अब झुग्गी-झोपड़ी से आज़ादी! यूपी में सिर्फ ₹1000 किराए पर मिलेगा पक्का घर, मजदूरों के लिए बड़ी सौगात
उत्तर प्रदेश सरकार औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों के लिए एक नई “किफायती किराया आवास योजना” लागू करने की तैयारी में है। इसके तहत फैक्ट्रियों और औद्योगिक जमीन का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा मजदूरों के रहने के लिए आवास निर्माण में इस्तेमाल किया जाएगा।
इस योजना के अंतर्गत कामगारों को बेहद कम किराए पर घर उपलब्ध कराए जाएंगे, जो करीब 1000 से 1500 रुपये प्रति माह के बीच हो सकता है। अभी बड़े शहरों में साधारण कमरों का किराया 4000 से 5000 रुपये या उससे भी ज्यादा है, जिससे कम आय वाले मजदूरों, कारीगरों, प्लंबर, इलेक्ट्रीशियन और अन्य श्रमिकों पर आर्थिक दबाव बढ़ जाता है।
सरकार इस योजना में सरकारी एजेंसियों के साथ-साथ निजी बिल्डरों को भी शामिल करने जा रही है। निजी डेवलपर्स को प्रोत्साहित करने के लिए उन्हें जमीन उपयोग में बदलाव, नक्शा पास कराने और विकास शुल्क जैसी प्रक्रियाओं में राहत देने का प्रस्ताव है, ताकि अधिक से अधिक किफायती आवास बनाए जा सकें।
इन आवासों की व्यवस्था ऐसी होगी कि जब कोई श्रमिक वहां से चला जाए तो उसी घर को तुरंत किसी दूसरे जरूरतमंद कामगार को आवंटित किया जा सके, जिससे खाली मकानों की समस्या न रहे और संसाधनों का बेहतर उपयोग हो।
यह पहल पहले से चल रही प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत किफायती किराया आवास (Affordable Rental Housing) मॉडल का विस्तार मानी जा रही है, जिसे अब औद्योगिक क्षेत्रों में लागू किया जा रहा है।
सरकार का मानना है कि इससे श्रमिकों को काम के पास सस्ता और सुरक्षित आवास मिलेगा, उनकी जीवन-स्थितियां बेहतर होंगी और उद्योगों में निवेश तथा उत्पादन क्षमता को भी बढ़ावा मिलेगा।

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