सिर्फ कानून नहीं, सोच बदलनी होगी: दहेज रूपी इस सामाजिक कैंसर का इलाज कब?
हम आज 21वीं सदी के आधुनिक भारत में जी रहे हैं। चांद-सूरज तक पहुंचने की बातें होती हैं, देश की तरक्की के बड़े-बड़े आंकड़े दिखाए जाते हैं और खुद को पढ़ा-लिखा कहने वाला समाज स्टेटस सिंबल का चश्मा पहनकर घूमता है। लेकिन इसी चमक-दमक के पीछे एक ऐसा कड़वा, घिनौना और खौफनाक सच छिपा है, जिसे देखकर किसी भी इंसान का सिर शर्म से झुक जाए! आज भी हमारे देश में शादियां दिल से नहीं, बल्कि दौलत के तराजू पर तौली जाती हैं। जैसे ही कोई बेटी ब्याह कर ससुराल जाती है, उसके साथ ही शुरू हो जाता है लालच का वो गंदा खेल, जो अक्सर उस मासूम की जान लेकर ही खत्म होता है। और वो है....दहेज...
जी हां, वही दहेज जिसे हम कागजों पर तो कुप्रथा कहते हैं, लेकिन असल जिंदगी में आज भी कई लालची परिवार इसके लिए कसाई बन जाते हैं। क्या नोएडा और क्या भोपाल...देश के बड़े-बड़े हाई-टेक शहरों से हाल ही में जो खबरें आई हैं, उसने पूरे देश की आत्मा को झकझोर कर रख दिया है। सीधे और साफ शब्दों में कहें तो किसी भी समाज को हम पढ़ा-लिखा या सभ्य तब मानेंगे, जब वह अपनी पुरानी और खराब आदतों को छोड़ दे। खासकर उन कुप्रथाओं को, जो न सिर्फ इंसानियत के खिलाफ हैं, बल्कि कानून की नजर में बहुत बड़ा जुर्म हैं। लेकिन दुख की बात यह है कि हमारे देश में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों को लेकर लोग बहुत लापरवाह हो चुके हैं। लोग देखकर भी अनदेखा कर देते हैं। देश में दहेज के खिलाफ बहुत सख्त कानून बने हैं, बड़े-बड़े सरकारी अभियान चलाए जाते हैं, फिर भी आए दिन बहुओं को प्रताड़ित करने और उन्हें मौत के घाट उतारने की खबरें आती रहती हैं। समझ नहीं आता कि जब देश इतनी तरक्की कर रहा है, तो लोगों की सोच इतनी पिछड़ी और लालची क्यों बनी हुई है? अभी हाल ही के दो मामलों ने इस दर्द को फिर से हरा कर दिया है।
आपको बता दें दिल्ली से सटे और बहुत ही आधुनिक माने जाने वाले शहर नोएडा से दीपिका नाम की महिला की मौत की खबर आई। दीपिका के घरवालों का साफ-साफ कहना है कि उन्होंने शादी में अपनी औकात से बढ़कर खूब पैसा खर्च किया था। लेकिन ससुराल वालों का पेट नहीं भरा। शादी के बाद भी वे बार-बार और पैसों की मांग कर रहे थे। जब दीपिका ने इसका विरोध किया या जब मांग पूरी नहीं हो पाई, तो उसकी हत्या कर दी गई। इतना ही नहीं, अपने को बचाने के लिए ससुराल वालों ने इस हत्या को आत्महत्या साबित करने की पूरी कोशिश की। वहीं ऐसा ही एक और दिल दहला देने वाला मामला भोपाल से सामने आया, जहाँ ट्विशा नाम की लड़की दहेज के इन भूखे भेड़ियों का शिकार हो गई। ट्विशा के माता-पिता ने भी शादी में सब कुछ दिया था, लेकिन शादी के बाद भी ससुराल वालों की फरमाइशें खत्म ही नहीं हो रही थीं। लगातार कीमती सामान और नकदी का दबाव बनाया जा रहा था। जब ट्विशा यह सब नहीं सह पाई, तो संदिग्ध परिस्थितियों में छत से गिरकर उसकी मौत हो गई। यहाँ भी अपराधियों ने कानून को धोखा देने के लिए पूरी साजिश रची। बहुत से लोग सोचते हैं कि दहेज जैसी रूढ़िवादी और खराब चीजें सिर्फ गांवों या अनपढ़ लोगों में होती हैं। लेकिन यह बहुत बड़ी गलतफहमी है। दिल्ली, नोएडा, भोपाल जैसे बड़े शहरों में रहने वाले, बड़ी-बड़ी डिग्रियां लेकर घूमने वाले और खुद को अमीर कहने वाले परिवारों के अंदर भी पैसों की ऐसी अंधी भूख है कि वो एक हंसती-खेलती लड़की की जिंदगी बर्बाद करने से भी नहीं हिचकते।
सरकारी आंकड़े बताते हैं कि अकेले साल 2022 में 6,516 महिलाओं की मौत सिर्फ और सिर्फ दहेज की वजह से हुई। इसका मतलब है कि हर एक दिन में करीब 18 बेटियां दहेज के लालच की वजह से मार दी गईं या उन्हें खुदकुशी करने पर मजबूर होना पड़ा। ऐसे में सिर्फ पुलिस, कोर्ट या कड़े कानून बनाने से यह बीमारी ठीक नहीं होगी। इसके लिए हमें और आपको अपनी सोच बदलनी होगी। जब तक शादियों को दिखावे और सौदेबाजी का बाजार बनाना बंद नहीं किया जाएगा, जब तक लड़कों की बोलियां लगनी बंद नहीं होंगी, तब तक ये लालची लोग बेटियों की जिंदगी से ऐसे ही खेलते रहेंगे। हमें कानून की कड़ाई के साथ-साथ समाज के इस लालची और बीमार चेहरे को भी बेनकाब करना होगा, तभी जाकर हमारी बेटियां सुरक्षित रह पाएंगी।

No Previous Comments found.