“दुधिया से डॉन तक: DP Yadav की कहानी, अपराध और राजनीति के बीच एक विवादित सफर”

पूर्वांचल के बाहुबलियों की चर्चा अक्सर सुर्खियों में रहती है, लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश की बात करें तो एक नाम लंबे समय तक चर्चा के केंद्र में रहा — DP Yadav।

एक ऐसा नाम, जिसे कभी शराब माफिया, कभी बाहुबली नेता और कभी प्रभावशाली राजनेता के रूप में देखा गया।


 शुरुआत: दूध बेचने से अपराध की दुनिया तक

धर्मपाल उर्फ डीपी यादव का जन्म गाजियाबाद जिले के शरफाबाद गांव में हुआ। शुरुआती जीवन में वे साइकिल से दूध बेचने का काम करते थे।
स्थानीय स्तर पर शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे अवैध शराब के कारोबार तक पहुंचा, जहां उन्होंने कथित तौर पर बड़े नेटवर्क से जुड़कर तेजी से आर्थिक और आपराधिक ताकत हासिल की।


 शराब कारोबार और विवाद

1990 के दशक में हरियाणा में जहरीली शराब कांड में सैकड़ों लोगों की मौत के मामले में उनका नाम सामने आया।
इस प्रकरण में जांच एजेंसियों द्वारा उनके खिलाफ कार्रवाई की गई और आरोपपत्र भी दाखिल हुआ।


 राजनीति में एंट्री

कानूनी दबाव और बढ़ती पहचान के बीच उन्होंने राजनीति का रास्ता चुना।
कांग्रेस से शुरुआत करने के बाद वे धीरे-धीरे समाजवादी राजनीति के संपर्क में आए और Mulayam Singh Yadav के करीब पहुंचे।
1989 में उन्हें बुलंदशहर से टिकट मिला और वे विधायक बने, बाद में मंत्री पद भी संभाला।


बदलते राजनीतिक रिश्ते

उनका राजनीतिक सफर लगातार दल बदल और नए समीकरणों से भरा रहा।

  • जनता पार्टी के साथ जुड़े
  • फिर समाजवादी पार्टी में वापसी
  • Mayawati की पार्टी बसपा में शामिल हुए
  • Bharatiya Janata Party के साथ भी जुड़े

गेस्ट हाउस कांड जैसे विवादों में नाम आने के बावजूद, विभिन्न दलों ने समय-समय पर उन्हें अपने साथ जोड़ा।


 खुद की पार्टी और चुनावी सफर

2007 में उन्होंने अपनी पार्टी “राष्ट्रीय परिवर्तन दल” बनाई।
कुछ समय बाद इस पार्टी का विलय बसपा में हुआ।
उन्होंने कई चुनाव लड़े — कुछ में जीत मिली, तो कई में हार का सामना करना पड़ा।

कानूनी मामले और जेल

डीपी यादव पर हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण और गैंगस्टर एक्ट सहित कई गंभीर मामलों में आरोप लगे।
2015 में एक हत्या मामले में उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई, हालांकि 2021 में अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में उन्हें बरी कर दिया।


जेल के बाद और वर्तमान स्थिति

जेल से बाहर आने के बाद उनका राजनीतिक प्रभाव पहले जैसा नहीं रहा, लेकिन उनका आर्थिक नेटवर्क आज भी चर्चा में रहता है।
बताया जाता है कि उन्होंने चीनी मिल, होटल, रियल एस्टेट, पावर प्रोजेक्ट और अन्य कारोबारों में निवेश किया है।


निष्कर्ष

डीपी यादव की कहानी केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की उस राजनीति का आईना है जहां अपराध और सत्ता का मेल लंबे समय तक चर्चा का विषय रहा।
उनका जीवन “शून्य से शिखर और फिर विवादों के बीच उतार” की एक मिसाल माना जाता है।

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