और ऐतिहासिक राष्ट्रीय सदस्यता अभियान की जिम्मेदारी सौंपी गई.

फिर आया साल 2017! यूपी में बीजेपी की प्रचंड जीत के बाद जब योगी आदित्यनाथ की सरकार बनी, तो डॉ. दिनेश शर्मा को प्रदेश का उप-मुख्यमंत्री बनाया गया. उनके कंधों पर माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा, विज्ञान-प्रौद्योगिकी और आईटी जैसे भारी-भरकम मंत्रालयों का जिम्मा था. उन्होंने बिना किसी शोर-शराबे के पांच साल तक सरकार का काम निपटाया और विधान परिषद के नेता सदन के रूप में भी अपनी उपयोगिता साबित की. फिर 2023 में बीजेपी ने उन्हें यूपी से राज्यसभा भेजा, जहां उनका कार्यकाल नवंबर 2026 तक था. संसद में भी ‘प्रोफेसर साहब’ ने अपना होमवर्क पूरा रखा. कार्यकाल खत्म होने से ठीक पहले उन्हें उपराज्यपाल की कुर्सी सौंपना यह दिखाता है कि बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व का उन पर कितना अटूट विश्वास है.

जाहिर है लखनऊ की छांव, बनारस की सियासी गर्मी और दिल्ली की चमक-धमक देख चुके डॉ. दिनेश शर्मा अब एक नई भूमिका में नजर आएंगे. केंद्र शासित प्रदेश के मुखिया के तौर पर उनका यह प्रशासनिक अवतार कितना दमदार रहता है, इस पर पूरे देश की निगाहें टिकी रहेंगी. एक जमीनी कार्यकर्ता से उपराज्यपाल के पद तक पहुंचने का यह सफर उन तमाम नेताओं के लिए मिसाल है, जो बिना विवादों में पड़े खामोशी से अपना काम करते हैं. फिलहाल इतना तय है कि लखनऊ से निकला ये सियासी सफर अब समंदर के पार एक नई जिम्मेदारी की ओर बढ़ चुका है।

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